Waqf Amendment Act 2025: आज से लागू हुआ नया वक्फ संशोधन कानून, केंद्र ने SC में दाखिल किया कैविएट
Waqf Amendment Act 2025: भारत में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 आज से पूरे देश में लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके अनुसार 8 अप्रैल 2025 को अधिनियम के सभी प्रावधान प्रभाव में आ गए हैं। सरकार ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर कर यह अनुरोध किया है कि इस अधिनियम के खिलाफ किसी भी याचिका पर आदेश देने से पहले केंद्र की बात जरूर सुनी जाए।
क्या है सरकार की अधिसूचना में?
गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार, वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की धारा 1 की उप-धारा (2) के अंतर्गत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए 8 अप्रैल को इसकी प्रभावी तिथि घोषित करती है। इसका मतलब है कि अब से यह कानून देशभर में लागू हो गया है।

पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शन
उधर, वक्फ संशोधन कानून के विरोध में मंगलवार पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से हिंसा की खबरें सामने आई हैं। शाम को मुर्शिदाबाद में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों समेत कई वाहनों को आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों से झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके। पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया।

कैविएट का मतलब क्या है?
कैविएट एक प्रकार की अग्रिम अर्जी होती है जिसे सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में दाखिल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी याचिका पर बिना उस पक्ष को सुने कोर्ट कोई आदेश न दे। केंद्र ने यह कैविएट उन याचिकाओं के खिलाफ दायर की है जिनमें वक्फ संशोधन अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
विरोध में दायर हुईं कई याचिकाएं
वक्फ कानून में हुए संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब तक 10 से अधिक याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। इन याचिकाओं में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद समेत कई नेताओं और संगठनों की याचिकाएं शामिल हैं। 7 अप्रैल को चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करने का आश्वासन दिया।
संसद से पास होकर राष्ट्रपति की मंजूरी
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को संसद के दोनों सदनों ने बहस और मतदान के बाद पारित किया था। राज्यसभा में 128 सांसदों ने इसके पक्ष में जबकि 95 ने विरोध में मतदान किया। लोकसभा में यह विधेयक 288 मतों से पारित हुआ, जबकि 232 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया। 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे अपनी मंजूरी दी थी।












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