Kuldeep Singh Sengar की SC से बेल रद्द कराने वाले Tushar Mehta कौन हैं? इन दलीलों से उड़े सेंगर के होश!
Kuldeep Singh Sengar Unnao Case: उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले ने विवाद खड़ा किया था। लेकिन 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील पर हाई कोर्ट के 'सेंगर की सजा निलंबित व सशर्त जमानत' आदेश पर रोक लगा दी। इस सुनवाई में CBI की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने तीखी दलीलें दीं, जिससे सेंगर अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। मेहता ने कहा कि यह गंभीर अपराध है, जमानत गलत नजीर बनेगी।
पीड़िता ने SC के फैसले पर राहत की सांस ली। तुषार मेहता सरकार के टॉप कानूनी अफसर हैं, जो CBI, NIA जैसे केसों में सरकार का पक्ष रखते हैं। आइए, Explainer में जानते हैं तुषार मेहता कौन हैं, उनका बैकग्राउंड, उन्नाव केस में रोल और प्रमुख फैसले...

Who Is Tushar Mehta: तुषार मेहता कौन हैं? भारत के दूसरे सबसे बड़े सरकारी वकील
तुषार मेहता भारत के सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (Solicitor General of India) हैं- अटॉर्नी जनरल के बाद सरकार के दूसरे सबसे बड़े कानूनी प्रतिनिधि। वे सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में CBI, ED, NIA और केंद्र सरकार का पक्ष रखते हैं। अक्टूबर 2018 से इस पद पर हैं- भारत के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले SG में से एक। मेहता को 'सरकार की तरफ से मुंहतोड़ जवाब देने वाला वकील' कहा जाता है।
- बैकग्राउंड: गुजरात यूनिवर्सिटी से लॉ डिग्री, 5 गोल्ड मेडल। 1987 से वकालत शुरू की। सीनियर एडवोकेट बने। 2014-2018 में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल।
- पर्सनल: गुजरात से, लेकिन दिल्ली में सक्रिय। सख्त और तर्कपूर्ण दलीलों के लिए मशहूर। सरकार के संवेदनशील केसों में मुख्य वकील।
- वर्तमान: कई बार कार्यकाल बढ़ाया गया। संवैधानिक, क्रिमिनल और पॉलिसी केसों में एक्सपर्ट हैं।
Tushar Mehta Unnao Case Role: जमानत रद्द कराने की दलीलें
29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में CBI की अपील पर सुनवाई हुई। तुषार मेहता ने CBI का पक्ष रखा:-
- 'यह गंभीर अपराध- रेप और POCSO। पीड़िता नाबालिग थी। सेंगर जनप्रतिनिधि थे, प्रभाव का दुरुपयोग किया गया।'
- 'हाई कोर्ट का फैसला गलत- 'लोक सेवक नहीं' कहकर राहत दी, जो POCSO को कमजोर करता है। न्यूनतम सजा 20 साल होनी चाहिए।'
- 'जमानत गलत नजीर बनेगी। पीड़िता को खतरा। अपील में देरी नहीं, सजा निलंबन अपवाद।'
SC ने मेहता की दलीलों से सहमत होकर हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे लगाया। सेंगर जेल में रहेंगे। अगली सुनवाई जनवरी 2026 में।
| क्रमांक | मामला / केस | भूमिका / दलील / कार्य | सोर्स |
|---|---|---|---|
| 1 | 26/11 मुंबई टेरर (Tahawwur Rana केस) | सरकार ने उन्हें नेतृत्व वकील नियुक्त किया; NIA के केस में प्रशासित टीम के प्रमुख। | NIA/Tahawwur Rana |
| 2 | अनुच्छेद 370 चुनौती (J&K विशेष स्थिति) | उन्होंने सरकार की ओर से दलील दी कि अनुच्छेद 370 का हटाया जाना सही था और संविधान के अनुरूप था। | अनुच्छेद 370 केस |
| 3 | वैवाहिक समानता (Marriage Equality / LGBTQ+ मामले) | सुप्रीम कोर्ट में सरकार के पक्ष में तुषार मेहता ने कहा कि विवाह के अधिकार को संसद द्वारा तय किया जाना चाहिए। | LGBTQ+ विवाह अधिकार केस |
| 4 | वक्फ एक्ट / वक्फ संपत्ति विवाद | सुप्रीम कोर्ट में तीन दिन कानूनी बहस; उन्होंने सरकार का पक्ष रखा। | वक्फ कानून केस |
| 5 | CBI स्वतंत्रता का मामला (West Bengal Challenge) | उन्होंने यह दलील दी कि CBI स्वतंत्र एजेंसी है और संविधान के तहत राज्यों के मामलों में दायर मुकदमों की पात्रता सीमित। | CBI कार्य-क्षेत्र का विवाद |
| 6 | डिजिटल अरेस्ट / साइबर जांच मामला | सुप्रीम कोर्ट को CBI के लिए डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच कवरेज पर दलील दी। | सीबीआई साइबर मामलों की दलील |
प्रमुख केस जहां तुषार मेहता ने सरकार/CBI का पक्ष रखा-
मेहता ने कई हाई-प्रोफाइल केस लड़े:-
- 26/11 मुंबई अटैक (तहव्वुर राणा केस): NIA का पक्ष, राणा के प्रत्यर्पण में भूमिका।
- अनुच्छेद 370: सरकार की तरफ से दलील- हटाना संवैधानिक।
- LGBTQ+ मैरिज इक्वालिटी: सरकार का पक्ष- विवाह संसद तय करे।
- वक्फ एक्ट विवाद: सरकार का बचाव।
- CBI स्वतंत्रता (वेस्ट बंगाल केस): CBI की स्वायत्तता पर दलील।
- अन्य: डिजिटल अरेस्ट, साइबर जांच, भ्रष्टाचार केस।
- मेहता की दलीलें अक्सर सरकार को मजबूत करती हैं। SC ने कभी सुझाव दिया कि एक से ज्यादा केस में लोड ज्यादा, दूसरी लाइन विकसित करें।
Why Tushar Mehta Famous: क्यों मशहूर तुषार मेहता? सख्ती और तर्क की पहचान
- मेहता संवैधानिक और क्रिमिनल लॉ में एक्सपर्ट।
- सरकार के संवेदनशील केसों में मुख्य वकील।
- लंबा कार्यकाल- कई SG से ज्यादा समय।
- अपराधियों को राहत देने में सख्त, लेकिन कानून के दायरे में।
उन्नाव केस में मेहता की दलीलों से राहत
तुषार मेहता सरकार के 'कानूनी योद्धा' हैं। उन्नाव केस में उनकी दलीलों से सेंगर की जमानत पर रोक लगी- पीड़िता को न्याय की उम्मीद। मेहता जैसे अफसर कानून की रक्षा करते हैं। क्या अपील में अंतिम न्याय मिलेगा? यह देखना बाकी है। आपका विचार क्या है? कमेंट्स में बताएं!
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