चीनी डिप्‍लोमैट को भारत का जवाब, नहीं दे सकते हैं अरुणाचल का तवांग

चीन के राजनयिक दाई बिंग्‍ग्‍यूओ ने कहा है कि अगर भारत, तवांग, चीन को सौंप दे तो फिर चीन भी अक्‍साई चिन में छूट देगा। भारतीय अधिकारियों का कहना यह संभव नहीं है।

नई दिल्‍ली। चीन के राजनयिक की ओर से भारत को एक सलाह दी गई थी और उन्‍होंने कहा था कि इस सलाह से चीन-भारत सीमा विवाद सुलझ सकता है। अब भारत ने चीन के राजनयिक की सलाह को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत के अधिकारियों की ओर से क‍हा गया है यह संभव नही है।

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अरुणाचल और तवांग भारत का हिस्‍सा

चीन के राजनयिक दाई बिंग्‍ग्‍यूओ ने कहा है कि अगर भारत, तवांग, चीन को सौंप दे तो फिर चीन भी अक्‍साई चिन में छूट देगा। उन्‍होंने यह बात चाइना-इंडिया डायलॉग मैगजीन के साथ बातचीत में यह कहा है।दाई को राजनयिकों के समूह में एक बहुत सम्‍मानित राज‍नयिक माना जाता है। वह वर्ष 2013 में रिटायर हो गए थे। भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि बिंग्‍गूओ की सलाह मानना न तो संभव है और न ही उनकी सलाह प्रैक्टिकल है। चीन के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर बिंग्‍गूओ ने वर्ष 2003 से 2013 तक सीमा विवाद पर हुई 15 दौर तक चली बातचीत को नेतृत्‍व किया था। भारतीय अधिकारियों की ओर से उनकी इस सलाह पर कहा गया है कि तवांग, अरुणाचल प्रदेश को अपना एक आतंरिक हिस्‍सा मानता है और तवांग अरुणाचल प्रदेश का हिस्‍सा है। ऐसे में भारत इस सलाह को स्‍वीकार ही नहीं कर सकता है। अरुणाचल प्रदेश से वर्ष 1950 के चुनावों से प्रतिनिधि चुनकर संसद में आते हैं। पूर्व राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) शिव शंकर मेनन ने एक किताब लिखी थी जिसका नाम है, 'च्‍वाइसेज: इनसाइड द मेकिंग ऑफ इंडियाज फॉरेन पॉलिसी।' इस किताब में उन्‍होंने लिखा था कि वर्ष 1980 से चीन के अधिकारी कहते आ रहे हैं कि चीन को तभी कोई समझौता करना चाहिए जब भारत कोई बड़ा सामंजस्‍य करने को तैयार हो।

क्‍या कहा था दाई ने

दाई ने कहा है, 'अगर भारत चीन के सीमा के पूर्वी हिस्‍से से जुड़ी चिंताओं को समझता है तो फिर चीनी पक्ष भी किसी दूसरी जगह से जुड़ी भारत की चिंताओं का जवाब सही तरीके से देगा।' तवांग, बौद्ध मठ का घर है जो तिब्‍बती और भारतीय बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए पूजनीय है। उन्‍होंने कहा कि भारत-चीन की सीमा के पूर्वी हिस्‍से के क्षेत्र एक विवादित क्षेत्र है जिसमें तवांब भी है और तिब्‍बती सांस्‍कृतिक पृष्‍ठभूमि और प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र की वजह से इसे चीन से अलग नहीं किया जा सकता है। सीमा विवाद से जुड़े सवाल आज भी इसलिए मौजूद हैं क्‍योंकि चीन की जरूरी अनुरोधों को आज तक कभी पूरा नहीं किया गया है। दाई आज भी सरकार के काफी करीब हैं और उनकी हर बात को काफी गंभीरता से लिया जाता है। दाई की टिप्‍पणी काफी अहम है क्‍योंकि वह कभी भी बिना आधिकारिक मंजूरी के बिना कुछ नहीं कहते हैं।

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