Vanadium मेटल क्यों महत्वपूर्ण है? गुजरात के तट पर मिला है इसका दुर्लभ खजाना
कश्मीर में कुछ महीने पहले लिथियम मिला था तो देश में यह उम्मीद पैदा हो गई कि लिथियम बैटरी बनाने और अन्य औद्योगिक इस्तेमाल के लिए देश में ही बहुत बड़ा कच्चा माल उपलब्ध हो गया है। अब गुजरात के तट से दुर्लभ वैनेडियम मेटल मिला है।
वैनेडियम कई औद्योगिक उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल के काम आता है। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह गुजरात में खंभात की खाड़ी में तलछट या गाद के सैंपल में पाया गया है। यह क्षेत्र गुजरात के अलंग में अरब सागर का मुहाना है।

वैनेडियम का शुद्ध रूप में मिलना बहुत दुर्लभ
वैनेडियम का मिलना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसा भारत के लिए पहली बार हुआ है। प्राकृतिक तौर पर इसका शुद्ध रूप मिलना बहुत ही दुर्लभ है। क्योंकि, यह 55 अलग-अलग मिनरलों में मौजूद होता है, जिसकी वजह से इसका उत्पादन बहुत ही महंगा हो जाता है।
लिथियन की खोज के बाद दूसरी बड़ी सफलता
इसकी अहमियत ये है कि यह वॉर मिनरल इस्पात को मजबूत बनाने और बैटरी बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। भारत के लिए यह खोज ऐसे समय में काफी महत्वपूर्ण हो गया है, जब कुछ ही महीने पहले कश्मीर में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने लिथियम का 59 लाख टन का खजाना खोजा था।
'अपतटीय तलछट में वैनेडियम के होने की यह पहली रिपोर्ट '
मैंगलोर स्थित जीएसआई के मैरीन एंड कोस्टल सर्वे डिविजन (MCSD) के एक शोधकर्ता बी गोपाकुमार ने 'नेचर' मैगजीन में प्रकाशित एक लेख में कहा है, 'भारत में अपतटीय तलछट में वैनेडियम के होने की यह पहली रिपोर्ट है।'
नर्मदा और तापी नदियों से बहकर पहुंचने की संभावना
खंभात की खाड़ी से वैनेडियम टाइटैनोमैग्नेटाइट नाम के मिनरल में मिला है, जो तब बनता है, जब पिघला हुआ लावा बहुत ही तेजी से ठंडा हो जाता है। खंभात की खाड़ी से वैज्ञानिको ने गाद से इसके 69 सैंपल जुटाए हैं। जीएसआई वैज्ञानिकों ने कहा है खंभात की खाड़ी में जमा वैनाडिफेरस टाइटैनोमैग्नेटाइट संभवत: नर्मदा और तापी नदियों के माध्यम से डेक्कन बेसाल्ट से निकलकर पहुंचा है।
सामरिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण खोज
डिफेंस और एयरोस्पेस जैसे सामरिक तौर पर अहम सेक्टर के लिए वैनेडियम एक बहुत ही महत्वपूर्ण कच्चे माल का काम करता है। उदाहरण के लिए वैनेडियम जेट इंजन के पार्ट्स और हाई-स्पीड एयरफ्रेम्स के लिए टाइटेनियम और एल्यूमीनियम के मिश्र धातु के रूप में काम आता है।
ऊर्जा भंडारण के लिए बड़ी उपलब्धि
इसके अलावा यह मेटल ऊर्जा भंडारण और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में भी काम आता है। इसके अलावा ये ऐसे मिश्र धातु के निर्माण में काम आते हैं, जो क्षय, घिसाव और उच्च तापमान के प्रति प्रतिरोधी होते हैं। यह वैनेडियम रिडॉक्स फ्लो बैटरियों के बनाने में भी इस्तेमाल होता है, जो बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण के काम आते हैं।
वैनेडियम की खोज सबसे पहले 1801 में हुई थी। दिखने में यह चांदी की तरह होता है और 20 डिग्री तापमान पर यह ठोस स्परूप में होता है। इसका सबसे अधिक इस्तेमाल स्टील ऐडिटिव के तौर पर होता है।












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