बंगाल में 'लोकतंत्र हत्या दिवस' क्यों मनाएगी बीजेपी? 21 जुलाई के लिए क्या है योजना?
बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार के विरोध के लिए 21 जुलाई को 'लोकतंत्र हत्या दिवस' मनाने का एलान किया है। बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी राज्य में सत्ताधारी दल की ओर से फैलाए गए कथित आतंक के विरोध में इस तरह का आयोजन करने जा रही है।
बता दें कि हर साल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी बंगाल में 21 जुलाई को 'शहीद' दिवस के रूप में मनाती है। इस बार भी तृणमूल की ओर से इस मौके पर कोलकाता में एक रैली का आयोजन किया गया है।

बंगाल में 'लोकतंत्र हत्या दिवस' क्यों मनाएगी बीजेपी?
बीजेपी नेता और बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा है, 'बंगाल में लोकतंत्र बचाने के लिए हम लोगों तक पहुंचेंगे। 21 जुलाई को हम बंगाल में 'लोकतंत्र हत्या दिवस' मनाएंगे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कोलकाता के मेयर फिरहाद कीम के पुतले फूंकेंगे।'
उन्होंने पार्टी की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन के बारे में कहा, 'हम चुनाव के बाद की हिंसा और टीएमसी की ओर से तैयार किए गए आतंक के शासन के खिलाफ एक जन आंदोलन का आयोजन करेंगे।'
यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण- टीएमसी
वहीं भाजपा नेता के बयान की निंदा करते हुए तृणमूल के प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने कहा, 'लोकतंत्र में भरोसा रखने वाले लोग 21 जुलाई को 'शहीद' दिवस की रैली में भाग लेने आते हैं, क्योंकि कई साल पहले इसी दिन युवा कार्यकर्ताओं के बलिदान से लोकतंत्र की रक्षा की गई थी। अब यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि बीजेपी उसी दिन 'लोकतंत्र हत्या दिवस' मनाए।'
21 जुलाई को 'शहीद' दिवस क्यों मनाती है टीएमसी?
बता दें कि तृणमूल सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हर साल 21 जुलाई को 'शहीद' दिवस मनाने के लिए कोलकाता में एक जनसभा करती हैं। यह आयोजन 21 जुलाई, 1993 को पश्चिम बंगाल यूथ कांग्रेस की ओर से हुए एक प्रदर्शन में मारे गए 13 लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए होता है। उस प्रदर्शन की अगुवाई तब खुद ममता ही कर रही थीं।
हालिया चुनावों में बंगाल में भाजपा का बहुत खराब रहा है प्रदर्शन
बंगाल में लोकसभा चुनावों के बाद एक बार फिर से राजनीतिक हिंसा की कई वारदातें देखने को मिली हैं, जिसका जिक्र संसद तक में हो चुका है। भाजपा का लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन पिछली बार से खराब हुआ है और 4 विधानसभा सीटों पर हुए हालिया उपचुनाव में भी उसकी हाथों से तीन सीटें निकल गई हैं। इस वजह से पार्टी सत्ताधारी दल पर बहुत ही ज्यादा हमलावर है।
चुनाव के बाद की हिंसा के विरोध में बीजेपी ने राज भवन के बाहर दिया धरना
रविवार को सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक चुनाव के बाद शुरू हुई कथित हिंसा के विरोध में एक धरना भी आयोजित किया। इसमें भाजपा के वे 300 कार्यकर्ता भी शामिल हुए, जो कथित तौर पर चुनाव के बाद की हिंसा के पीड़ित हैं। अधिकारी के साथ तापस रॉय जैसे अन्य भाजपा नेता भी इस धरने में शामिल हुए।
अधिकारी ने कहा है कि जल्द ही वह उन लोगों के साथ एक जन आंदोलन शुरू करने वाले हैं, जिन्हें हालिया विधानसभा उपचुनावों में कथित रूप से वोट नहीं डालने दिया गया।
मतदान से 'रोके' जाने वालों के लिए बीजेपी लॉन्च करेगी पोर्टल
अधिकारी ने कहा, 'कल (सोमवार को) मैं एक ऑनलाइन पोर्टल खोलूंगा, जहां पर जो लोग टीएमसी के आतंक की वजह से उपचुनाव में मतदान नहीं कर सके, अपना नाम दर्ज करा सकेंगे। पूरी गोपनीयता बरती जाएगी। हमें जैसे ही रेस्पॉन्स मिलेगा, हम जन आंदोलन शुरू कर देंगे और यहां तक कि न्याय के लिए राज भवन का भी दरवाजा खटखटाएंगे।'
भाजपा नेता ने राज भवन के बाहर धरना देने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट से अनुमति मांगी थी। वहां से मिले आदेश के तहत ही उन्होंने 14 जुलाई (रविवार) को सुबह 10 बजे से 4 घंटे के लिए राज भवन के बाहर धरना दिया है।












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