सुप्रीम कोर्ट ने 'वक्फ कानून' को तत्काल सुनवाई के लिए किया सूचीबद्ध, कपिल सिब्बल समेत अब तक 10 याचिकाएं दायर
Waqf Amendment Act 2025: वक्फ संशोधन कानून को लेकर सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई का अनुरोध किया है। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करने पर सहमति दे दी है। इसको अब तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया गया है।
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक उल्लेख करने से इनकार कर दिया। पीठ ने मामले का उल्लेख कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से पूछा कि जब ईमेल भेजकर तत्काल सूचीबद्ध करने की व्यवस्था है तो मौखिक उल्लेख क्यों किया जा रहा है और उन्हें उल्लेख पत्र पेश करने के लिए कहा है।

ANI के मुताबिक जब सिब्बल ने कहा कि पत्र पहले ही ईमेल किया जा चुका है, तो सीजेआई ने कहा कि वह आज दोपहर इसकी जांच करने के बाद आवश्यक कार्रवाई करेंगे। सीजेआई ने कहा, "जब हमारे पास एक प्रणाली है तो आप इसका उल्लेख क्यों कर रहे हैं? एक तात्कालिकता पत्र भेजें और वह मेरे सामने रखा जाएगा। मैं आवश्यक कार्रवाई करूंगा। ये सभी अनुरोध हर दोपहर मेरे सामने रखे जाते हैं।" इस अधिनियम को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें कहा गया कि यह मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण है और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को अपनी मंजूरी दे दी हैं
गौरतलब है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को दोनों सदनो लोकसभा और राज्यसभा में पास किया जा चुका है। इस विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को अपनी मंजूरी दे दी हैं। बता दे कि वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी, आप विधायक अमानतुल्ला खान, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, इस्लामिक धर्मगुरुओं की संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी, केरल सुन्नी विद्वानों की संस्था समस्त केरल जमीयतुल उलेमा, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, एनजीओ एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पहले ही अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं।
यह कानून देश के संविधान पर सीधा हमला है: जमीयत उलमा-ए-हिंद
अपनी याचिका में जमीयत उलमा-ए-हिंद ने कहा है कि यह कानून देश के संविधान पर सीधा हमला है,यह विधेयक मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता छीनने की साजिश है। इसलिए, हमने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी है। AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा संशोधित अधिनियम वक्फ और उनके नियामक ढांचे को दी गई वैधानिक सुरक्षा को "अपरिवर्तनीय रूप से कमजोर" करता है, जबकि अन्य हितधारकों और हित समूहों को अनुचित लाभ प्रदान करता है। यह वक्फ प्रबंधन को कई दशकों तक पीछे धकेलता है।
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