मायावती को किससे है अनहोनी की आशंका? बसपा दफ्तर के लिए योगी सरकार से मांगी सुरक्षित जगह

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने सोमवार को यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार से लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का अनुरोध किया है।

बसपा सुप्रीमो ने अपने दावे में कहा है कि बीएसपी ऑफिस अब सुरक्षित नहीं रह गया है और वहां कभी भी कोई अनहोनी की घटना हो सकती है। बीएसपी चीफ का यहां तक कहना है कि असुरक्षा की भावना के चलते ही उन्हें पार्टी की ज्यादातर बैठकें अपने आवास में ही करनी पड़ती हैं।

bsp chief mayawati

योगी सरकार से बसपा दफ्तर शिफ्ट करने का अनुरोध
इस मामले को लेकर मायावती ने एक के बाद एक एक्स (पहले ट्विटर) पर 5 पोस्ट डाले हैं, जिसमें उन्होंने अपनी असुरक्षा की भावना के कारण भी बताए हैं।

असुरक्षा की वजह से मजबूरन आवास में ही बैठकें करती हैं मायावती
एक पोस्ट में बसपा सुप्रीमो ने लिखा है, 'इस असुरक्षा को देखते हुए सुरक्षा को लेकर मिले सुझाव के आधार पर पार्टी प्रमुख को अब पार्टी की ज्यादातर बैठकें अपने निवास पर ही करने को मजबूर होना पड़ रहा है। क्योंकि, पार्टी कार्यालय में होने वाली बड़ी बैठकों में पार्टी प्रमुख के पहुंचने पर वहां पुल पर सुरक्षाकर्मियों की अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ती है।'

कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है- मायावती
अगली पोस्ट में उन्होंने अनहोनी की आशंका जाहिर करते हुए लिखा है कि सरकार दलित-विरोधियों से कड़ाई से निपटे। उन्होंने लिखा है, 'ऐसे हालात में बीएसपी यूपी सरकार से मौजूदा पार्टी प्रदेश कार्यालय के स्थान पर किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर व्यवस्था करने का भी विशेष अनुरोध करती है..... वरना फिर यहां कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है। साथ ही, दलित-विरोधी तत्वों से भी सरकार सख्ती से निपटे, पार्टी यह भी मांग करती है।'

सपा जबर्दस्त दलित-विरोधी पार्टी है- मायावती
अगर मायावती के अन्य तीन पोस्ट को भी देखें तो उन्हें जो अनहोनी की आशंका हो रही है, उसकी वजह को समझा जा सकता है। उन्होंने पहले ही पोस्ट में लिखा है, 'सपा अति-पिछड़ों के साथ-साथ जबरदस्त दलित-विरोधी पार्टी भी है.... हालांकि, बीएसपी ने पिछले लोकसभा आम चुनाव में उससे गठबंधन करके इनके दलित-विरोधी चाल, चरित्र व चेहरे को थोड़ा बदलने का प्रयास किया। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद ही सपा फिर से अपने दलित-विरोधी जातिवादी एजेंडे पर आ गई।'

सपा सरकार में बने ऊंचे पुल को बताया असुरक्षा का कारण
बीएसपी चीफ ने आगे लिखा है, 'अब समाजवादी पार्टी के मुखिया जिससे भी गठबंधन की बात करते हैं, उनकी पहली शर्त बसपा से दूरी बनाए रखने की होती है, जिसे मीडिया भी खूब प्रचारित करता है। वैसे भी सपा के 2 जून,1995 सहित घिनौने कृत्यों को देखते हुए और इनकी सरकार के दौरान जिस प्रकार से अनेकों दलित-विरोधी फैसले लिए गए हैं......'

उस पोस्ट को अगले में पूरा करते हुए लिखा है, '....जिनमें बीएसपी यूपी स्टेट ऑफिस के पास ऊंचा पुल बनाने का कृत्य भी है, जहां से षड़यंत्रकारी अराजक तत्व पार्टी दफ्तर, कर्मचारियों और राष्ट्रीय प्रमुख को भी हानि पहुंचा सकते हैं, जिसकी वजह से पार्टी को महापुरुषों की प्रतिमाओं को वहां से हटाकर पार्टी प्रमुख के निवास पर शिफ्ट करना पड़ा।'

2019 के लोकसभा चुनावों में बसपा और सपा ने दशकों बाद गठबंधन करके यूपी में बीजेपी की जीत के रथ पर ब्रेक लगाने की कोशिश की थी। लेकिन, चुनाव खत्म होते हुए बसपा ने अखिलेश यादव की पार्टी से गठबंधन तोड़ लिया।

2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर मायावती का अबतक यही स्टैंड रहा है कि वह केंद्र में सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक से बराबर दूरी बनाकर चलेगी।

लेकिन, बीच-बीच में बीएसपी से गठबंधन को लेकर कांग्रेस की ओर से खबरें उड़ती रही हैं। लेकिन, जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव ने इंडिया ब्लॉक में बीएसपी को किसी भी सूरत में एंट्री नहीं देने की शर्त लगा रखी है।

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