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Bengal: SIR को लेकर EC का चला 'चाबुक'! चुनाव से पहले ममता दीदी के 7 बड़े अधिकारी सस्पेंड, क्या है पूरा मामाल?

Election Commission West Bengal News: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच TMC और ममत बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक साथ 7 बड़े अधिकारियों को निलंबित करने का फरमान जारी किया।

आयोग ने यह कड़ी कार्रवाई SIR (Special Intensive Revision) से जुड़े मामलों में गंभीर लापरवाही, कदाचार और शक्तियों के दुरुपयोग के आरोपों के बाद की है।

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आयोग ने राज्य के सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और मुख्य सचिव को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही (Disciplinary Proceedings) शुरू करने का निर्देश दिया है। इन अधिकारियों पर चुनावी ड्यूटी में 'गंभीर लापरवाही' के पुख्ता सबूत मिले हैं।

ECI Suspends 7 Officers WB: किन अधिकारियों पर गिरी गाज?

निलंबित होने वाले सभी अधिकारी AERO (Assistant Electoral Registration Officer) के रूप में कार्यरत थे। इनकी सूची इस प्रकार है:

मुर्शिदाबाद के AERO डॉ. सेफाउर रहमान

AERO, 55-फरक्का विधानसभा क्षेत्र के राजस्व अधिकारी नीतीश दास

AERO, 16-मयनागुड़ी विधानसभा क्षेत्र के महिला विकास अधिकारी डलिया रे चौधरी

AERO, 57-सूती विधानसभा क्षेत्र के ADA, सूती ब्लॉक शेख मुर्शिद आलम

AERO, 139-कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र के BDO सत्यजीत दास

AERO, 139-कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र के FEO जॉयदीप कुंडू

AERO, 229-देबरा विधानसभा क्षेत्र के संयुक्त BDO देबाशीष बिस्वास

Disciplinary Action का क्या है पूरा मामला, क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत मतदाता सूची का सत्यापन और संशोधन किया जाता है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने इस प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की और अपने वैधानिक अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया। इसी के चलते चुनाव आयोग ने इन पर 'Serious Misconduct' और 'Dereliction of Duty' जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

चुनाव आयोग को इन अधिकारियों के खिलाफ SIR (Statutory Investigation Report) के संबंध में वैधानिक शक्तियों के गलत इस्तेमाल की गंभीर शिकायतें मिली थीं। जांच में पाया गया कि:

अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए चुनावी कानूनों का उल्लंघन किया।

चुनावी ड्यूटी के दौरान जिस निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है, उसका पालन नहीं किया गया।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 13 CC के तहत आयोग ने इन अधिकारियों को दोषी पाया और अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें पद से हटा दिया।

Election Commission की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति

सूत्रों के मुताबिक, आयोग को इन अधिकारियों के खिलाफ सबूतों के साथ शिकायतें मिली थीं। पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में चुनाव आयोग किसी भी तरह की प्रशासनिक ढिलाई या पक्षपात को बर्दाश्त नहीं करने के मूड में है। यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर हेरफेर या लापरवाही भारी पड़ सकती है।

आयोग ने केवल निलंबन पर ही रोक नहीं लगाई है, बल्कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन सात अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्यवाही तुरंत शुरू की जाए। इससे साफ है कि इन अधिकारियों की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं।

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