USA Doctor ने जीता दिल, भारत में दान की जिंदगीभर की करोड़ों की कमाई, बच्चों का अस्पताल बनेगा
अमेरिका की महिला डॉक्टर ने भारत में बच्चों का अस्पताल बनाने के लिए जीवन भर की कमाई दान करने का फैसला लिया है। USA doctor dr uma Gavini donates 20 crore for child hospital in guntur andhra pradesh
USA Doctor Dr Uma Gavini एक ऐसी भारतवंशी हैं जो अमेरिका में रहती तो हैं, लेकिन जड़ें आज भी भारतीय हैं। आंध्र प्रदेश में पढ़ाई के बाद अमेरिका शिफ्ट हुईं डॉ उमा अब बच्चों का अस्पताल बनवाना चाहती हैं। उन्होंने बच्चों के हॉस्पिटल के लिए जीवनभर में बचाए गए 20 करोड़ रुपये दान करने का फैसला लिया है। डॉ उमा देवी गाविनी अपने गृह प्रदेश में अस्पताल बनवाना चाहती हैं। प्रदेश की हेल्थ मिनिस्टर वी रजनी ने जब अस्पताल के लिए भूमि पूजन किया तो सबके बीच डॉ उमा गाविनी की चर्चा हो रही थी। डॉ उमा ने इस अस्पताल के लिए अपनी जिंदगी भर की कमाई दान कर दी।

जिंदगीभर पैसे बचाए, अब अस्पताल को डोनेट
अमेरिका में रोग प्रतिरोधक क्षमता और एलर्जी से जुड़ी परेशानी होने पर लोग डॉ उमा देवी गाविनी से परामर्श लेते हैं। 58 साल पहले आंध्र प्रदेश से MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ उमा देवी गाविनी अमेरिका शिफ्ट हो गईं। शुक्रवार को गुंटूर सरकारी सामान्य अस्पताल (जीजीएच) के परिसर में मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) के निर्माण के लिए भूमि पूजा हुई। इस अस्पताल के लिए डॉ उमा ने 20 करोड़ की राशि दान की। बात करोड़ों के डोनेशन से बढ़कर ये है कि डॉ उमा ने पूरी जिंदगी में जितने पैसे बचाए, सब बच्चों के हॉस्पिटल के लिए डोनेट कर दिए।

58 साल पहले भारत में बनीं डॉक्टर
दरअसल, गुंटूर में अमेरिकी महिला डॉक्टर की मदद से बन रहा अस्पताल सुर्खियों में है। डॉ उमा देवी गाविनी ने अस्पताल बनवाने का सपना साकार करने के लिए अपनी सारी जिंदगी की बचत दान कर दी है। गुंटूर की रहने वाली डॉ उमा ने साल 1965 में गुंटूर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी।

जब डॉ उमा अमेरिका चली गईं
भारत में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद डॉ उमा अमेरिका चली गईं। वर्तमान में वे एक प्रतिरक्षाविज्ञानी और एलर्जी विशेषज्ञ (Immunologist and allergy specialist) के रूप में काम कर रही हैं। डॉ उमा गुंटूर मेडिकल कॉलेज एलुमनी एसोसिएशन, उत्तरी अमेरिका (GMCANA) की सक्रिय सदस्य रही हैं। उन्होंने 2008 में GMCANA अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था।

20 करोड़ रुपये दान कर दिए
डॉ उमा के पति डॉ कनुरी रामचंद्र भी एक डॉक्टर थे। तीन साल पहले डॉ कनुरी का निधन हो गया था। दोनों की कोई संतान नहीं है। डॉ उमा ने गत सितंबर में अमेरिकी शहर डलास में आयोजित GMCANA के 17वें reunion में गुंटूर में अस्पताल निर्माण के लिए अपनी 20 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति दान करने का ऐलान किया। इस राशि में डॉ उमा की बचत के अलावा उनकी पूंजी भी शामिल है।

विनम्रता से भरी हैं डॉक्टर उमा
GMCANA के मुख्य समन्वयक डॉ बाला भास्कर ने कहा, डॉ उमा देवी उन सबसे विनम्र लोगों में एक हैं जिनसे कभी मिला हूं। वह स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में एसोसिएशन के काम में हमेशा शामिल होती हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के जिस अस्पताल के लिए डॉ उमा ने 20 करोड़ दान किए हैं, इसका निर्माण गुंटूर गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल (GGH) परिसर में 86.80 करोड़ की अनुमानित लागत से 2.69 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में होगा।

हॉस्पिटल में क्या-क्या होगा ?
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल में पांच मंजिला होगा। 597 बिस्तर वाले इस हॉस्पिटल में प्रसूति वार्ड में 300 बेड होंगे। चाइल्ड केयर यूनिट में 200 बेड, पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में 27, एसआईसीयू में 30 बेड और नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में 40 बेड होंगे। अस्पताल की बिल्डिंग में 30 क्लासरूम और 300 लोगों की क्षमता वाला असेंबली हॉल भी बनाया जाएगा।

8 साल पहले शुरुआत, पकि के नाम पर होगा अस्पताल
GMCANA के सदस्यों ने डॉ उमा के बहुमूल्य योगदान को सम्मानित करने के अस्पताल का नाम उनके नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया। डॉ बाला ने बताया अस्पताल का नाम डॉ उमा के दिवंगत पति Dr Kanuri Ramachandra के नाम पर रखने का फैसला लिया गया। बिस्तरों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण जीजीएच में गर्भवती महिलाओं को हो रही परेशानी दूर करने के लिए GMCANA की परियोजना आठ साल पहले यानी 2014 में शुरू हुई थी।

लोगों से मिला समर्थन, खुद पैसे दे रही GMCANA
गुंटूर में चाइल्ड हॉस्पिटल की लागत को देखते हुए 2018 में, यह निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार 35 करोड़ रुपये का योगदान देगी। GMCANA निर्माण में 30 करोड़ रुपये का अंशदान देगी। अलग-अलग कारणों से अटके काम को गति देने के लिए GMCANA के सदस्यों ने तय किया कि इस परियोजना के पूरे पैसे वे खुद देंगे। इसके बाद जून 2022 में राज्य सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन हुआ। डॉ बाला ने बताया कि डॉ उमा के निस्वार्थ कार्य ने कई डॉक्टरों और लोगों को प्रेरित किया क्योंकि उनके निर्णय की घोषणा के बाद से लोगों ने बड़ी संख्या में दान दिया।












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