UN On Indian Economy: यूएन महासचिव ने बताया भारतीय अर्थव्यवस्था का दमदार और स्थिर, अब क्या कहेंगे राहुल गांधी?
UN On Indian Economy: भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस और खास तौर पर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी अक्सर चिंता जताते हैं। नेता विपक्ष ने बजट सत्र में चर्चा के दौरान कहा था कि सरकार ने एआई खतरों को ध्यान में नहीं रखा। भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत को एक मजबूत और तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बताया है। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच आर्थिक हालात को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाला देश बताया। उन्होंने कहा कि भारत न सिर्फ तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, बल्कि वैश्विक मामलों में भी उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के संदर्भ में उन्होंने भारत को एक सफल उभरती हुई इकोनॉमी करार दिया। गुटेरेस ने कहा कि बहुध्रुवीय (Multipolar) विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

UN On Indian Economy: राहुल गांधी साध रहे अर्थव्यवस्था पर निशाना
राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। उनका आरोप है कि देश में बेरोजगारी, महंगाई और असमानता बढ़ रही है, जिससे आर्थिक ढांचा कमजोर हो रहा है। कांग्रेस सांसद ने बजट पर हमला बोलते हुए कहा था, 'आम लोगों की आय और रोजगार के अवसरों में सुधार नहीं हुआ है। देश गंभीर रोजगार संकट से गुजर रहा है, लेकिन वित्त मंत्री की प्राथमिकता में ही यह नहीं है।'
Indian Economy पर वैश्विक जगत को भरोसा
हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट्स भारत के पक्ष में दिखाई देती हैं। वर्ल्ड बैंक ने हाल ही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत किया है, जो पहले के अनुमान से ज्यादा है। इसके अलावा डेलॉइट ने भी वित्त वर्ष 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.5 से 7.8 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, सर्विस सेक्टर की तेजी और बुनियादी ढांचे पर बढ़ता निवेश देश की ग्रोथ को सहारा दे रहा है।
UN महासचिव ने भी की भारत की तारीफ
यूएन महासचिव ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर भी अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दुनिया को एकध्रुवीय या दो महाशक्तियों में बंटी व्यवस्था से बचना चाहिए और बहुध्रुवीय सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का अच्छा उदाहरण बताया। एक तरफ विपक्ष आर्थिक चुनौतियों को उजागर कर रहा है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत की विकास दर और वैश्विक प्रभाव को सकारात्मक रूप में देख रही हैं। ऐसे में अर्थव्यवस्था को लेकर राजनीतिक और वैश्विक दृष्टिकोण के बीच अंतर साफ नजर आता है। आने वाले महीनों में ग्राउंड लेवल पर रोजगार, निवेश और महंगाई के आंकड़े इस बहस को और स्पष्ट कर सकते हैं।












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