बांग्लादेश में मतुआ ठाकुरबाड़ी क्या है ? जहां बंगाल चुनाव के दिन पहुंच रहे हैं पीएम मोदी

कोलकाता: देश में कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मार्च को अपनी पहली विदेश यात्रा पर ढाका पहुंच रहे हैं। उनकी इस बांग्लादेश यात्रा का महत्त्व इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि उसके अगले दिन ही बंगाल में पहले चरण का मतदान होना है। 27 मार्च को जिस दिन राज्य में वोटिंग होनी है, उसी दिन पीएम मोदी का ढाका से करीब 200 किलोमीटर दूर वहां के गोपालगंज इलाके में ओरकांडी पहुंचने का कार्यक्रम है। वहां पर वो मतुआ संप्रदाय के प्रमुख मंदिर या मतुआ ठाकुरबाड़ी में उसके संस्थापक का दर्शन करेंगे। इस दौरान उनके साथ बंगाल के बनगांव से बीजेपी के सांसद भी उनके साथ रहेंगे।

बंगाल चुनाव के दिन मतुआ ठाकुरबाड़ी जाएंगे पीएम मोदी

बंगाल चुनाव के दिन मतुआ ठाकुरबाड़ी जाएंगे पीएम मोदी

बांग्लादेश दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी के ओरकांडी पहुंचने के चुनावी मायने समझे जा सकते हैं। वो पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जो वहां पर मतुआ ठाकुरबाड़ी में पहुंचेंगे और मतुआ संप्रदाय के संस्थापक हरिचंद ठाकुर के दर्शन करेंगे। उनका जन्म 1812 में ओरकांडी के उसी स्थान पर हुआ था, जहां पर मतुआ ठाकुरबाड़ी मौजूद है। उन्हें मतुआ समाज ईश्वर का अवतार मानता है। मोदी का वहां मतुआ समाज के लोगों से मिलने और उनकी एक जनसभा को भी संबोधित करने का भी कार्यक्रम है। उनकी इस यात्रा को लेकर वहां के लोग काफी गदगद हैं, लेकिन उसका असर बंगाल की चुनावी सियासत पर भी पड़ सकता है। ठाकुर ने नामशूद्रों को सामाजिक समानता दिलाने के लिए इस संप्रदाय की स्थापना की थी और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़े पहल किए थे। बाद में उनके बेटे गुरुचंद ठाकुर ने संपूर्ण बंगाल में इस संप्रदाय का प्रचार-प्रसार किया था।

बंगाल की 30 सीटों पर मतुआ समाज का पूरा दबदबा

बंगाल की 30 सीटों पर मतुआ समाज का पूरा दबदबा

भारत के विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से बड़ी संख्या में मतुआ पश्चिम बंगाल आ गए थे। इस समाज में ऐसे शरणार्थियों की भी बड़ी संख्या है, जिन्हें आजतक भारतीय नागरिकता नहीं मिल पाई है। ऐसे मतुआ शरणार्थी नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, नदिया, जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी, कूच बेहार और बर्दवान में फैले हुए हैं। देश विभाजन के बाद बाद हरिचंद-गुरुचंद ठाकुर के वंशज प्रमथा रंजन ठाकुर और उनकी पत्नी बीणापानी देवी ने मतुआ महासंघ की क्षत्रछाया में राज्य में मतुआओं को एकजुट किया। महारानी बीणापानी देवी, 2019 में अपने निधन तक बोरो मां के नाम से भी मशहूर थीं और पीएम मोदी उनके दर्शन के लिए भी पहुंचे थे। अगर चुनावी गणित को देखें तो बंगाल की 30 विधानसभा सीटों पर मतुआ समुदाय का बहुत ज्यादा प्रभाव है, जबकि कुल 70 सीटों पर उनकी अच्छी-खासी आबादी है। यही वजह है कि गृहमंत्री अमित शाह मतुआ समाज के घर में कई बार भोजन कर आए हैं।

भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर भी पीएम मोदी के साथ रहेंगे

भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर भी पीएम मोदी के साथ रहेंगे

बीजेपी से मतुआ समाज का हालिया कनेक्शन ये है कि बोरो मां के पोते शांतनु ठाकुर बनगांव (सुरक्षित सीट) से पार्टी सांसद हैं और मतुआ ठाकुरबाड़ी के पीएम के दौरे में वो भी उनके साथ ही अपने पूर्वज के जन्मस्थान जाने वाले हैं। यही नहीं इस चुनाव में पार्टी ने उनके भाई सुब्रत ठाकुर को गायघाट सीट से टिकट भी दिया है। इसकी वजह ये है कि एक अनुमान के मुताबिक राज्य की कुल 7 करोड़ की आबादी में इस समाज की जनसंख्या 3 करोड़ तक है। लेकिन, पुष्ट अनुमानों के मुताबिक उनकी आबादी 1 करोड़ से कम भी नहीं है। यानी पीएम मोदी का बांग्लादेश की मतुआ ठाकुरबाड़ी में हरिचंद ठाकुर का दर्शन करना सीधे बंगाल के एक करोड़ से ज्यादा मतुआ आबादी के लिए एक सियासी संकेत माना जा सकता है, जो बंगाल जीत के बीजेपी के सपने को पूरा करने का बहुत ही बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

2019 में भाजपा को मिला मतुआ समाज का आशीर्वाद

2019 में भाजपा को मिला मतुआ समाज का आशीर्वाद

बांग्लादेश से आए मतुआ शरणार्थियों के लिए नागरिकता हमेशा से इस समाज की बड़ी मांग रही है। भाजपा ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का वादा करके 2019 के लोकसभा चुनाव में इनका पूरा समर्थन प्राप्त किया था। पार्टी वह वादा पूरा कर चुकी है, लेकिन यह कानून तकनीकी तौर पर अभी लागू नहीं हुआ है। यही वजह है कि हाल ही में ठाकुरनगर की रैली में गृहमंत्री अमित शाह इस समाज को फिर से भरोसा दे आए हैं कि कोविड-19 के टीकाकरण का काम पूरा हो जाए, फिर बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का काम शुरू कर दिया जाएगा। नॉर्थ 24 परगना के ठाकुरनगर को मतुआओं की राजधानी समझा जाता है। पहले बंगाल में मतुआ समाज को ममता बनर्जी का वोट बैंक समझा जाता था। लेकिन, 2014 के लोकसभा चुनाव में बीणापानी देवी के परिवार में ही राजनीतिक विभाजन देखने को मिला। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी जब फरवरी महीने में बोरो मां से मिले और उन्हें सीएए का भरोसा दिया तो मतुआ मोटे तौर पर भाजपा की ओर शिफ्ट हो गए।

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