US Election 2024: तमिलनाडु के थुलसेंद्रपुरम में चुनाव परिणाम का इंतजार, गांव को कमला हैरिस की जीत की उम्मीद
US Election 2024: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव परिणामों के करीब पहुंचने के साथ ही तमिलनाडु के थुलसेंद्रपुरम गांव में एक शांत उत्सुकता का माहौल है। यह वही गांव है जिसका ऐतिहासिक संबंध कमला हैरिस से है। जिनके नाना पीवी गोपालन यहां कुछ समय तक रहे थे। राजनयिक गोपालन के इस गांव से जुड़ाव के कारण ही कमला हैरिस का नाता के इस छोटे से गांव से जुड़ा हुआ है। हालांकि हैरिस अपनी भारतीय जड़ों से भले ही दूर पली-बढ़ी हैं। लेकिन उन्होंने अपनी इस विरासत को कभी भुलाया नहीं।
कमला हैरिस अक्सर अपनी मां श्यामला गोपालन और अपने भारतीय परिवार का उल्लेख करती रही हैं। वे इस बात का श्रेय देती हैं कि उन्होंने उनमें संघर्ष और साहस का भाव भरा। हैरिस के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किए जाने पर 2020 में इस गांव में उत्सव का माहौल था। जो कि आज के शांत और चिंतनशील वातावरण से काफी अलग था।

पारिवारिक विरासत और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान
हैरिस अपनी भारतीय विरासत के प्रति हमेशा से जागरूक रही हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा था कि मेरी मां डॉ. श्यामला गोपालन हैरिस 19 साल की उम्र में भारत से अमेरिका आई थी। उन्होंने मुझे और मेरी बहन माया को साहस और दृढ़ता के बारे में सिखाया। उनके विचारों में भारतीय विरासत और अपने माता-पिता के अधिकारों की लड़ाई का असर साफ दिखाई देता है। जो उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को भी आकार देता है।
हैरिस की चाची डॉ. सरला और उनके परिवार ने इस बात का जिक्र किया है कि कैसे कमला भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रही हैं। हालांकि इस जुड़ाव का स्वरूप सीमित था। लेकिन भारत से परिवार का संबंध आज भी उनकी यादों और भारत में रिश्तों के माध्यम से जीवित है।
गांव में प्रत्याशा और पुरानी यादें
चुनावी परिणामों से पहले थुलसेंद्रपुरम के निवासियों में उम्मीद और गर्व का मिश्रित भाव है। सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर एन कृष्णमूर्ति ने बताया कि उन्हें हैरिस और गांव के बीच संबंध के बारे में तब पता चला जब वे 2020 में उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनी। गांव के लोगों ने उसी समय डॉ. सरला के दान की याद दिलाई। जिसके माध्यम से एक मंदिर के पत्थर पर हैरिस का नाम अंकित किया गया। जो गांव के गर्व और रिश्ते का प्रतीक है।
थुलसेंद्रपुरम के लोग कमला हैरिस की संभावित जीत का स्वागत करेंगे। लेकिन वे इसे एक यथार्थवादी दृष्टिकोण के साथ देख रहे हैं। यह गांव जो कभी एक बड़े ब्राह्मण समुदाय का केंद्र था। अब एक छोटी आबादी का गवाह है। जो अमेरिका की इस ऐतिहासिक घटना से जुड़ने की उम्मीद रखता है। कुछ निवासी दिवाली की बची हुई आतिशबाजी के साथ जश्न मनाने पर विचार कर रहे हैं। जो इस उपलब्धि के प्रति उनके जुड़ाव को दिखाता है।
प्रवासी और विरासत का संगम
थुलसेंद्रपुरम के लोग चुनाव परिणामों के इंतजार में हैं और इस छोटे से गांव का यह शांत उत्सव एक प्रवासी परिवार की कहानी और उसकी पहचान को दर्शाता है। कमला हैरिस की कहानी में सक्रियता, लचीलापन और विविध पहचान की प्रतिध्वनि है। यह केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बल्कि यह पारिवारिक परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर की एक व्यापक कहानी है। चाहे परिणाम कुछ भी हो। थुलसेंद्रपुरम में कमला हैरिस से जुड़ा यह गर्व उनके गांव और उनकी विरासत को एक खास और अनोखा स्थान देता है। जो स्थानीय परंपरा और वैश्विक महत्व का प्रतीक है।












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