इस बार बीजेपी के लिए क्‍यों है यूपी खास

LS.BJP
नई दिल्‍ली। उत्‍तर प्रदेश न सिर्फ देश का सबसे बड़ा राज्‍य बल्कि एक ऐसा प्रदेश जहां से देश को एक दो नहीं बल्कि आठ प्रधानमंत्री मिले हैं। ऐसे में इस बात को बताना शायद जरूरी नहीं है कि यह राज्‍य देश की राजनीति में कितनी अहमियत रखता है। ऐसे में सारी पार्टियां उत्‍तर प्रदेश पर खासा ध्‍यान केन्द्रित कर रही हैं। यहां की 80 सीटें किसी भी पार्टी को वजीर से बादशाह बना सकती हैं।

कई तरह के सर्वे और एग्जिट पोल्‍स से साफ है कि बीजेपी के लिए यह चुनाव काफी फायदेमंद साबित होने वाले हैं और ऐसे में पार्टी के लिए उत्‍तर प्रदेश में अपना रिकॉर्ड बेहतर करना हर हाल में काफी जरूरी होगा। फिलहाल उत्‍तर प्रदेश से बीजेपी के पास सिर्फ 10 लोकसभा सीटें हैं और यह कुल वोटों का सिर्फ 17.5 प्रतिशत ही है।

एग्जिट पोल्‍स के नतीजों पर यकीन करें तो उत्‍तर प्रदेश में पार्टी के वोटों में 27 प्रतिशत तक का उछाल आने की उम्‍मीद है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर उत्‍तर प्रदेश में पार्टी के लिए वोटों का गणित जरा भी गड़बड़ाया तो फिर उसके लिए नई दिल्‍ली का रास्‍ता थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

बीजेपी को साल 1996 में हुए लोकसभा चुनावों में कुल 165 वोट हासिल हुए थे और इनमें उत्‍तर प्रदेश की ओर से 52 सीटों का योगदान था। इस साल बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन को देश की कमान मिली और अटल बिहारी वाजपेई सिर्फ 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने।

2009 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को सिर्फ 10 सीटें ही मिली थीं

इसके बाद साल 1998 में फिर लोकसभा चुनाव हुए और इस बीजेपी को कुल 179 सीटें मिलीं और इसमें उत्‍तर प्रदेश की 57 सीटें शामिल थीं। एक बार फिर एनडीए के हाथ में सत्‍ता आई और अटल बिहारी वाजपेई इस बार सिर्फ 13 महीनों के लिए ही प्रधानमंत्री रहे।

साल 1999 में फिर लोकसभा चुनाव हुए और इस बार बीजेपी को सबसे ज्‍यादा 183 सीटें मिलीं और अटल बिहारी के नेतृत्‍व में एनडीए ने देश का कामकाज संभाला। लेकिन यहां यह बात गौर करने वाली है कि 1999 में जब चुनाव हुए तो बीजेपी को उत्‍तर प्रदेश से सिर्फ 29 सीटें ही हासिल हो सकी थीं।

हालांकि 1996, 1998 और 1999 तीनों ही चुनावों के दौरान उत्‍तराखंड उत्‍तर प्रदेश का हिस्‍सा था और उस समय लोकसभा सीटों की संख्‍या 85 थी। ऐसे में अगर ध्‍यान से देखा जाए तो पार्टी का गणित उत्‍तर प्रदेश में 1999 से ही गड़बड़ाना शुरू हो गया था लेकिन बीजेपी को मिलीं 183 सीटों की चमक ने 29 सीटों के आंकड़े पर पार्टी को ज्‍यादा गौर नहीं करने दिया। वर्ष 2004 और 2009 में हुए चुनावों के दौरान पार्टी सिर्फ 10 सीटों के आसपास ही सिमट कर रह गई।

वर्ष 2012 और 2007 में हुए उत्‍तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी को कोई फायदा नहीं हुआ था। जहां साल 2007 में बीजेपी को 404 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 51 सीटें ही हासिल हुई तो वहीं 2012 में पार्टी 47 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। ऐसे में यह लोकसभा चुनाव पार्टी के लिए काफी अहम हैं।

जानकार मानते हैं कि मोदी फैक्‍टर इस बार उत्‍तर प्रदेश में पार्टी के लिए 1996, 1998 और 1999 जैसा करिश्‍मा कर सकता है। पार्टी के लिए नतीजे कैसे रहेंगे यह तो 16 मई को ही पता चलेगा लेकिन वपार्टी ने यूपी के किले को जीतने के लिए दिन-रात एक कर दिए हैं।

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