जब मीडिया ने 'बुआ' के बारे में पूछा तो आपा खो बैठे अखिलेश

नई दिल्ली- पांच महीने पहले तक आने वाले सभी चुनावों में साथ-साथ चलने का दावा करने वाले अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और मायावती (Mayawati) के बीच पैदा हुई सियासी खटास का असर अब उनके आपसी ताल्लुकातों पर भी पड़ता नजर आ रहा है। लोकसभा चुनावों के दौरान दोनों के आपसी संबंध इतने गहरे हो गए थे कि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की पत्नी ने कन्नौज में सार्वजनिक मंच पर मायावती (Mayawati) से 'बुआ सास' की तरह पैर छूकर आशीर्वाद मांगा था। अब अखिलेश यादव 'बुआ' शब्द सुनकर ही आपा खोने लगे हैं।

फिर 'बुआ' मत कहना!

फिर 'बुआ' मत कहना!

मंगलवार के समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष गाजीपुर (Ghazipur) के करंडा इलाके में गोशिन्देपुर गांव पहुंचे थे। वहां पिछले 24 मई को उनकी पार्टी के जिला पंचायत सदस्य विजय यादव की हत्या हो गई थी। अखिलेश उसी मृत कार्यकर्ता को श्रद्धांजलि देने गए थे। न्यूज 18 के मुताबिक इसी दौरान एक कार्यक्रम में जब मौके पर मौजूद मीडिया वालों ने उनसे बातचीत के क्रम में 'बुआ' शब्द का इस्तेमाल किया तो वो चिढ़ गए। उन्होंने इसपर नाराजगी जताते हुए पत्रकारों को नसीहत दे डाली कि 'आपको ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, आप पत्रकार हैं।'

चुनाव के समय नहीं थी दिक्कत!

चुनाव के समय नहीं थी दिक्कत!

जब से यूपी (Uttar Pradesh News) में सपा-बसपा (SP-BSP) का गठबंधन हुआ था, मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में अखिलेश के लिए 'बबुआ' और मायावती के लिए 'बुआ' शब्द का खूब इस्तेमाल किया गया। कन्नौज में तो सार्वजनिक मंच पर डिंपल यादव को मायावती ने बहू की तरह आशीर्वाद भी दिया था। दोनों ओर से एक-दूसरे को उचित आदर-सम्मान और प्यार दिए जाने जैसी भावनाएं बहुत गर्व के साथ व्यक्त की गई थीं। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से पूरे चुनाव के दौरान कई बार इस तरह की बातें हुईं, लेकिन तब कभी भी उन्हे यह शब्द नहीं खटका था।

सियासी संबंधों पर ब्रेक, पारिवारिक रिश्तों पर सस्पेंस

सियासी संबंधों पर ब्रेक, पारिवारिक रिश्तों पर सस्पेंस

इससे पहले फिलहाल के लिए सपा-बसपा (SP-BSP) गठबंधन तोड़ने का औपचारिक ऐलान करने के लिए मायावती खुद मीडिया के सामने आई थीं। उन्होंने उन्हें सम्मान देने के लिए अखिलेश यादव और डिंपल यादव की खूब सराहना भी की थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि काफी गिले-शिकवे के बाद उनके रिश्ते सुधरे हैं, इसलिए राजनीतिक न सही, निजी तौर पर वो मधुर संबंध आगे भी बने रहेंगे। लेकिन, अखिलेश की बातों से लगता है कि वह अपनी चुनावी 'बुआ' की सियासी गुलाटी इतनी आसानी से हजम नहीं कर पा रहे हैं।

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