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West Bengal SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका या राहत? फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख बढ़ी, कोर्ट की 5 बड़ी बातें?

West Bengal SIR supreme court hearing highlights: पश्चिम बंगाल में चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित करने की तय तारीख 14 फरवरी से एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी है। यानी अब चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने के लिए ज्यादा समय मिलेगा, ताकि पूरी प्रक्रिया सही और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा सके।

यह फैसला उस समय आया है, जब SIR को लेकर चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच तीखी बहस चल रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और कई सख्त सवाल भी दागे।

West Bengal SIR supreme court hearing highlights

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIR जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी तरह की जल्दबाजी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि कोर्ट की प्राथमिकता यह है कि हर योग्य नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में रहे और किसी के साथ अन्याय न हो। इसी वजह से अंतिम मतदाता सूची जारी करने की समयसीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया।

कोर्ट ने माना कि नए अधिकारियों के जुड़ने से दस्तावेजों की जांच में अतिरिक्त समय लग सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि 14 फरवरी के बाद ERO को एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि हर मामले की सही तरीके से जांच हो सके।

चुनाव आयोग ने क्या दलील दी? (Election Commission Stand)

  • चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के लिए उन्हें पर्याप्त संख्या में सक्षम अधिकारी नहीं मिल पा रहे थे। इसी कारण जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में देरी हो रही है। आयोग ने यह भी कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद वे निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
  • इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट पर भी गंभीरता से गौर किया। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में आरोप लगाया था कि SIR प्रक्रिया का विरोध कर रहे कुछ लोगों ने Form-7 यानी आपत्ति दर्ज कराने वाले फॉर्म को जलाने जैसी घटनाएं की हैं। अदालत ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए।
  • मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने DGP से पूछा है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई।
  • केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि यह संदेश जाना बेहद जरूरी है कि संविधान देश के हर राज्य पर समान रूप से लागू होता है। केंद्र ने जोर दिया कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए SIR जैसी कवायद जरूरी है, लेकिन इसके दौरान नागरिकों के अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कौन-कौन से अंतरिम निर्देश दिए? (Supreme Court Interim Directions)

सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को सुचारु और निष्पक्ष बनाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए-

🔹पश्चिम बंगाल सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि 8,555 ग्रुप-B अधिकारी तय समय के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारियों (DRO) को रिपोर्ट करें।

🔹चुनाव आयोग को मौजूदा ERO और AERO को बदलने या योग्य अधिकारियों की सेवाएं लेने की छूट होगी।

🔹इन अधिकारियों को माइक्रो ऑब्जर्वर के तौर पर काम करने के लिए एक या दो दिन की संक्षिप्त ट्रेनिंग दी जा सकेगी।

🔹 माइक्रो ऑब्जर्वर केवल ERO की मदद करेंगे, अंतिम फैसला ERO का ही होगा।

🔹 कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को यह अधिकार दिया कि वह जरूरत पड़ने पर मौजूदा ERO और AERO को बदल सके और इन अधिकारियों की सेवाएं ले सके। अदालत ने साफ किया कि चयनित अधिकारी सिर्फ सहयोगी भूमिका में होंगे, जबकि अंतिम फैसला केवल ERO का ही माना जाएगा।

इस फैसले का क्या असर पड़ेगा? (Impact of Supreme Court Decision)

इस फैसले से एक तरफ जहां SIR प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगेगा, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम जल्दबाजी में सूची से बाहर न हो। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख आने वाले चुनावों से पहले बंगाल की राजनीति और चुनावी माहौल पर गहरा असर डाल सकता है।

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