संपत्ति नुकसान की वसूली के लिए ट्रिब्यूनल के गठन को योगी सरकार की मंजूरी
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदर्शनकारियों से संपत्ति नुकसान की वसूली के लिए दो ट्रिब्यूनल के गठन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को राजधानी लखनऊ और मेरठ में ये दावा अधिकरणों (ट्रिब्यूनल) के गठन को मंजूरी दी है। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुई हिंसा के बाद ये ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। किसी प्रदर्शन में जिन लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, वे इन ट्रिब्यूनल में क्लेम कर सकेंगे। ट्रिब्यूनल वसूली करा कर क्लेम सुनिश्चित कराएगी। उत्तर प्रदेश इस तरह के ट्रिब्यूल गठित करने वाला देश का पहला राज्य है।

लखनऊ ट्रिब्यूनल में झांसी, कानपुर, चित्रकूट धाम, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज, आजमगढ़, वाराणसी, गोरखपुर, बस्ती और विंध्याचल धाम डिविजन के दावों को सुना जाएगा। वहीं मेरठ के ट्रिब्यूनल पर सहारनपुर, मेरठ, अलीगढ़, मुरादाबाद, बरेली और आगरा मंडल का अधिकार क्षेत्र होगा।
इन अधिकरणों को सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी और इनका फैसला अंतिम होगा। इसके फैसले के खिलाफ किसी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकेगी। ये ट्रिब्यूनल राजनीतिक सभाओं, विरोध प्रदर्शनों, आंदोलनों के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने के लिए सुनवाई करेंगे। क्षतिपूर्ति पाने के लिए संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना के तीन माह के अंदर दावा अधिकरण के समक्ष आवेदन करना होगा।
देश में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जुर्माना वसूलने का कदम उठाया था। इसको लेकर विवाद हुआ था और कोर्ट ने प्रदेश सरकार को मामले को लेकर फटकार लगाई थी। दिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस साल मार्च में उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी सम्पत्ति क्षति वसूली नियमावली 2020 अध्यादेश लेकर आई थी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मंजूरी के बाद सरकारी गजट में अधिसूचित हो गया था।












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