विवेक तिवारी के मर्डर वाली रात क्या-क्या और कैसे हुआ, सना ने किए बड़े खुलासे

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में आधी रात को दफ्तर से अपने घर लौट रहे एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के मामले में उनकी सहकर्मी सना खान ने बड़े खुलासे किए हैं।

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में आधी रात को दफ्तर से अपने घर लौट रहे एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के मामले में उनकी पूर्व सहकर्मी सना खान ने बड़े खुलासे किए हैं। सना खान के खुलासों से एक बार फिर यूपी पुलिस की लचर कार्यप्रणाली और इस केस में बरती गई लापरवाही सामने आई है। विवेक तिवारी को कथित तौर पर गाड़ी नहीं रोकने पर बीते शुक्रवार की रात यूपी पुलिस के कांस्टेबल प्रशांत चौधरी ने गोली मार दी थी, जिसके बाद विवेक की मौत हो गई।

'गाड़ी के शीशे खोलकर बातें कर रहे थे हम दोनों'

'गाड़ी के शीशे खोलकर बातें कर रहे थे हम दोनों'

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सना खान ने घटना वाली रात के बार में बताया, 'हमारे ऑफिस में उस रात आईफोन की लॉन्चिंग थी और पूर्व कर्मचारी होने के चलते मैं भी उस इवेंट में गई थी। कार्यक्रम में पुराने साथियों से बातचीत हुई और बातें करते-करते ज्यादा समय हो गया तो विवेक सर मुझे अपनी गाड़ी से घर छोड़ने निकले। रात के करीब एक बजे का समय होगा, हम गोमतीनगर में सरयू अपार्टमेंट के पास गाड़ी रोककर और शीशे खोलकर बातें कर रहे थे। इसी दौरान बाइक पर गश्त कर रहे पुलिस के दो सिपाही वहां पहुंचे और नाम-पता जानने के बाद हमसे पूछा कि इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो? इस दौरान एक सिपाही ने हमसे गाली देकर बात की, जिसपर विवेक सर ने विरोध करते हुए गाड़ी पीछे की और जाने लगे। तभी एक सिपाही ने अपनी पिस्टल निकालकर और डिवाइडर पर खड़े होकर विवेक सर को गोली मार दी।'

'हमारी गाड़ी से नहीं लगी किसी पुलिसवाले को चोट'

'हमारी गाड़ी से नहीं लगी किसी पुलिसवाले को चोट'

सना ने घटना वाली रात के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, 'जिस समय हम गाड़ी रोककर बातें कर रहे थे, तो दोनों पुलिसवालों ने हमारी गाड़ी की साइड में अपनी बाइक को तिरछा खड़ा किया। पुलिसवालों ने हमसे जब वहां रुकने की वजह पूछी तो हम लोगों ने आईफोन के लॉन्चिंग इवेंट के बारे में सबकुछ बताया। इसके बावजूद एक पुलिसकर्मी ने गाली देकर बात की। विवेक सर पुलिस से उलझना नहीं चाहते थे इसलिए वहां से जाने लगे और अपनी गाड़ी बैक करने लगे। गाड़ी की साइड में खड़े एक पुलिसकर्मी को बचाते हुए जैसे ही विवेक सर ने गाड़ी पीछे ली तो उनकी गाड़ी साइड में तिरछी खड़ी बाइक से टकरा गई। सिपाही की गोली लगने के बाद विवेक सर अस्पताल के लिए तेजी से गाड़ी लेकर भागे और कुछ दूर जाकर गाड़ी अंडरपास की दीवार से टकरा गई। इस दौरान विवेक की गाड़ी से दोनों में से किसी भी पुलिसकर्मी को कोई चोट नहीं लगी थी।

'विवेक को टारगेट कर दोनों हाथ से चलाई गोली'

'विवेक को टारगेट कर दोनों हाथ से चलाई गोली'

उस रात के बारे में और जानकारी देते हुए सना ने बताया, 'विवेक सर की गाड़ी का पहिया बाइक पर चढ़ने से गुस्साए पुलिसवाले ने फिर से गाली देते हुए अपनी पिस्टल निकाली और दोनों हाथों से पिस्टल को पकड़कर विवेक सर पर निशाना साधते हुए गोली चलाई। उस पुलिसवाले की गोली विवेक सर की ठोड़ी पर लगी और खून बहने लगा। गोली लगने के बाद करीब 1 मिनट तक विवेक सर होश में थे। विवेक सर की गाड़ी अंडरपास की दीवार से टकराने के बाद जब पुलिस आई तो काफी देर तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद पुलिस विवेक सर को जीप में ही पिछली सीट पर बिठाकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल लेकर पहुंची। इस दौरान काफी समय बीत चुका था और विवेक सर बेहोश थे। अस्पताल पहुंचने के कुछ देर बाद पता चला कि विवेक सर मर चुके हैं। अगर उन्हें समय से अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद वो बच जाते।'

'घर छोड़ने के नाम पर थाने ले जाकर बिठाया'

'घर छोड़ने के नाम पर थाने ले जाकर बिठाया'

सना के मुताबिक, 'गोली पुलिस कांस्टेबल प्रशांत ने चलाई थी। उस वक्त वहां कई ट्रक ड्राइवर मौजूद थे, लेकिन कोई भी हमारी मदद के लिए आगे नहीं आया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जब बताया कि विवेक सर मर चुके हैं तो पुलिसकर्मियों ने मामले को लेकर मुझसे पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने कहा कि तुम्हें हम घर छोड़ देते हैं। मैं पुलिस की जीप में बैठ गई, लेकिन पुलिसकर्मी मुझे मेरे घर ना ले जाकर कैसरबाग थाने ले आए। यहां बिठाकर फिर से मुझसे काफी देर तक पूछताछ की गई। इसके बाद मुझे पुलिस जीप से गोमती नगर थाने ले जाया गया और यहां भी कई अधिकारियों ने मुझसे पूछताछ की। उस घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी मेरी आंखों से उस रात का खौफनाक मंजर नहीं हट रहा।'

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