जानिए आईपीसी की धारा 124ए जो देशद्रोह से जुड़ी है
नई दिल्ली। पिछले चार दिनों से जेएनयू में जो कुछ भी हुआ है उसके बाद से ही देश में माहौल अजीब सा है। जेएनयू के स्टूडेंट लीडर कन्हैया कुमार को पुलिस ने देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन पर आईपीसी 124ए के तहत केस दर्ज किया गया है।
इस पूरे मसले पर आगे बढ़ने से पहले बता दें कि जेएनयू में दरअसल ऐसा क्या हुआ कि स्टूडेंट यूनियन लीडर को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।
नौ फरवरी को जिस दिन संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के तीन वर्ष पूरे हुए थे, उस दिन जेएनयू में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
अफजल की फांसी के विरोध में आयोजित हुए इस कार्यक्रम को एक अलग रंग उस समय मिल गया जब कैंपस परिसर में 'भारत की बर्बादी' और 'पाकिस्तान जिंदाबाद' जैसे नारे लगने लगे।
इस घटना का वीडियो आते ही स्टूडेंट्स और जेएनयू के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। शनिवार आते-आते तक कन्हैया कुमार को देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया तो वहीं 14 और छात्रों की गिरफ्तारियां हुईं।
आगे की स्लाइड्स में क्लिक करिए और जानिए क्या है यह कानून और अब तक कितने लोगों पर इसके तहत दर्ज हुआ है केस।

क्या है 124ए
अपने लिखित या फिर मौखिक शब्दों, या फिर चिन्हों या फिर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर नफरत फैलाने या फिर असंतोष जाहिर करने पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाता है।

होती है उम्रकैद
124ए के तहत केस दर्ज होने पर दोषी को उम्रकैद की सजा होती है।

क्या का केदारनाथ सिंह का मामला
बिहार के रहने वाले केदारनाथ सिंह पर वर्ष 1962 में राज्य सरकार ने देशद्रोह के मामले में केस दर्ज किया था। एक भाषण के मामले में राज्य सरकार ने उन पर केस दर्ज किया था जिस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

क् या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने
केदारनाथ सिंह के केस पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की एक बेंच ने आदेश दिया था। कॉन्स्टीट्यूशन बेंच की ओर से दिए गए आदेश में कहा गया, 'देशद्रोही भाषणों और अभिव्यक्ति को सिर्फ तभी दंडित किया जा सकता है जब उसकी वजह से किसी तरह की हिंसा, असंतोष या फिर सामाजिक असंतुष्टिकरण बढ़े।'

कब आया अस्तित्व में
सिडीशन या देशद्रोह पर कोई भी कानून सन 1859 तक नहीं था। इसे 1860 में बनाया गया और फिर सन 1870 में इसे आईपीसी में शामिल कर दिया गया।

हार्दिक पटेल
कन्हैया कुमार से पहले गुजरात में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग करने वाले हार्दिक पटेल को अक्टूबर 2015 में गुजरात पुलिस की ओर से देशद्रोह के मामले तहत गिरफ्तार किया गया था।

असीम त्रिवेदी
सितंबर 2012 में काटूर्निस्ट असीम त्रिवेदी को उनके साइट पर संविधान से जुड़े भद्दी और गंदी तस्वीरें पोस्ट करने की वजह से इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। यह कार्टून उन्होंने मुंबई में वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आंदोलन के समय बनाए थे।

बिनायक सेन
24 दिसंबर 2010 को बिनायक सेन पर नक्सल विचारधारा को फैलाने का आरापे लगाते हुए उन पर इस केस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। बिनायक के अलावा नारायण सान्याल और कोलकाता के बिजनेसमैन पीयूष गुहा को भी देशद्रोह का दोषी पाया गया था। इन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी लेकिन बिनायक सेना को 16 अप्रैल 2011 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जमानत मिल गई थी।

अरुंधति रॉय
वर्ष 2010 में लेखिका अरुंधति रॉय को कश्मीर और माओवादियों पर एक बयान देने की वजह से देशद्रोह के मामले के तहत बुक किया गया था।












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