Unlock 2.0: केंद्र की नई गाइडाइंस से क्या राज्यों को हो सकती है परेशानी

नई दिल्ली- केंद्रीय गृहमंत्राल ने अनलॉक-2.0 के लिए जो सोमवार देर रात नई गाइडलाइंस जारी की है, वह बुधवार से प्रभावी हो रही है। लेकिन, इस बार की गाइडलाइंस उन राज्यों के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, जहां कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। क्योंकि, नई गाइडलाइंस में कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जो ऐसे राज्यों को खटक सकते हैं। मसलन, नई गाइडलाइंस में केंद्र सरकार ने लोगों और मालों की आवाजाही पूरी तरह से खोल दी है और अब किसी पास की जरूरत नहीं है और कंटेंमेंट जोन छोड़कर लोग कहीं भी आ जा सकेंगे। राज्यों के द्वारा अपनी सीमाएं सील करना मुमकिन नहीं होगा, जो हाल में विवादों की वजह भी बन गया था।

अनलॉक-2.0 में कई तरह की छूट

अनलॉक-2.0 में कई तरह की छूट

अनलॉक-2.0 में केंद्र सरकार ने कंटेंमेंट जोन के बाहर लॉकडाउन पहले के मुकाबले काफी रियातें दी हैं। मसलन, रात के कर्फ्यू को 10 बजे से सुबह 5 बजे तक कर दिया गया है। पहले यह रात के 9 बजे से शुरू हो जाता था। इसी तरह बड़ी दुकानों और शो रूम में अब 5 कस्टम वाली पाबंदी हटा दी गई है और 6 फीट के सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक वक्त में ज्यादा कस्टमर भी अंदर रह सकते हैं। अलबत्ता, कंटेंमेंट जोन में लॉकडाउन अगले 31 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए वह चाहे तो वह अपनी ओर से कुछ और पाबंदियां लागू कर सकते हैं। लेकिन, इसमें सबसे बड़ी बात ये कही गई है कि राज्यों को अपनी सीमाएं सील करने की अनुमति नहीं दी गई है।

राज्यों को सीमाएं सील करने की इजाजत नहीं

राज्यों को सीमाएं सील करने की इजाजत नहीं

गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइंस में राज्यों से कहा गया है कि वह पब्लिक या सामानों की आवाजाही को नहीं रोक सकते। नई गाइडलाइंस कुछ इस प्रकार है कि 'अंतरराज्यीय और राज्यों के अंदर व्यक्तियों और सामानों के पड़ोसी देशों की जमीनी-सीमाओं समेत जिनके साथ व्यापारिक समझौते हैं, आवाजाही पर किसी भी तरह की पाबंदी नहीं रहेगी। इस तरह की आवाजाही के लिए अलग से कोई इजाजत/मंजूरी/ई-परमिट की आवश्यकता नहीं होगी।' जाहिर है कि अगर नई गाइडलाइंस की तुलना 30 मई के अनलॉक-1.0 से करें तो फर्क साफ महसूस हो जाता है। उस गाइडलाइंस में आवाजाही नियंत्रित करने को लेकर राज्यों को इस तरह के अधिकार मिले हुए थे, 'अगर राज्य/संघ शासित प्रदेश जन स्वास्थ्य और हालातों की समीक्षा के आधार पर व्यक्तियों की आवाजाही नियंत्रित करता है तो मूवमेंट को लेकर इन पाबंदियों का पहले से व्यापक प्रचार किया जाएगा....और संबंधित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।'

ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों को हो सकती है दिक्कत

ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों को हो सकती है दिक्कत

गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि अभी जो आदेश दिया गया है उसका मतलब यही है कि कोई राज्य लोगों की आवाजाही किसी भी कारण से प्रतिबंधित नहीं कर सकते। डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट के तहत इस तरह के फैसले लेने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है और राज्यों को इसका पालन करना होता है, जबतक कि खुद केंद्र सरकार उसे कुछ खास अधिकार न दे। ऐसे में जिन राज्यों को सीमाएं खुली रहने से संक्रमण को नियंत्रित रखने में दिक्कत होगी, उन्हें केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगानी पड़ सकती है। गौरतलब है कि अभी तक दिल्ली-एनसीआर में नोएडा-गाजियाबाद और गुरुग्राम की ओर से बॉर्डर सील करने को लेकर खूब विवाद हो चुका है। अदालतों तक में मामले जा चुके हैं। राजस्थान, कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी ऐसी पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं।

अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए फैसला

अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए फैसला

वैसे जानकारों की मानें तो केंद्र सरकार ने नया प्रावधान इसलिए लागू किया है, ताकि अर्थव्यस्था में थोड़ी और तेजी लायी जा सके। इसमें कोई दो राय नहीं कि लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है और केंद्र सरकार मान रही है कि जबतक बेरोक-टोक आवाजाही शुरू नहीं होगी, तबतक इसमें गति नहीं आ सकती है। जाहिर है कि ऐसे में जिन राज्यों को इससे परेशानियां होंगी, उन्हें केंद्र के साथ मिलकर ही कोई हल ढूंढ़ना होगा।

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