मनीष गुप्ता हत्याकांड में CBI जांच की सिफारिश, परिजनों को 40 लाख का मुआवजा
लखनऊ, 1 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इस बीच गोरखपुर में हुए मनीष गुप्ता हत्याकांड ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दीं, क्योंकि इस घटना में आरोपी यूपी पुलिस के जवान हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार शाम योगी सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने का फैसला किया। साथ ही इससे संबंधित सिफारिश केंद्र को भेज दी। जैसे ही केंद्र इसे मंजूरी देगी, वैसे ही सीबीआई मामला दर्ज कर जांच शुरू कर देगी। अभी कुछ दिनों पहले महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में भी सीबीआई जांच की सिफारिश हुई थी।

मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मनीष के परिजनों को इंसान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जिस वजह से उन्होंने उनकी मांग मानते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए। इसके बाद राज्य ने इसकी सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी। इसके अलावा मृतक के परिजनों को 40 लाख का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं उनकी पत्नी को कानपुर विकास प्राधिकरण में OSD की नौकरी मिलेगी। मृतक के परिजनों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।
क्या है पूरा मामला?
मनीष कानपुर के युवा व्यवसायी थे। कुछ काम के सिलसिले में वो गोरखपुर गए और वहां पर अपने दोस्तों के साथ होटल में रहे। आरोप है कि पुलिस ने संदिग्ध समझकर उनकी पिटाई की। जिससे मनीष की मौत हो गई। हालांकि इस घटना में पुलिस का बयान अलग है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक होटल के कमरे में जवान मनीष और उसके साथियों से पूछताछ कर रहे थे। मनीष शराब के नशे में थे, जिस वजह से जमीन पर गिर गए। इसके बाद उनको अस्पताल ले जाया गया, जहां पर उनकी मौत हो गई।
अब तक क्या कार्रवाई?
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मनीष के दाहिनी बांह, कलाई, सिर के बीचोंबीच और पलक पर चोट के चार गंभीर निशान पाए गए। उनके सिर के बीच में 5x4 सेंटीमीटर की चोट ही घातक साबित हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए रामगढ़ताल थाने के थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।












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