'लगा कि पूरा पहाड़ हमारे ऊपर गिर जाएगा....', वायनाड भूस्खलन में जीवित बचे शख्स ने शेयर किया भयावह मंजर
Wayanad landslide victim: केरल के वायनाड में मंगलवार को हुए भूस्खलन में गांव के गांव तबाह हो गए, 150 लोगों से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग बेघर हो चुके हैं। केरल के वायनाड जिले में बचाव अभियान जारी है और अभी भी सैकड़ों लोगों के फंसे होने की आशंका है।
आधी रात में जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे तब अचानक से हुए भूस्खलन के बाद जो उनके साथ हुआ उस खौफनाक मंजर को याद कर उनकी अभी भी रूंह कांप जा रही है। इस प्राकृतिक आपदा में जीतिव बचे लोगों में बहुत ऐसे हैं जिन्होंने अपनों को खो दिया है।

"हमें लगा कि पूरा पहाड़ हमारे ऊपर गिर जाएगा"
वायनाड भूस्खलन में जीवित बचे जयेश ने भी इस भयावह अनुभव को शेयर किया। उसने उस दर्दनाक घटना को याद करते हुए उसकी आंखें भर आई़। जयेश ने बताया "30 जुलाई को रात 1:30 बजे तेज आवाज सुनकर वह जाग गया और उसने देखा कि घर डोमिनोज़ की तरह ढह रहे हैं। हमें लगा कि पूरा पहाड़ हमारे ऊपर गिर जाएगा। हम उस समय मौत से लड़ रहे थे।"
कीचड़ में फसे हुए थे
जयेश ने बताया "मेरे घर के बगल में 3-4 घर हैं। हमने सभी को सतर्क कर दिया और पानी आने से पहले उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले गए। लेकिन जल्द ही, चारों ओर कीचड़ हो गया और लोग फंस गए। कीचड़ के ढेर में वो इतना फंस चुका था कि आगे बढ़ना मुश्किल हो गया था।
पत्नी के परिवार के नौ लोग अभी भी हैं लापता
जयेश ने बताया "इस भूस्खलन में करीब 200 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। अब केवल 4-5 घर ही बचे हैं। इनमें से ज़्यादातर घरों में लोग रह रहे थे।" उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी के परिवार के नौ सदस्य अभी भी लापता हैं, जिनमें से दो के शव अब तक बरामद किए जा चुके हैं।
पूरे इलाके में पांच ही लोग जिंदा बचे
जयेश के अनुसार तीसरा भूस्खलन सुबह 5:30 बजे हुआ, जिससे तबाही और बढ़ गई। जयेश के इलाके में सिर्फ़ पांच लोग ही बचे थे, जिनमें वह खुद, उसकी पत्नी, उसका बेटा और दो अन्य लोग शामिल थे। "हमारे सारे दस्तावेज़ खो गए हैं। हमें नहीं पता कि क्या करना है। हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है। कहां जाएं? कहां रहें?
राहत शिविरों में जाने के लिए नहीं कहा
मेप्पाडी के एक अन्य जीवित बचे स्टीफन ने आपदा के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि भूस्खलन से दो दिन पहले वायनाड में भारी बारिश हो रही थी। भूस्खलन वाले दिन दोपहर में ज़्यादा बारिश नहीं हुई। शाम को बारिश शुरू हो गई और किसी भी अधिकारी ने हमारी गली के लोगों को राहत शिविरों में जाने के लिए नहीं कहा।"
इतने बड़े भूस्खलन की नहीं थी उम्मीद
स्टीफन ने कहा कि "ऐसा झटका लगा जैसे हेलीकॉप्टर उतरने वाला हो।" इस घटना से वे बहुत दुखी थे और उन्होंने बताया कि उनकी बहनें और पड़ोसी मारे गए "मेरे बेटे ने मुझसे कहा कि हमें वहां से चले जाना चाहिए। हमने अपने पड़ोसियों को बुलाया, लेकिन किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि यह इतना बड़ा भूस्खलन और बर्बादी होगी इसलिए कोई नहीं आया।"
हाथ थामें पड़ी थी लाश
स्टीफन ने एक दिल दहला देने वाला पल भी साझा किया जब उन्होंने अपने पड़ोसियों को एक दूसरे का हाथ थामे हुए मृत अवस्था में पाया। उन्होंने भावुक होकर कहा "हमें उन्हें अलग करना पड़ा और उनके शवों को बाहर निकालना पड़ा।"
भूस्खलन में ये चार गांव हुए तबाह
बता दें भारी बारिश के बीच चार घंटे के भीतर लगातार हुए भूस्खलन ने मुंदक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों को तबाह कर दिया। अब तक 3,000 से ज़्यादा लोगों को बचाया जा चुका है और उन्हें राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।












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