CP Radhakrishnan Vs Tiruchi Siva: उपराष्ट्रपति चुनाव में OBC बनाम OBC! राधाकृष्णन गौंडर तो तिरुचि किस जाति से?
CP Radhakrishnan Vs Tiruchi Siva Cast Politics: उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 अब तमिलनाडु की सियासत का रणक्षेत्र बन चुका है। NDA ने महाराष्ट्र के गवर्नर और बीजेपी के दिग्गज सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा, जो OBC गौंडर (कोंगु वेल्लालार) समुदाय से हैं। जवाब में, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक DMK के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद तिरुचि सिवा को अपना संभावित उम्मीदवार चुनने पर विचार कर रही है, जो OBC तेवर (देवर) समुदाय से हैं।
18 अगस्त 2025 को मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में तिरुचि सिवा का नाम खूब सुर्खियों में रहा। अब 19 अगस्त को INDIA ब्लॉक का आधिकारिक घोषणा संभव है। यह OBC बनाम OBC की सियासी जंग 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले दोनों गठबंधनों के लिए प्रतीकात्मक और रणनीतिक रूप से अहम है। आइए, समझें आखिर क्यों तिरुचि सिवा? क्या है उनकी जाति?

NDA का मास्टरस्ट्रोक: सीपी राधाकृष्णन- गौंडर चेहरा
जातिगत पहचान: 67 वर्षीय राधाकृष्णन तमिलनाडु के पश्चिमी क्षेत्र (कोयंबटूर, तिरुपपुर, इरोड) के OBC गौंडर (कोंगु वेल्लालार) समुदाय से हैं। यह समुदाय, जो राज्य की 18% आबादी का हिस्सा है, AIADMK का मजबूत वोटबैंक रहा है। RSS स्वयंसेवक (16 साल की उम्र से), कोयंबटूर से दो बार सांसद (1998, 1999), तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष (2004-06), और झारखंड-महाराष्ट्र के गवर्नर। 2016-20 तक कोयर बोर्ड अध्यक्ष के रूप में निर्यात को 2,532 करोड़ तक ले गए।
NDA का दांव:
- RSS के साथ मेलजोल: 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की 240 सीटों (बहुमत से 32 कम) के बाद RSS से मतभेद की खबरें थीं। राधाकृष्णन का चयन वैचारिक एकजुटता का संदेश है।
- तमिलनाडु में पैठ: गौंडर समुदाय और AIADMK गठबंधन (2024 में NDA का हिस्सा) के जरिए बीजेपी 2026 में तमिलनाडु में अपनी जमीन मजबूत करना चाहती है।
- उत्तर भारत में अपील: OBC चेहरा उत्तर भारत में बीजेपी की समावेशी हिंदुत्व की छवि को चमकाएगा।
सियासी ताकत: NDA के पास 293 सांसद (बीजेपी: 240, TDP: 16, JD(U): 12, AIADMK: 4, अन्य) हैं, जो 788 सदस्यों वाले इलेक्टोरल कॉलेज में मजबूत स्थिति देता है।
DMK का ट्रम्प कार्ड: तिरुचि सिवा- तेवर का तड़का!
जातिगत पहचान: 71 वर्षीय तिरुचि सिवा तमिलनाडु के दक्षिणी (तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन, कन्याकुमारी) और मध्य (त्रिची, करूर) क्षेत्रों में प्रभावशाली OBC तेवर (देवर) समुदाय से हैं। यह समुदाय (8-10% आबादी) DMK और AIADMK (जयललिता युग) का वोटबैंक रहा है।
INDIA ब्लॉक का दांव:
- द्रविड़ गौरव: सिवा का चयन तमिलनाडु में सामाजिक न्याय और तमिल अस्मिता को मजबूत करता है। NEET और CAA के खिलाफ उनकी मुखरता DMK की छवि को चमकाती है।
- विपक्षी एकता: DMK की कनिमोझी ने सपा, टीएमसी, और CPI(M) से समर्थन जुटाया, हालांकि टीएमसी गैर-राजनीतिक चेहरा चाहती थी।
- 2026 का रास्ता: तेवर समुदाय, जो 60 विधानसभा सीटों पर प्रभावी है, DMK को AIADMK और बीजेपी के खिलाफ बढ़त देगा।
सियासी ताकत: INDIA ब्लॉक के पास 240+ सांसद (कांग्रेस: 99, DMK: 22, टीएमसी: 29, सपा: 37) हैं, लेकिन बहुमत के लिए 150+ वोटों की जरूरत है।
OBC vs OBC: जातिगत समीकरण का खेल
गौंडर (राधाकृष्णन):
- प्रभाव: पश्चिमी तमिलनाडु में गौंडर समुदाय की पकड़। 2019 में बीजेपी को 20% गौंडर वोट मिले।
