क्या कहते हैं उपचुनाव के परिणाम, भाजपा के लिए बड़ा सबक या विपक्ष का बढ़ेगा कंफ्यूजन ?

नई दिल्ली, 2 नवंबर: 30 अक्टूबर को 14 राज्यों की 29 विधानसभा सीटों और दो राज्यों के अलावा एक केंद्र शासित प्रदेश की 3 लोकसभा सीटों के लिए उपचुनाव करवाए गए थे। अगर भाजपा के नजरिए से देखें तो यह उपचुनाव उसके लिए बहुत बड़ी सबक की तरह है। हिमाचल प्रदेश में अगले साल चुनाव होने वाले हैं, लेकिन उसकी जमीन वहां खिसकती नजर आ रही है। लेकिन, पूर्वोत्तर भारत में उसका असर बढ़ रहा है। खासकर असम में वह अजेय बढ़त बनाती दिख रही है। लेकिन, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने एक बार फिर से उसका सपना चकनाचूर कर दिया है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव ना सिर्फ हिमाचल से अच्छी खबर लेकर आया है, बल्कि राजस्थान ने भी उसका हौसला बढ़ाया है। जबकि, बिहार में कांग्रेस और उसकी सुख-दुख में करीब 3 दशकों की साथी रही आरजेडी को जबर्दस्त मुंह की खानी पड़ी है।

हिमाचल प्रदेश में भाजपा साफ, कांग्रेस मजबूत

हिमाचल प्रदेश में भाजपा साफ, कांग्रेस मजबूत

भाजपा के लिहाज से हिमाचल प्रदेश में तीन विधानसभाओं और एक लोकसभा सीट के लिए हुआ उपचुनाव बहुत ही खराब रहा है। मंडी लोकसभा सीट पर जहां 2019 के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी राम स्वरूप शर्मा 4 लाख से ज्यादा वोटों से जीते थे, वहां उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह भाजपा उम्मीदवार ब्रिगेडियर कुशल चंद ठाकुर से 7,490 वोटों से जीती हैं। इसी तरह कांग्रेस ने जुब्बल कोटखाई विधानसभा सीट भी बीजेपी से छीन ली है और फतेहपुर और अर्की विधानसभा क्षेत्रों में भी अपना कब्जा बरकरार रखा है। मतलब, यहां सत्ताधारी पार्टी को उपचुनाव में एक भी सीट नहीं मिली है और मुख्यमंत्री जय राम सिंह ठाकुर ने हार का ठीकरा महंगाई पर फोड़ा है।

पश्चिम बंगाल में अभी ममता का विकल्प नहीं

पश्चिम बंगाल में अभी ममता का विकल्प नहीं

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का इस वक्त कोई विकल्प नहीं बचा है और उनकी पार्टी टीएमसी ने उपचुनावों में चारों विधानसभा सीटों पर कब्जा कर लिया है। मई में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी दिनहाटा और शांतिपुर में जीती थी और टीएमसी गोसाबा और खरदाह में विजयी हुई थी। लेकिन, उपचुनाव में बीजेपी ने दोनों जीती हुई सीटें भी गंवा दी हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि यहां टीमएमसी की जीत का अंतर बहुत ही ज्यादा है। भाजपा इसी से संतोष कर सकती है कि वही मुख्य विपक्षी पार्टी की भूमिका निभाती रहेगी।

असम में भाजपा ही भाजपा

असम में भाजपा ही भाजपा

हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल में वोटरों ने बीजेपी को चुनावी सबक सिखाया है, लेकिन असम के वोटरों ने पार्टी को सिर पे बिठा लिया है। वहां 5 विधानसभा सीटों के लिए 30 अक्टूबर को वोटिंग हुई थी और 5 में से 3 पर भारतीय जनता पार्टी जीती है और 2 पर उसकी सहयोगी यूनाइटेज पीपुल्स पार्टी लिब्रल विजयी हुई है। सबसे बड़ी बात है कि भाजपा और यूपीपीएल की जीत का मार्जिन करीब 26 हजार से लेकर 57 हजार तक का है, जो कि विधानसभा चुनाव के हिसाब से काफी ज्यादा है। गोसाईगांव और तामुलपुर में यूपीपीएल को जीत मिली है और भबानीपुर, मरियानी और थोवरा में भाजपा के प्रत्याशी जीते हैं। यहां बीजेपी को 29.85%, कांग्रेस को 16.77% और एआईयूडीएफ को 4.39% वोट मिले हैं।

राजस्थान में गहलोत की बची रह सकती है कुर्सी

राजस्थान में गहलोत की बची रह सकती है कुर्सी

राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन यहां भी वोटरों ने बीजेपी को बहुत बड़ा झटका दिया है। राज्य में 2023 के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां की दोनों विधानसभा सीटों वल्लभनगर और धरियावाद में कांग्रेस के उम्मीदवार भारी मतों से चुनाव जीत गए हैं। वल्लभनगर कांग्रेस की सीट थी लेकिन, धरियावाद में भी भाजपा अपनी सीट नहीं बचा पाई है। धरिवाद की हार बीजेपी के लिए शर्मनाक मानी जा रही है, क्योंकि यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा है। इस उपचुनाव से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी को ही सबक नहीं सिखाया है, बल्कि कांग्रेस नेता सचिन पायलट पर भी फिलहाल दिल्ली दरबार में बढ़त बनाए रखा है।

