ट्रैवल कंपनी Yatra ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी के साथ 2,300 करोड़ रुपये के विलय पर लगाया ब्रेक

नई दिल्ली- ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी 'यात्रा' (Yatra) ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी एबिक्स (Ebix) के साथ 2,300 करोड़ रुपये से ज्यादा के लंबित पड़े विलय समझौते को तोड़ दिया है। इतना ही नहीं 'यात्रा' ने अमेरिकी कंपनी के खिलाफ करार की शर्तों के उल्लंघन की भरपाई की मांग को लेकर अमेरिकी अदालत में कानूनी दावा भी ठोक दिया है। एबिक्स ने पिछले साल दिल्ली से सटे गुरुग्राम स्थित यात्रा ऑनलाइन के सभी शेयर 2,327 करोड़ रुपये के इंटरप्राइज वैल्यु पर खरीदने का समझौता किया था।

'यात्रा' ने एबिक्स के साथ 2,327 करोड़ के करार पर ब्रेक लगाया

'यात्रा' ने एबिक्स के साथ 2,327 करोड़ के करार पर ब्रेक लगाया

ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी 'यात्रा' ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी एबिक्स के रवैए की वजह से उसके साथ पिछले साल हुए 2,327 करोड़ रुपये से ज्यादा के करार को तोड़ दिया है। यात्रा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 'शिकायत में एबिक्स को विलय समझौते में रिप्रेजेंटेशन, वारंटीज और कोवेनैन्ट्स के उल्लंघन का जिम्मेदार ठहराया गया है और समझौते में देरी के लिए नुकसान की पर्याप्त भरपाई की मांग की गई है... ।' यात्रा ने एबिक्स पर आरोप लगाया है कि उसने समझौते का उल्लंघन करके यात्रा को शेयरधारकों से तोलमेल का लाभ उठाने से वंचित किया है। यह समझौता सभी कानूनी मंजूरियों के बाद पिछले साल अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में ही पूरा होना था, लेकिन अमेरिका के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन में कानूनी अड़चनों की वजह इसका बार-बार विस्तार होता गया।

काफी दिनों से दोनों के बीच चल रहा था विवाद

काफी दिनों से दोनों के बीच चल रहा था विवाद

एबिक्स ने भी मई में कहा था कि इस विलय की सभी औपचारिकताएं पूरी करने का आखिरी समय 4 मई,2020 तक है, उसके बाद यात्रा और एबिक्स दोनों में से कोई भी पक्ष इस विलय को रद्द कर सकता है। उसने ये भी कहा कि बाद में दोनों पार्टियों को विलय का एक मौका देने के लिए आखिरी तारीख को फिर से बढ़ाकर 4 जून,202 कर दी गई थी, ताकि दोनों पक्ष आपसी सहमिति से कुछ मुद्दों पर आम राय बना सकें। अगर यह समझौत लागू हो जाता तो यात्रा एबिक्स के ट्रैवल पोर्टफोलियो एबिक्सकैश (EbixCash) का एक हिस्सा बन जाता। अमेरिकी एक्सचेंज में दिए अपने वार्षिक रिपोर्ट में एबिक्स ने कहा था, मुख्य कर्मचारियों और अधिकारियों को बनाए रखना विलय के बाद जोखिम साबित हो सकते हैं और इसी वजह से दिक्कतें आ रही हैं। इसमें जेट एयरवेज के बंद होने के बाद भारतीय यात्रा कारोबार में आने के प्रति भी एक हिचकिचाहट जाहिर की गई थी।

'यात्रा' ने अपने खर्चों में भारी कटौती की है

'यात्रा' ने अपने खर्चों में भारी कटौती की है

'यात्रा' ने जिस तरह से विलय प्रस्तावों को तोड़ दिया है, उसपर एबिक्स की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इस बीच यात्रा की ओर से जारी एक और बयान में कहा गया कि मौजूदा हालातों में अप्रैल से कंपनी ने आमदनी बढ़ाने और इस फिल्ड में अपनी योग्यता को बरकरार रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें मैनेजमेंट की सैलरी में 50 फीसदी तक कटौती के अलावा और कई सारे फैसले लिए गए हैं। 4 जून तक यात्रा के पास कुल 240 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी उपलब्ध थी और उसका कंपनी के संचालन पर 8 करोड़ रुपये महीने से ज्यादा का खर्च आता है। गौरतलब है कि यात्रा, डोमेस्टिक और इंटरनेशनल एयर टिकट, होटलों की बुकिंग, होलिडे पैकेज, बस टिकट, ट्रेन टिकट और बाकी इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

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