- सियासी दांव: AIADMK के गौंडर नेता (ई. पलानीस्वामी) के साथ गठजोड़ बीजेपी को 2026 में फायदा देगा।
- सीमा: द्रविड़ राजनीति में सामाजिक न्याय के मुद्दे गौंडर प्रभाव को सीमित कर सकते हैं।
तेवर (तिरुचि सिवा):
- प्रभाव: दक्षिण और मध्य तमिलनाडु में तेवर समुदाय की मजबूत मौजूदगी। 2019 में DMK को 21% तेवर वोट मिले।
- सियासी दांव: शशिकला और ओ. पन्नीरसेल्वम की AIADMK से बर्खास्तगी के बाद तेवर समुदाय DMK की ओर झुका। सिवा का चयन इसे और पक्का करेगा।
- अपील: सिवा की सामाजिक न्याय की वकालत (ट्रांसजेंडर बिल, NEET विरोध) तमिल युवाओं और द्रविड़ गौरव को आकर्षित करती है।
जातिगत गणित:
- तमिलनाडु की 68% OBC आबादी में गौंडर (18%) और तेवर (8-10%) अहम हैं।
- उपराष्ट्रपति चुनाव में जातिगत प्रभाव प्रतीकात्मक है, लेकिन 2026 के लिए यह दोनों दलों की रणनीति को आकार देगा।
गौंडर पश्चिम में, तेवर दक्षिण और मध्य तमिलनाडु में प्रभावी हैं। दोनों समुदायों का 2026 के विधानसभा चुनावों में असर होगा, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में इसका प्रभाव प्रतीकात्मक है। बीजेपी की रणनीति गौंडर समुदाय के जरिए AIADMK के साथ गठबंधन को मजबूत करना है, जबकि DMK तेवर समुदाय के जरिए अपनी द्रविड़ अस्मिता को पुख्ता कर रही है।
वोटों का गणित: कौन कितना भारी?
इलेक्टोरल कॉलेज:
- कुल मतदाता: 788 (लोकसभा: 543, राज्यसभा: 233 निर्वाचित + 12 मनोनीत)।
- बहुमत के लिए जरूरी: 395 वोट।
NDA की स्थिति को समझें
- समर्थन: 293 सांसद (बीजेपी: 240, JD(U): 12, TDP: 16, शिवसेना: 7, NCP: 1, AIADMK: 4, अन्य)।
- अतिरिक्त समर्थन: YSRCP (4), PMK (1), और गैर-गठबंधन सांसदों से 20-30 वोट मिलने की संभावना।
- कुल अनुमानित वोट: 310-320।
- रणनीति: राधाकृष्णन की OBC गौंडर छवि और RSS पृष्ठभूमि गठबंधन को एकजुट रखेगी। PM मोदी की तारीफ और AIADMK का समर्थन उनकी जीत को पक्का करता है।
INDIA ब्लॉक की स्थिति को समझें
- समर्थन: 240+ सांसद (कांग्रेस: 99, DMK: 22, टीएमसी: 29, सपा: 37, अन्य)।
- अतिरिक्त समर्थन: BJD (9), और कुछ गैर-गठबंधन सांसदों से 10-20 वोट मिल सकते हैं।
- कुल अनुमानित वोट: 250-260।
- चुनौती: टीएमसी और कुछ अन्य दलों की गैर-राजनीतिक उम्मीदवार की मांग के कारण एकता में दरार संभव।
निर्दलीय और अन्य: करीब 100 सांसद गैर-गठबंधन हैं, जिनमें से ज्यादातर NDA की ओर झुक सकते हैं।
तिरुचि सिवा से DMK और INDIA ब्लॉक को क्या फायदा?
- तमिलनाडु में DMK की ताकत: तेवर समुदाय का समर्थन DMK को दक्षिण और मध्य तमिलनाडु में 2026 में बढ़त देगा।
- द्रविड़ अस्मिता: सिवा का NEET और CAA विरोध तमिल युवाओं को आकर्षित करेगा।
- विपक्षी एकता: सिवा की सौम्य छवि और ट्रांसजेंडर बिल जैसे काम विपक्ष को सामाजिक न्याय का चेहरा देंगे।
- 2026 की तैयारी: भले ही जीत न मिले, सिवा की उम्मीदवारी DMK को तमिलनाडु में बीजेपी के 'तमिल चेहरा' दांव का जवाब देगी।
OBC टक्कर: राधाकृष्णन का गौंडर पावर या सिवा का तेवर तड़का?
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 में तमिलनाडु की सियासी जंग! NDA के सीपी राधाकृष्णन (OBC गौंडर) बनाम INDIA ब्लॉक के तिरुचि सिवा (OBC तेवर) की टक्कर। राधाकृष्णन का RSS-AIADMK कनेक्शन और 293 सांसदों का समर्थन उन्हें आगे रखता है, जबकि सिवा की द्रविड़ अस्मिता और DMK की ताकत 2026 की राह बनाएगी। 788 वोटों में NDA को 310-320 और INDIA को 250-260 वोट मिलने का अनुमान। 9 सितंबर की वोटिंग बताएगी कि तमिलनाडु का सियासी गौरव किसके हिस्से?
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