United Nations Report: साल 2050 तक भारत में होगी पानी की किल्लत! डरा रही है ये रिपोर्ट

जल है तो हम हैं, जल ही जीवन है, जल ही रक्त है और जल ही से वक्त है इसलिए इसकी रक्षा करें,यही कहना है संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट का, जिस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

United Nations Report:

United Nations Report (जल संकट) : जल ही जीवन है, एक दिन अगर वॉटर सप्लाई बंद हो जाती है तो चारों ओर त्राहिमाम-त्राहिमाम मच जाता है, लगता है कि लाइफ थम गई है और अब जीवन में कुछ बचा ही नहीं है। जरा सोचिए अगर ऐसी ही समस्या से आपको रोज दो-चार होना पड़े तो आपकी और हमारी जिंदगी कैसी हो जाएगी? लेकिन अगर इस बारे में हम अभी से ही गंभीरता से नहीं सोचेंगे तो आने वाले वक्त में हमें ऐसी ही समस्या का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट काफी डराने वाली है।

भारत, पाकिस्तान और चीन में होगा जलसंकट!

UN की World Water Development Report 2023 में कहा गया है कि साल 2050 तक विश्व की करीब 1.7 से 2.40 अरब की शहरी आबादी को जल की समस्या झेलनी पड़ सकती है और मौजूदा स्थिति की बात करें तो एशिया की करीब अस्सी प्रतिशत आबादी को जलसमस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सबसे प्रभावित भारत, पाकिस्तान और चीन जैसे देश हैं।

भारत पर मंडराया जल-संकट!

रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में भारत को ही सबसे ज्यादा पानी की किल्लत का सामना करना पड़ेगा, इसके पीछे भौगोलिक स्थिति और वैश्विक आबादी कारण है, जिस रफ्तार से शहरी आबादी बढ़ रही है, उसके हिसाब विश्व की शहरी आबादी की संख्या साल 2050 में 1.7 से 2.4 अरब होने के आसार हैं, जिसमें सबसे ज्यादा भारत पर प्रभाव पड़ेगा।

दो अरब लोगों को नहीं मिल रहा पीने का पानी

इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ग्लोबल लेवल पर दो अरब लोगों को साफ पीने का पानी नहीं मिल रहा है और 3.6 अरब लोग ऐसे हैं, जिनके पास safe sanitation system भी नहीं है,वो भी एक विकट संकट है।

कुदरत के ही साथ खिलवाड़

इस बारे में बात करते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि 'ये समस्या गंभीर है और इस पर तत्काल प्रभाव से एक्शन लेने की जरूरत है। आज विश्व की संपूर्ण मानव जाति प्रगति के चक्कर में अंधाधुंध भाग रही है, जिसके चलते वो कुदरत के ही साथ खिलवाड़ कर रही है, शहरीकरण के नाम पर जंगल काटे जा रहे हैं, जो कि जल संकट का बहुत बड़ा कारण है।'

ग्लोबल वार्मिंग से प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा

बढ़ता प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग से प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है। जल का गलत तरह से प्रयोग भी बर्बादी की वजह है। उन्होंने आगे कहा कि 'पानी मानवता के लिए एक ब्लड की तरह है और आधुनिकतावाद इसे ब्लड को बूंद-बूंद करके सूखा रहा है।'

भारत में भूमिगत जल का स्तर काफी खराब

तो वहीं हालिया टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि 'भारत में भूमिगत जल का स्तर काफी खराब हो गया , नदियां, नहरों का पानी पहले की तुलना में कम हुआ है और अगर यही हाल रहा तो आने वाले 40 वर्षों में इंडिया पानी की किल्लतों वाले देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा इसलिए इस बारे में सभी को काफी सोच-विचारकर कदम उठाने की जरूरत है।'

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