बिहार में लालू नहीं आ पाए बेटे तेजस्वी के काम

बिहार में लालू नहीं आ पाए बेटे तेजस्वी के काम

बिहार में जेडीयू-भाजपा का गठबंधन अभी भी मतदाताओं के बीच लोकप्रिय है और सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड) ने मुंगेर जिले की तारापुर और दरभंगा जिले की कुशेश्वर स्थान दोनों विधानसभा सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। यह चुनाव मुख्य विपक्षी राजद के लिए सबसे बड़ा झटका है, जहां प्रचार के लिए उसने चार साल बाद चारा घोटाले में सजायाप्ता लालू यादव को भी उतारा था, लेकिन बाजी नीतीश कुमार के पार्टी के ही हाथ लगी है। कांग्रेस ने भी इस बार कन्हैया कुमार को शामिल करके लालू की छत्रछाया से अलग होने की कोशिश की थी, लेकिन उसे दोनों ही जगह चिराग पासवान की पार्टी से भी कम वोट मिले हैं।

मध्य प्रदेश में शिवराज ही करेंगे 'राज'

मध्य प्रदेश में शिवराज ही करेंगे 'राज'

मध्य प्रदेश में खंडवा लोकसभा सीट और तीन विधानसभा सीटों के उपचुनाव परिणाम से भी भाजपा खासकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का हौसला बढ़ गया है। मध्य प्रदेश की खंडवा लोकसभा सीट भाजपा के पास ही थी और इस उपचुनाव में भी उसके उम्मीदवार ज्ञानेश्वर पाटिल ने कांग्रेस उम्मीदवार राजनारायण सिंह पुरनी पर खबरे लिखने तक निर्णायक बढ़त बना ली थी। इसके अलावा उसने पृथ्वीपुर और जोबट की सीटें भी जीत ली हैं। सिर्फ रैगांव विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के हाथों में चली गई है। खासकर जोबट सीट पर मिली जीत से सीएम गदगद हैं, क्योंकि यह अनुसूचित जनजाति बहुल सीट है और उनके मुताबिक 70 वर्षों में भाजपा दो ही बार जीत सकी है।

कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा को 1-1 सीट

कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा को 1-1 सीट

कर्नाटक में विधानसभा की दो सीटों के लिए उपचुनाव हुए हैं, जिसमें सिन्डगी सीट भाजपा को मिली है तो हंगल में कांग्रेस ने दंगल जीत लिया है। हंगल की सीट कांग्रेस ने भाजपा को हराकर जीता है और वह इसलिए खुश है क्योंकि यह मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के चुनाव क्षेत्र से सटी हुई है।

तेलंगाना की सीट पर खिला 'कमल'

तेलंगाना की सीट पर खिला 'कमल'

लेकिन, दक्षिण के एक और राज्य तेलंगाना में भाजपा ने सबको चौंका दिया है। यहां उसने सत्ताधारी टीआरएस की गढ़ मानी जाने वाली हुजूराबाद सीट पर भारी बढ़त बना ली है। इस सीट पर बीजेपी के एटाला राजेंद्र तेलंगाना राष्ट्र समिति के गेल्लु श्रीनिवास यादव से 23,855 वोटों से निर्णायक बढ़त ले चुके हैं। आंध्र प्रदेश की बदवेल विधानसभा सीट पर सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी को 90 हजार से ज्यादा वोटों से जीत मिली है।

महाराष्ट्र से बाहर पहली बार लोकसभा सीट जीती शिवसेना

महाराष्ट्र से बाहर पहली बार लोकसभा सीट जीती शिवसेना

इन उपचुनावों में महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना को एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। पहली बार वह महाराष्ट्र से बाहर दादरा और नगर हवेली लोकसभा सीट जीतने में सफल हो गई है। यह सीट वहां से सात बार के निर्दलीय सांसद देलकर मोहनभाई सांजीभाई के निधन से खाली हुई थी। लेकिन, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने उनकी पत्नी देलकर कलाबेन मोहनभाई को अपना चुनाव निशान देकर परचम फहरा दिया है। उन्होंने सहानुभूति की लहर पर सवार होकर भाजपा के गवित महेशभाई को 51 हजार से ज्यादा वोटों से हराया है।

हरियाणा के ऐलनाबाद में फिर जीते अभय चौटाला

हरियाणा के ऐलनाबाद में फिर जीते अभय चौटाला

वहीं हरियाणा में ऐलनाबाद की जो सीट आईएनएलडी के अभय चौटाला के इस्तीफे से खाली हुई थी, उसपर वह दोबारा जीत गई हैं। उन्होंने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ इस्तीफा दिया था और उपचुनाव में उन्होंने अपनी यह सीट बरकरार रखी है। उन्होंने सिरसा जिले की इस सीट पर भाजपा के प्रत्याशी गोविंद कांडा को 6,739 वोटों से हराया है।

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