अमेरिकी कंपनी को कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में बड़ी सफलता, बुजुर्गों पर भी बराबर असर

नई दिल्ली। अमेरिकी दवा निर्माता कंपनी मॉडर्ना ने दावा किया है कि उसकी कंपनी की कोरोना वैक्सीन ट्रायल में बुजुर्ग लोगों पर भी युवाओं के बराबर ही असरदार पाई गई है। मॉडर्ना कोरोना को लेकर वैक्सीन बनाने में जुटी अग्रणी कंपनियों में है। कंपनी ने दावा किया कि सीमित संख्या में किए गए टेस्ट में बुजुर्ग मरीजों के ऊपर इसका अच्छा रिस्पांस देखा गया। ताजा उन 20 लोगों पर किए गए प्रारंभिक टेस्ट से मिले हैं जिनकी उम्र 56 वर्ष या इससे अधिक है।

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    नहीं देखा गया कोई प्रतिकूल प्रभाव

    नहीं देखा गया कोई प्रतिकूल प्रभाव

    वैक्सीन युवाओं के साथ अधिक उम्र के लोगों पर भी समान रूप से असरदार देखी गई है जो कि एक राहत की बात है। बता दें कि अधिक उम्र के लोग कोरोना का आसानी से शिकार बन रहे हैं और बीमारी से उनकी मृत्यु दर भी ज्यादा है।

    कंपनी के मुताबिक वैक्सीन के परीक्षण बेहद ठीक रहा। इस दौरान मरीजों पर इसका कोई विशेष प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया। कुछ मरीजों को थकान, हेडेक और दर्द महसूस हुआ जो दो दिन में दूर हो गया। हालांकि ये सामान्य साइड-इफेक्ट हैं जो ट्रायल के दौरान होते ही हैं।

    भारत में फेज-2 का ट्रायल शुरू

    भारत में फेज-2 का ट्रायल शुरू

    वहीं ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई गई नोवल कोरोनावायरस वैक्सीन के दूसरे फेज का ट्रायल भारत में शुरू हो गया है। बुधवार को पुणे के भारती विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज में छह वालंटियर को इसकी पहली डोज दी गई। एस्ट्राजेंका के सहयोग से बनाई जा रही इस वैक्सीन को अब तक की सबसे सफल वैक्सीन होने की उम्मीद की जा रही है। कई देशों में इस वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल हो रहा है।

    बता दें कि भारत सरकार ने किसी भी कंपनी को देश में टेस्टिंग करने के लिए एक शर्त रखी है जिसके तहत टेंस्टिंग के बाद सफल होने पर वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल के लिए पहले बनाना होगा। पुणे स्थित भारत की अग्रणी दवा निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बताया कि फेज 2 का ट्रायल शुरू कर दिया है। सीरम इंस्टीट्यूट ने एस्ट्राजेंका के साथ इस दवा का निर्माण कर भारत और दूसरे देशों में सप्लाई करने के लिए करार किया है।

    1600 लोग लेंगे ट्रायल में हिस्सा

    1600 लोग लेंगे ट्रायल में हिस्सा

    कंपनी ने बताया कि फेस 2 और फेस 3 के ट्रायल भारत में किए जाएंगे। वहीं फेस 1 का ट्रायल पहले ही सफल हो चुका है और उसे फिर से भारत में करने की जरूरत नहीं है। फेस 2 ट्रायल दो और जगहों पर पूरे किए जाएंगे। इनमें केईएम अस्पताल मुंबई और पीजीआई चंडीगढ़ शामिल है। फेस-3 के ट्रायल में कई अन्य अस्पताल भी शामिल होंगे।

    तीसरे चरण में हजारों लोगों पर टीके का ट्रायल किया जाता है। चूंकि ये परीक्षण भारत में ही दोहराया जा रहा है ऐसे में अनुमान है कि दूसरे और तीसरे चरण में लगभग 1600 लोगों को वालंटियर के तौर पर इसमें हिस्सा लेंगे जिन पर वैक्सीन का ट्रायल किया जाएगा।

    आपातकालीन उपयोग की अनुमति का विरोध

    आपातकालीन उपयोग की अनुमति का विरोध

    वैक्सीन के लिए कई जगह पर आपातकालीन उपयोग की मांग भी उठ रही है जिसका अमेरिका के प्रमुख वैज्ञानिक और कोरोना मामले में सरकार की तरफ से निगरानी कर रहे डॉक्टर एंथोनी फाउची ने विरोध किया है। फाउची ने कहा कि बिना सभी जरूरी टेस्ट को किए जल्दबाजी में किसी भी वैक्सीन के प्रयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

    फाउची का बयान उस समय आया है जब ये चर्चा चल रही थी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 3 नवंबर को अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले एक वैक्सीन के आपातकाली उपयोग को अनुमति दे सकते हैं। ट्रंप इस बार दोबारा राष्ट्रपति के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि पहले वैक्सीन जारी करने से उन्हें चुनाव में फायदा हो सकता है। फाउची ने कहा कि 'मेरे लिए सबसे जरूरी है, एक ऐसा टीक जो प्रभावी और सुरक्षित दोनों हो। हम उम्मीद करते हैं कि इसके साथ कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।'

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