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Voter List Update: वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिला? जानिए कैसे दोबारा बन सकेंगे वोटर, पूरा प्रोसेस और आखिरी तारीख

Voter List Update: देश के कई हिस्सों में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ी हलचल है। अगर आपको लग रहा है कि आपका नाम अचानक मतदाता सूची से गायब हो सकता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गोवा, लक्षद्वीप और पुडुचेरी की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है।

इस ड्राफ्ट लिस्ट में कुल 1.02 करोड़ मतदाताओं के नाम नहीं हैं। यही वजह है कि लाखों लोग अब यह जानना चाहते हैं कि आगे क्या होगा और वे दोबारा वोटर कैसे बन सकते हैं।

Voter List Update

🟡 कितने वोटर कटे और क्यों बढ़ी चिंता?

चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 को SIR की घोषणा की थी। उस समय इन पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 13.35 करोड़ मतदाता दर्ज थे। अब जो ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आई है, उसमें मतदाताओं की संख्या घटकर 12.33 करोड़ रह गई है। यानी करीब 7.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

यह आंकड़ा अपने आप में बड़ा है और इसलिए चिंता भी स्वाभाविक है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ड्राफ्ट रोल में केवल उन्हीं लोगों के नाम रखे गए हैं, जिन्होंने 4 नवंबर 2025 से शुरू हुई गणना प्रक्रिया के दौरान अपने जरूरी फॉर्म जमा किए थे।

🟡किन वजहों से हटाए गए नाम

जिन 1.02 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें तीन कैटेगरी में रखा गया है। पहली कैटेगरी में वे लोग हैं जो स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं या गणना के समय घर पर नहीं मिले।

दूसरी कैटेगरी में मृत मतदाता शामिल हैं। तीसरी कैटेगरी में ऐसे वोटर हैं, जिनके नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज पाए गए। औसतन यह कटौती बिहार में अगस्त 2025 में हुई SIR प्रक्रिया जैसी ही है, जहां लगभग 8 प्रतिशत नाम हटाए गए थे।

🟡 राज्यों का हाल, कहां कितने नाम कटे

राजस्थान में सबसे ज्यादा असर दिखा है। यहां करीब 42 लाख नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 7.66 प्रतिशत है।

इनमें 8.75 लाख मृत मतदाता, 29.6 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित या अनुपस्थित लोग और 3.44 लाख डुप्लीकेट वोटर शामिल हैं। गोवा में एक लाख से ज्यादा नाम कटे हैं। पुडुचेरी में भी 1.03 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं।

🟡 ड्राफ्ट लिस्ट है, घबराने की जरूरत नहीं

अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग साफ कर चुका है कि यह फाइनल लिस्ट नहीं है। 17 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक दावा और आपत्ति की प्रक्रिया चलेगी। इस दौरान अगर किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से हट गया है, तो वह जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकता है। फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।

🟡 ऐसे चेक करें आपका नाम लिस्ट में है या नहीं

  • आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अपना नाम जांच सकते हैं।
  • ऑनलाइन के लिए https://electoralsearch.eci.gov.in/ लिंक पर जाकर जांच की जा सकती है।
  • यहां दो विकल्प मिलते हैं। पहले विकल्प में EPIC नंबर यानी वोटर आईडी नंबर डालकर नाम खोजा जा सकता है।
  • दूसरे विकल्प में जिला और विधानसभा सीट चुनकर पूरी बूथ लिस्ट डाउनलोड कर नाम देखा जा सकता है।

ऑनलाइन के लिए आप इसके अलावा बीएलओ, वार्ड ऑफिस या राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स के पास भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उपलब्ध रहेगी।

🟡 नाम नहीं मिला तो क्या करें?

  • अगर नाम खोजने पर नहीं मिल रहा है, तो पहले यह सुनिश्चित करें कि आपने नाम, पिता का नाम और जन्मतिथि सही डाली है।
  • इसके बाद देखें कि कहीं आपका नाम एब्सेंट, शिफ्टेड या डेड कैटेगरी में तो नहीं डाल दिया गया।
  • सही जानकारी के लिए तुरंत अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क करें। बीएलओ आपको कारण बताएंगे और आगे की प्रक्रिया समझाएंगे।
  • जरूरत पड़ने पर आप एसडीएम कार्यालय में आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं।

🟡 नाम जुड़वाने की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज

  • अगर आपका नाम कटने वाली सूची में है और आप उसे जुड़वाना चाहते हैं, तो 15 जनवरी 2026 तक आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं।
  • इसके लिए फॉर्म 6 के साथ घोषणा पत्र भरना होगा। पहचान के लिए वोटर आईडी, आधार कार्ड या चुनाव आयोग द्वारा मान्य अन्य दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं।
  • नए वोटर और युवा मतदाता भी एडवांस फॉर्म 6 भरकर आवेदन कर सकते हैं।

🟡अगर आपत्ति नहीं की तो क्या होगा?

अगर आपने समय रहते दस्तावेज नहीं दिए और आपत्ति दर्ज नहीं की, तो आपका नाम फाइनल वोटर लिस्ट से कट जाएगा। इसका मतलब होगा कि आप वोटर नहीं रहेंगे और आपका वोटर कार्ड अमान्य हो जाएगा। हालांकि बाद में भी नाम जुड़वाने का विकल्प खुला रहेगा, क्योंकि वोटर लिस्ट का रिवीजन हर साल होता है।

🟡 SIR में नाम होना क्यों जरूरी

एसआईआर का मकसद वोटर लिस्ट को साफ और अपडेट रखना है। अगर आपका नाम इस एसआईआर में शामिल है, तो आगे होने वाले रिवीजन में आपको बार बार दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यह भी साबित होता है कि आप उस क्षेत्र में लगातार रह रहे हैं। अगर इस बार नाम नहीं रहा, तो अगली एसआईआर में आपको और आपके बच्चों को अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।

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