'अगर न्यायाधीश बनना चाहते हैं तो तकनीक का ज्ञान सीखना होगा', CJI ने HC के जजों को हाइब्रिड सुनवाई पर दी नसीहत
CJI DY Chandrachud: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने जजों को नई नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि अगर आप न्यायाधीश बनना चाहते हैं तो आपको नई टेक्नोलॉजी सीखनी होगी। उन्होंने साफ कहा कि न्यायाधीशों के लिए तकनीक अब पसंद का मामला नहीं है। इसे आप पसंद या नापसंद नहीं कर सकते हैं। अगर आप जज बनना चाहते हैं तो आपको तकनीक सीखनी होगी।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जजों पर नाराजगी जाहिर की। दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट के जज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअल या हाइब्रिड मोड सुनवाई नहीं कर रहे थे। इसी को लेकर सीजीआई काफी भड़क गए।

'हाइब्रिड मोड को भंग न किया जाए'
बता दें कि सीजेआई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए कि हाइब्रिड मोड को भंग न किया जाए। पीठ ने कहा कि हम केंद्रीय आईटी मंत्रालय को ऑनलाइन सुनवाई तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों की अदालतों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं।
हाइब्रिड सुनवाई पर मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल और नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन के रजिस्ट्रारों को भी अपने हलफनामे पेश करने के लिए कहा। जिसमें बताया जाए कि निकायों द्वारा हाइब्रिड सुनवाई की अनुमति दी जा रही है या नहीं।
7210 करोड़ रुपये की मंजूरी
पिछले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति की अध्यक्षता में ई-कोर्ट मिशन के तीसरे चरण के लिए 7210 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। सीजेआई ने साफ कहा कि यह सवाल नहीं है कि एक जज टेक्नोलॉजी फ्रेंडली है या नहीं। लेकिन अगर आप जज बनते हैं तो आपको टेक्नोलॉजी के अनुकूल होना ही होगा। आपको तकनीक का ज्ञान लेना ही होगा।
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