विशाखापत्तनम: वाईएसआरसीपी नेताओं में है भारी असंतोष, एक के बाद एक दिए जा रहे इस्तीफे
2024 में आंध्र प्रदेश विधानसभा होने वाले हैं, हालांकि चुनाव होने में अभी काफी समय है लेकिन अभी से सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के नेताओं में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी होने के बावजूद इसके नेताओं द्वारा एक के बाद एक दिए जा रहे इस्तीफो के कारण वाईएसआरसीपी कैडर के बीच अशांति की भावना पैदा कर रहे हैं।

चुनाव से पहले नेताओं का राजनीतिक दल बदलना सामान्य बात है लेकिन विशाखापत्तनम में वाईएसआरसीपी में चुनाव से महीनों पहले ऐसा देखा जा रहा है। बीते सप्ताह एक हफ्ते में वाईएसआरसीपी के दो नेताओं ने पार्टी पदों से इस्तीफा देकर पार्टी को अलविदा कर दिया।
इनमें वाईएसआरसीपी के 39वें वार्ड पार्षद और आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य मोहम्मद सादिक और गजुवाका विधायक तिप्पला नागिरेड्डी के बेटे और वाईएसआरसीपी गजुवाका निर्वाचन क्षेत्र समन्वयक तिप्पला देवन रेड्डी का नाम शामिल है।
आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य मोहम्मद सादिक ने आरोप लगाया कि दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र के विधायक वासुपल्ली गणेश कुमार विकास और स्थानीय मुद्दों को सुलझाने में विफल रही। इसके साथ ही उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र की खामियों के बारे में मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और बार-बार वाईएसआरसीपी के क्षेत्रीय समन्वयक वाईवी सुब्बा रेड्डी के ध्यान में लाया गया लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया और ना ही कोई कार्रवाई की गई।
सादिक ने अफसाेस जताया कि शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई और इसलिए उन्होंने अपने पद और पार्टी की सदस्यसता से इस्तीफा दे दिया।
वहीं सोमवार को वाईएसआरसीपी गजुवाका निर्वाचन क्षेत्र के समन्वयक तिप्पाला देवन रेड्डी ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। रेड्उी गजुवाका निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन की आकांक्षा आलाकमान के कदम के अनुरूप नहीं है, इसलिए उन्होंने अपना इस्तीफा देने का फैसला किया।
गौरतलब है सत्तारूढ़ दल के नेताओं के ताबड़तोड़ इस्तीफे के बाद विपक्षी दल के नेताओं का अनुमान है कि वाईएसआरसीपी को इस तरह के दलबदल के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि उन्हें लगता है कि सत्तारूढ़ दल के कई नेता भी ऐसा ही करेंगे।












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