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69th Nehru Trophy Boat Race: 69वीं नेहरू बोट रेस ट्रॉफी पर चुंदन वल्लम का कब्जा, जानिए कौन किस स्थान पर रहा

69वीं नेहरू बोट रेस में वीयापुरम चुंदन वल्लम (स्नेक बोट) विजेता रही। प्रतियोगिता में कुल 72 नावें शामिल हुईं, जिनमें 19 चुंदन वल्लम नावें थीं।

Nehru Trophy Boat Race: केरल के अलाप्पुझा जिले के पुन्नमदा झील में आयोजित नेहरू बोट रेस का अपना सुनहरा इतिहास है। इसको लेकर खासा उत्साह रहता है। हर वर्ष इसे अगस्त दूसरे शनिवार को आयोजित किया जाता है। शनिवार को अलाप्पुझा के पास पुन्नमदा झील में आयोजित 69वीं नेहरू ट्रॉफी बोट रेस में 72नावों ने हिस्सा लिया। उद्घाटन समाहरोह दिन में दोपहर 2:00 बजे शुरू हुआ। इस मौके पर कई सांस्कृति कार्यक्रम आयोजित किए। देर शाम बोट रेस के परिणाम घोषित किए।

रेस में 72 नावों ने लिया हिस्सा
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस में इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों की कुल 72 नावें शामिल हुईं। उनमें से स्नेकबोट के रूप में भी जानी जाने वाली 19 चंदन वल्लम नावें थी। ये लंबी और चिकनी नावें होती हैं, जो अपनी प्रभावशाली रोइंग टीमों के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं। अलाप्पुझा और पुन्नमदा झील में रोमांचक नेहरू ट्रॉफी नौका रेस (Nehru Trophy Boat Race) की भव्य रूप में तैयारियां की गईं थीं। आमतौर पर इस बोट रेस को देखने लगभग दो लाख लोग पहुंचते हैं, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं।

Nehru Boat Race Trophy 2023

बोट रेस का का मुख्य आकर्षण सर्प नौकाओं की प्रतियोगिता होती है। इन्हें चुन्दनवल्लम कहा जाता है। इन नावों की लंबाई 100 फीट से अधिक होती है, जिसमें एक उठा हुआ माथा होता है। पूर्व में आजादी के पहले ब्रिटिश शासकों द्वारा इन नावों को स्नेन बोट कहा जाता था। ये नाम नॉर्वे में की एक देशी नाव पर आधारित था। हालांकि केरल की ये नाव अन्य नावों काफी अलग है।

किसे मिला कौन सा स्थान?
69वीं नेहरू ट्रॉफी बोट रेस में पल्लाथुरुथी क्लब के वीयापुरम चुंदन वल्लम (स्नेक बोट) विजेता रही। जबकि चंबाकुलम (कुमारकम) को दूसरा, नादुबगम (यूबीसी) तीसरा स्थान और चौथे स्थान पर महादेविकाडु कत्तिल थेक्कथिल (केरल पुलिस) रही।

नेहरू ट्रॉफी बोट रेस का इतिहास
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस का इतिहास भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू की अलाप्पुझा यात्रा से जुड़ा है । पूर्व पीएम ने कोट्टायम से अलाप्पुझा की यात्रा की थी। यात्रा में उनके साथ नौकाओं का एक विशाल समूह था। पहली बोट रेस दिसंबर 1952 में पहली बार पूर्व पीएम के सम्मान में आयोजित की गई थी। दिल्ली वापस लौटने के बाद इस रेस के विजोता को पंडित जी ने एक रजत ट्राफी दी। ये ट्रॉफी लकड़ी के एबेकस पर रखी एक स्नेक बोट के आकर की है। इस ट्रॉफी पर पूर्व पीएम पंडित जी के हस्ताक्षर भी हैं।

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