अमेरिकी चुनौती से पार पाते नरेंद्र मोदी

US tilting towards Modi: Change is the only continuity
बैंगलोर। कभी गुजरात में हुए नरसंहार का आरोपी मानते हुए अमेरिका ने नरेंद्र मोदी को वीजा देने से मना कर दिया था लेकिन अब उसके रूख में नरमी आती हुई दिखाई दे रही है। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि मोदी के लिए अमेरिकी वीजा नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा। 'मोदी को वीजा' चर्चा का विषय तब और बन गया जब अमेरिकी राजनयिक नैंसी पॉवेल ने मोदी से मुलाकात करने की इच्‍छा व्‍यक्‍त की। इसका कारण मोदी का बढ़ता हुआ कद ही माना जा रहा है, जिसे नजरअंदाज करना अब किसी के लिए भी संभव नहीं रह गया है। वहीं यूपीए के दूसरे कार्यकाल और मजबूत विपक्षी नेता की गैर मौजूदगी ने भी मोदी को उभरने का मौका दिया है। जिससे मोदी के पक्ष में हवा बहने की बातें की जा रही हैं। मोदी ने यूपीए सरकार की असफलता को आधार बनाकर खुद के लिए एक ऐसा कद गढ़ा जिसने गुजरात दंगों में उन पर लगे कथित आरोपों को भी छोटा साबित कर दिया है।

अमेरिका के पहले आस्‍ट्रेलिया और ब्रिटेन ने उन्‍हें वीजा जारी कर दिया है और अपने यहां आने का निमंत्रण दिया। मोदी ने पिछले दस वर्षों में गुजरात में निवेश को जितना बढ़ावा दिया है, उससे इन देशों का उनकी तरफ आकर्षित होना स्‍वाभाविक भी है। भारत की कमजोर होती अर्थव्‍यवस्‍था ने भी मोदी को एक मजबूत विकल्‍प के रूप में प्रस्‍तुत किया है, अमेरिका पहले से ही भारत का प्रमुख व्‍यापारिक सहयोगी रहा है, इसके अलावा प्राइवेट सेक्‍टर के प्रति झुकाव ने भी विश्‍व की एकमात्र 'सुपर पॉवर' को अपनी नीतियों में नरम रूख लाने के लिए मजबूर किया है।

सर्वे परिणाम

लोकसभा चुनाव 2014 के लिए किये जा रहे सर्वे भी भाजपा के पक्ष में आते दिखाए जा रहे हैं। जिसने अमेरिका को सोंचने पर मजबूर कर दिया है कि दिल्‍ली से बेहतर संबंध बनाने के लिए यह एक बेहतर मौका है। अगर आरोपों की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई स्‍तरों पर की गई जांच में मोदी पाक साफ पाये गये हैं। अत: अब उन पर प्रतिबंध लगाये जाने की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है।

अमेरिकी नीतियों में बदलाव

अमेरिका में इस समय डेमोक्रेट पार्टी सत्‍ता में है। जब मोदी का वीजा 2005 में रद्द किया गया था, जब वहां रिपब्लिकन पार्टी सत्‍ता में थी। अत: सरकार बदलने के बाद मोदी के साथ अमेरिका के संबंध आर्थिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी होंगे।

अमेरिका द्वारा 'आप' को बचाने की कोशिशें नाकाम

विश्‍लेषकों के मुताबिक अमेरिका की मोदी को रोंकने के लिए 'आम आदमी पार्टी को दिये गये समर्थन की कोशिशें नाकाम हो गयी हैं। वॉशिंगटन नहीं चाहता था कि मोदी को वीजा देकर वह अपनी छवि खराब करे लेकिन मोदी ने इसे अपने लिए एक मुद्दा बनने ही नहीं दिया, जिसका लाभ अप्रत्‍यक्ष रूप से भाजपा को मिला। इसके अलावा 'आप' की एफडीआई के खिलाफ बनाई गई नीतियों और प्राइवेट बिजली कंपनियों के ऑडिट मुद्दे ने भी आर्थिक नीतियों के प्रति 'आप' सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है। अत: अब मोदी को समर्थन देने के अलावा अमेरिका के पास कोई चारा नहीं है।

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