West Bengal elections:नंदीग्राम से चुनाव लड़ने के ममता के ऐलान के पीछे क्या हो सकती है रणनीति ?

West Bengal assembly elections 2021:पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)ने नंदीग्राम(Nandigram) से चुनाव लड़ने की घोषणा करके बंगाल की राजनीति को गर्मा दिया है। यह वही नंदीग्राम है, जहां हुए किसान आंदोलन ने राज्य से 34 साल बाद वामपंथ के सूरज का अंत किया था और टीएमसी को वहां की अजेय ताकत बना दिया था। लेकिन, बंगाल की सत्ता में आने के 10 साल बाद ममता बनर्जी के लिए नंदीग्राम की अहमियत फिर से इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि वहां पर किसान आंदोलन के अगुवा रहे उनके दाहिने हाथ सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) अब भाजपा (BJP) के हो चुके हैं। अगर बंगाल की राजनीति को देखें तो टीएमसी (TMC) सुप्रीमो को मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी बागी से इतनी बड़ी चुनौती अबतक कभी नहीं मिली थी। 66 साल की तृणमूल नेता को पता है कि इस चुनाव में उनकी सियासी साख दांव लग चुकी है। इसलिए उनके ऐलान को टीएमसी के लिए मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

बंगाल में इसबार 'भाग्य' भरोसे ममता?

बंगाल में इसबार 'भाग्य' भरोसे ममता?

जिस शहर ने ममता बनर्जी को बंगाल का ताज दिलाया हो वहां भले ही वह पांच साल में पहली बार पहुंची हों, लेकिन नंदीग्राम (Nandigram)से चुनाव लड़ने का ऐलान करते हुए उन्होंने जो बातें कही हैं, उसपर गौर करना जरूरी है। तृणमूल सुप्रीमो ने कहा है, 'मैं नंदीग्राम से चुनाव लड़ूंगी। नंदीग्राम मेरे लिए भाग्यशाली जगह है।' मतलब, वह मानती हैं कि इसी शहर ने उन्हें सत्ता शिखर तक पहुंचाया है, इसलिए अब जब उनका राजनीतिक करियर दांव पर है तो उन्हें फिर यहीं से उम्मीद भी है। हालांकि, उन्होंने पूरी तरह यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह सिर्फ और सिर्फ नंदीग्राम से ही चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने अपने मौजूदा निर्वाचन क्षेत्र कोलकाता (Kolkata) की भवानीपुर (Bhowanipore)सीट से भी चुनाव लड़ने का विकल्प खुला रखा है। क्योंकि उन्होंने कहा है, 'नंदीग्राम मेरी बड़ी बहन है, भवानीपुर मेरी छोटी बहन है.....अगर संभव हुआ तो मैं दोनों जगहों से लड़ूंगी। अगर मैं भवानीपुर से चुनाव नहीं लड़ पायी तो कोई दूसरा लड़ेगा।'

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    West Bengal Assembly Election: Nandigram से चुनाव लड़ेंगी Mamata Banerjee | वनइंडिया हिंदी
    ममता के ऐलान के पीछे प्रशांत किशोर का दिमाग?

    ममता के ऐलान के पीछे प्रशांत किशोर का दिमाग?

    माना जा रहा है कि नंदीग्राम (Nandigram)से ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)के चुनाव लड़ने के ऐलान के पीछे पेशेवर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor)का दिमाग हो सकता है। गौरतलब है कि इस समय बंगाल में पार्टी चुनावी रणनीति के लिए उन्हीं की सेवाएं ले रही है। असल में इस रणनीति के पीछे वजह यह मानी जा रही है कि तृणमूल कांग्रेस बीजेपी में शामिल हुए बड़े जनाधार वाले नेता सुवेंदु अधिकारी(Suvendu Adhikari)को उनके गढ़ में ही घेरकर रखना चाहती है। इलाके में सुवेंदु के प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके साथ एक साथ 40 से ज्यादा टीएमसी (TMC) नेता पिछले दिसंबर में अमित शाह (Amit Shah) की मौजूदगी में भाजपा(BJP) में शामिल हो चुके हैं।

    सुवेंदु अधिकारी को एक सीट पर घेरने की रणनीति?

