• search

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खुद को गाय का कानूनी अभिभावक घोषित किया, गोहत्या पर लगाई पाबंदी

Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    नई दिल्ली। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खुद को गाय और तमाम आवारा पशुओं का कानूनी अभिभावक घोषित किया है, जिसके बाद कोर्ट अब इस बाबत जरूरी निर्देश दे सकता है। साथ ही कोर्ट ने प्रदेश में गो हत्या पर पूरी तरह से रोक लगा दिया है। सोमवार को कोर्ट ने इस बाबत कहा कि वह अब गायों की कानूनी अभिभावक है, जिसके बाद इस मसले पर 31 जरूरी निर्देश जारी किए गए। जिसमे सबसे अहम यह है कि हर 25 गांव के बीच गाय के लिए शेल्टर होम खोला जाएगा। साथ ही उन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा जो मवेशियों को आवारा छोड़ देते हैं।

    गो हत्या कानूनी अपराध

    गो हत्या कानूनी अपराध

    कोर्ट ने प्रदेश में गो हत्या और गोमांस की बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। इसके अलावा कोर्ट ने गाय, बछड़ा और बैलों के वध के लिए उनके परिवहन और बिबक्री पर पाबंदी लगा दी है। जिसके बाद प्रदेश में गो हत्या और गोमांस की बिक्री कानूनी अपराध है। इस मसले पर कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसे रुड़की के गांव के कुछ लोगों ने दायर किया था, जिसमे कहा गया था कि वर्ष 2014-15 में पशुओं के वध और उनके मांग को बेचने की अनुमति ली गई थी, लेकिन उसके बाद आजतक इसका नवीनीकरण नहीं किया गया है।

    गाय का खून बहाया जाता है नदी में

    गाय का खून बहाया जाता है नदी में

    याचिका में कहा गया है कि अब कुछ लोग गाय का भी वध कर रहे हैं और इसका खून गंगा में बहा रहे हैं, यह ना केवल कानून के खिलाफ है बल्कि इस कृत्य से पूरे गांव के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो सकता है। जिसपर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत आदेश दिया कि जो लोग भी ऐसा करते पाए जाए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।

    इसे भी पढ़ें- मैनपुरी: छेड़छाड़ का वीडियो वायरल करने धमकी देते थे आरोपी, युवती ने की आत्महत्या

    जारी किए अहम निर्देश

    जारी किए अहम निर्देश

    कोर्ट ने गोवंश संरक्षण अधिनियम 2007 की धारा सात के तहत सड़क, गली और सार्वजनिक जगह पर वाले पशुओं के मालिकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्रज कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि तमाम मुख्य अभियंता, अधिशासी अभियंता और ग्राम प्रधान इस बात को सुनिश्चित करें कि सड़क गाय, बैल आदि कोई भी आवारा पशू ना घूमे । इसके अलावा कोर्ट ने पशु अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी आवारा पशुओं के इलाज की जिम्मेदारी उठाएं।

    इसे भी पढ़ें- 15 अगस्त को पीएम मोदी के इस ऐलान से पहले, शर्मिंदा ना कर दे यह फर्जीवाड़ा

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Uttarakhand high court declares itself legal guardian of cows. It issued 31 directions to the state.

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more