आदित्य एल-1 को तैयार करने में कितना आया है खर्चा, जानें कितने दिन में पहुंचेगा और कब तक करेगा काम?
Aditya-L1 Mission: चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपना सूर्य मिशन आदित्य L1 (Aditya L1) लॉन्च करने जा रहा है। भारत का ये पहला सूर्य मिशन है जिसे ISRO 2 सितंबर को श्रीहरिकोटा स्पेस सेंटर से लॉन्च करने जा रहा है। आदित्य L1 नाम के इस मिशन पर भारत की बड़ी उम्मीदें टिकी हुई हैं। आइए जानते हैं इस आदित्य L1 में कितना रुपया खर्च हुआ और आदित्य L1 सूर्य की कक्षा में कितने दिन काम करेगा?

आदित्य L1 मिशन को सूर्य की कक्षा में पहुंचने में कितना दिन लगेगा
इसरो आदित्य L1 को 2 सितंबर को लॉन्च करेगा जैसे चंद्रया-3 को चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग में लॉन्च होने के बाद 40 दिन का समय लगा था। वैसे आदित्य L1 को लॉच करने के बाद सूरज की कक्षा एल-1 में पहुंचने में पूरे 110 दिन लगेगा। इसलिए समय अधिक लगेगा कि क्योंकि पृथ्वी से इस कक्षा एल 1 की दूरी लगभग 15 लाख किलोमीटर है।
आदित्य L1 मिशन कितने दिन करेगा काम
चंद्रयान-3 का प्रज्ञान रोवर और विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी धु्व की सतह पर केवल धरती के 14 दिन तक काम करेगा। वहीं इसरो के सूर्य मिशन का आदित्य L1 मिशन लगभग 5 साल तक सूरज से निकलने वाली किरणों का अध्ययन करेगा।
आदित्य L1 मिशन की कुल लागत
चंद्रयान-3 मिशन की लागत लगभग 600 करोड़ रुपये थी वहीं सूर्य की कक्षा में भेजे जा रहे आदित्य L1 मिशन को तैयार करने में कुल 378 करोड़ की लागत आई है।
सूर्य के इस मिशन का नाम क्यों रखा गया आदित्य L1
चांद पर भेजे एक मिशन का नाम इसरो ने जब चंद्रयान नाम रखा था तो अपने सूर्य संबंधी पहले मिशन का नाम सन या सूरज जैसा नाम क्यों नही रखा। इसरो ने इसके संबंध में खुलासा किया कि ये यान सूरज पर उतरने नहीं जा रहा है बल्कि सूर्य की कक्षा लाग्रेंज बिंदु 1 (एल1) पर सैटेलाइट की तरह रहेगा और सूरज के चारों ओर एक हेलो ऑर्बिट में रहेगा और सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाएगा। इसीलिए इसका नाम सूरज, सन या सौर्य के बजाय आदित्य L1 मिशन रखा गया
जानें वैज्ञानिकों को आदित्य L1 मिशन से क्या हैं उम्मीदें
वैज्ञानिकों के अनुसार इसके जरिए सूरज से निकलने वाली किरणों का अध्ययन किया जाएगा जिससे ये पता लगाया जा सके कि सूरज की किरणें अंतरिक्ष संबंधी गतिविधियों को कैसे प्रभावित करती हैं। आदित्य L1 के जरिए धरती से बैठकर सूर्य को बिना किसी रुकावट (ग्रहण) के लगातार देख सकेंगे। इसके तहत डेटा जमा एकत्र किया जाएगा ताकि वायु और तूफान जो नुकसान पहुंचा सकते हैं, उनसे संबंधित जानकारी मिलते ही अलर्ट किया जा सके।












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