    सुवेंदु अधिकारी को एक सीट पर घेरने की रणनीति?

    नंदीग्राम आंदोलन से सुर्खियों में आए पूर्वी मिदनापुर जिले से आने वाले सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari)के परिवार का मुर्शीदाबाद, मालदा, पुरुलिया, बीरभूम या जंगलमहल से लेकर झारग्राम तक के इलाके में काफी राजनीतिक दबदबा माना जाता है। कहते हैं कि यहां अधिकारी बंधुओं ने अपने प्रभाव की बदौलत ही टीएमसी को जंगल और वहां के लोगों से जोड़कर सत्ता तक पहुंचने में मदद की है। बंगाल की राजनीति को समझने वाले एक्सपर्ट की मानें तो अधिकारी परिवार का राजनीतिक प्रभाव करीब 40 विधानसभा सीटों पर असर डाल सकता है। ऐसे में अगर सुवेंदु अधिकारी को खुद नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)के साथ सामना करना पड़ गया तो उनके लिए बाकी इलाकों के लिए वक्त निकालना मुश्किल हो सकता है और इसलिए उन्हें सिर्फ एक विधानसभा सीट तक घेरे रहने की तृणमूल की रणनीति हो सकती है। हालांकि, खुद बनर्जी के लिए भी यह दांव कम जोखिम भरा नहीं है। शायद यही वजह है कि उन्होंने दूसरी सीट से चुनाव लड़ने का विकल्प अभी छोड़ा नहीं है। क्योंकि, सुवेंदु ने भी ऐलान कर दिया है कि अगर नंदीग्राम में ममता को 50 हजार वोटों से नहीं हराया तो वो राजनीति छोड़ देंगे।

    नंदीग्राम से जुड़ा था टीएमसी का 'मा-माटी और मानुष' का नारा

    नंदीग्राम से जुड़ा था टीएमसी का 'मा-माटी और मानुष' का नारा

    2007 में हुए नंदीग्राम आंदोलन में उनके रोल की वजह से सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी के सबसे खास और टीएमसी के सबसे बड़े नेताओं में शामिल हो गए थे। उस आंदोलन की कामयाबी ने टीएमसी को ग्रामीण बंगाल में अजेय बना दिया था और आखिरकार इसी की वजह से लेफ्ट वहां की सत्ता से बेदखल हो गया। उस आंदोलन में आंदोलनकारी किसानों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में 14 लोग मारे गए थे। उसके बाद टीएमसी ने इसी आंदोलन को पार्टी का थीम बनाया और 'मा-माटी और मानुष' का नारा देकर बंगाल में भारी बहुमत से सरकारी बना ली।

    ममता की राजनीतिक घबराहट-बीजेपी

    ममता की राजनीतिक घबराहट-बीजेपी

    वैसे बीजेपी ने 10 साल में पहली बार नंदीग्राम से चुनाव लड़ने के ममता के ऐलान को राजनीतिक घबराहट करार दिया है। पार्टी के सोशल मीडिया प्रभारी और बंगाल के प्रभारी अमित मालवीय (Amit Malviya) ने ट्विटर पर लिखा है कि 'क्या वह बताएंगी कि नंदीग्राम में किसानों पर फायरिंग करवाने के लिए सीबीआई (CBI) से चार्जशीटेड आईपीएस (IPS) सत्यजीत बंधोपाध्याय को टीएमसी में शामिल क्यों किया?' उन्होंने कहा है कि '10 साल में पहली बार भवानीपुर से नंदीग्राम शिफ्ट होने का ममता बनर्जी का फैसला उनकी राजनीतिक घबराहट का संकते देता है।'

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