डीएम ने सरकारी अस्पताल में कराई पत्नी की डिलीवरी, पीछे है बड़ा कारण

अक्सर लोग अपने इलाज के लिए सरकारी की बजाय प्राइवेट अस्पताल में जाना पसंद करते हैं। ऐसे में कौशाम्बी के डीएम का अपनी पत्नी की डिलीवरी सरकारी अस्पताल में कराना सराहनीय है।

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नई दिल्ली। अक्सर लोग अपने इलाज के लिए सरकारी की बजाय प्राइवेट अस्पताल में जाना पसंद करते हैं। ऐसे में कौशाम्बी के डीएम का अपनी पत्नी की डिलीवरी सरकारी अस्पताल में कराना सराहनीय है। उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के डीएम मनीष कुमार वर्मा ने अपनी पत्नी की डिलीवरी सरकारी अस्पताल में कराई, ताकि लोग सरकारी अस्पतालों का इस्तेमाल करें। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए ऐसा किया।

पत्नी की सरकारी अस्पताल में कराई डिलीवरी

पत्नी की सरकारी अस्पताल में कराई डिलीवरी

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के डीएम ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए अपनी पत्नी की डिलीवरी सरकारी अस्पताल में कराकर मिसाल पेश की है। डीएम मनीष कुमार ने पत्नी अंकिता राज को शनिवार को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था, जहां उन्होंने एक स्वस्थ्य बेटी को जन्म दिया। डीएम ने कहा कि सरकारी अस्पताल में सभी सुविधाएं होने के बावजूद लोग प्राइवेट अस्पताल की तरफ भागते हैं।

'लोगों को जागरुक करने के लिए किया ऐसा'

'लोगों को जागरुक करने के लिए किया ऐसा'

सरकारी अस्पताल में बच्ची के जन्म के लिए मां अंकिता को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत पांच हजार रुपये मिले। डीएम ने कहा कि उन्होंने ऐसा पैसों के लिए नहीं, बल्कि लोगों को इस योजना के प्रति जागरुक करने के लिए किया है। पत्नी की डिलीवरी के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए डीएम मनीष वर्मा ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सारी सुविधाएं उपलब्ध है, इसलिए प्रसव यहीं पर कराना सही है । सरकारी अस्पताल आने का मकसद यह भी था कि लोग प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के प्रति जागरूक हो और सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में ही डिलीवरी कराएं।

योजना के तहत मिलते हैं पांच हजार रुपये

योजना के तहत मिलते हैं पांच हजार रुपये

इससे लोगों के बीच अच्छा संदेश जाएगा और सरकारी सुविधा व व्यवस्था की जानकारी उन तक पहुंचेगी और दूसरे लोग भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे । डीएम ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पांच हजार रुपए मिलते हैं। इसके लिए आशा से पंजीयन कराना होता है। पंजीयन के बाद एक हजार, आठवें माह में 2000 व बच्चा होने के 48 घंटे के बाद ₹2000 मिलते है। इससे मां बच्चे के पोषण में आर्थिक मदद हो जाती है। लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए।

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