Vice President: कौन बनेगा विपक्ष का उपराष्ट्रपति उम्मीदवार? कैसे नेता को INDIA ब्लॉक करेगी आगे? मंथन जारी
Next Vice President: विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक अब नए उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार चुनने की कवायद में जुट गया है। इस बार विपक्ष की रणनीति साफ है -चुनाव जीतना भले मुश्किल हो, लेकिन देश को एक मजबूत वैचारिक संदेश देना है। इसके लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश हो रही है जो संविधान, लोकतंत्र, अल्पसंख्यकों, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को दमदार तरीके से पेश कर सके।
इस बार कांग्रेस की योजना है कि एक साझा और सशक्त उम्मीदवार को मैदान में उतारकर न केवल विपक्षी एकता का संदेश दिया जाए, बल्कि एनडीए के सहयोगी दलों को भी असमंजस में डाला जाए। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहला बड़ा मौका है, जब INDIA गठबंधन के नेता फिर से एक मंच पर आ रहे हैं। कांग्रेस इस चुनाव को बीजेपी के खिलाफ एक वैचारिक मोर्चा बनाने की तैयारी में है, जिसके तहत विपक्षी दलों की गोलबंदी शुरू कर दी गई है।

विपक्ष का फोकस: जीत नहीं, विचारधारा
लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के पास संख्याबल कम है, ऐसे में उपराष्ट्रपति का चुनाव जीत पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। लेकिन INDIA गठबंधन इस चुनाव को "वैचारिक लड़ाई" के रूप में देख रहा है। विपक्ष चाहता है कि उसका उम्मीदवार संविधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और सेक्युलरिज्म की नुमाइंदगी करे-ताकि देशभर में एक मजबूत राजनीतिक संदेश भेजा जा सके।
INDIA गठबंधन ढूंढ रहा है ऐसा चेहरा जो सबको जोड़े
INDIA गठबंधन को ऐसा उम्मीदवार चाहिए जो न सिर्फ गठबंधन के भीतर सबको स्वीकार्य हो, बल्कि जो जनता के बीच एक सकारात्मक और सशक्त पहचान रखता हो। इस पर अब गंभीर मंथन शुरू हो गया है। INDIA ब्लॉक की बैठक आज 7 अगस्त को होनी है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इंडी गठबंधन के नेताओं को डिनर पर बुलाया है। इस बैठक में उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर प्रारंभिक चर्चा भी संभव है। इसके अलावा बिहार विधानसभा चुनाव और राज्य में चल रही वोटर लिस्ट की SIR प्रक्रिया पर चर्चा होगी।
इस मीटिंग में राहुल गांधी भी कांग्रेस की रिसर्च रिपोर्ट पेश कर सकते हैं, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि बिहार की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है, जिससे बीजेपी को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद आया मौका
यह उपराष्ट्रपति चुनाव समय से पहले आ गया है, क्योंकि मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बीते महीने इस्तीफा दे दिया था। बताया गया कि उनका सरकार से मतभेद हो गया था, खासकर उस मुद्दे पर जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दो जजों को हटाने की नोटिस स्वीकार की थी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि धनखड़ विपक्ष के खिलाफ पक्षपाती थे और जैसे ही उन्होंने एक स्वतंत्र फैसला लिया, सरकार ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, जो उनके इस्तीफे की वजह बना।
पिछला अनुभव: विपक्ष का मिला-जुला रिकॉर्ड
2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद हुए पहले उपराष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस और विपक्ष ने महात्मा गांधी के पोते और प्रख्यात बुद्धिजीवी गोपालकृष्ण गांधी को उम्मीदवार बनाया था। उनका मुकाबला बीजेपी के एम. वेंकैया नायडू से हुआ था।
हालांकि, 2022 में जब विपक्षी दलों में आपसी मतभेद और दरारें सामने आईं, तब उपयुक्त उम्मीदवारों की कमी के चलते कांग्रेस को मजबूरी में अपनी ही पार्टी की वरिष्ठ नेता मार्गरेट अल्वा को बीजेपी उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के खिलाफ मैदान में उतारना पड़ा।
इस बार भी विपक्षी एकता एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि कई सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ राज्यों में चुनाव लड़ते हैं और विचारधारा में भी टकराव है। ऐसे में सर्वसम्मति से उम्मीदवार तय करना आसान नहीं होगा। अभी तक विपक्ष की ओर से किसी भी नेता का नाम सामने नहीं आ रहा है।
कांग्रेस की रणनीति साफ है - भले ही संख्या के लिहाज से एनडीए उम्मीदवार की जीत को रोका न जा सके, लेकिन उसे एकतरफा जीत से जरूर रोका जा सकता है, जैसा कि धनखड़ की जीत में देखने को मिला था। विपक्ष मानता है कि अगर एक प्रभावशाली चेहरा सामने लाया जाए, तो उपराष्ट्रपति चुनाव को न सिर्फ रोचक बनाया जा सकता है, बल्कि राजनीतिक रूप से असरदार संदेश भी दिया जा सकता है।
इस चुनाव के जरिए INDIA गठबंधन अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करना चाहता है -ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सत्ता पक्ष के खिलाफ विपक्ष अभी भी एक ताकतवर मोर्चा बनाने की स्थिति में है।
विपक्ष इस चुनाव को विचारों की लड़ाई बना रहा है, भले ही उसे मालूम हो कि जीत की संभावना कम है। पर ऐसा चेहरा उतारने की कोशिश है जो जनता को साफ संदेश दे सके -कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष पूरी ताकत से मैदान में है।












Click it and Unblock the Notifications