टूटने की कागार पर किसानों का आंदोलन, कृषि मंत्री से मिलने के बाद दो और संगठनों ने खत्म किया धरना
नई दिल्ली। दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली के दौरान जिस तरह हिंसा हुई उसके बाद किसानों का आंदोलन कमजोर पड़ चुका है। इस हिंसा के बाद दो और किसान संगठनों ने आंदोलन से अलग राह चुन ली है। भारतीय किसान यूनियन (एकता) और भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) ने आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात के बाद दोनों संगठनों ने ये निर्णय लिया है।

आपको बता दें कि किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद से किसान आंदोलन को बड़े झटके लग रहे हैं। हिंसा के दूसरे दिन किसान आंदोलन के साथ जुड़े 2 संगठनों ने आंदोलन से हटने का ऐलान कर दिया था। इन संगठनों का नाम है राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु)। ये दोनों ही अब आंदोलन से अलग हो चुके हैं। इस बीच आज BKU (एकता) और BKU (लोकशक्ति) ने भी आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया है।
भानु प्रताप सिंह ने आंदोलन खत्म करते हुए कहा था कि जो कुछ 26 जनवरी को हुआ, उससे मुझे बेहद तकलीफ पहुंची है। जिन लोगों ने पुलिस पर हमला किया, जिन्होंने उदडंता की, किसान संगठनों को बदनाम किया मैं उन सबका विरोध करता हूं। इन सारे घटनाक्रम से दुखी होकर चिल्ला बॉर्डर से अपने नेताओं को हटाकर आंदोलन से अलग होने का ऐलान करता हूं। भानु गुट ने 58 दिन बाद आंदोलन को खत्म किया था।
गौरतलब है कि 26 जनवरी की घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने उन सभी किसान संगठनों के नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से ट्रैक्टर परेड निकालने का वादा किया था। लेकिन 26 जनवरी को आईटीओ और लालकिले पर जमकर उत्पात मचाया था। दिल्ली में आंदोलनकारियों के उत्पात के बाद दिल्ली पुलिस के 394 जवान चोटिल हो गए थे












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