चीन के विरोध के बावजूद दलाई लामा से मिलीं अमेरिकी नेता नैंसी पेलोसी
टॉप डेमोक्रेटिक नेता नैंसी पेलोसी ने प्रतिनिधिमंडल के साथ धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाकात। भारत की यात्रा पर आई नैंसी का मकसद दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाना।
धर्मशाला। टॉप डेमोक्रेटिक नेता नैंसी पेलोसी ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात की। नैंसी के साथ अमेरिकी प्रतिनिधमंडल ने भी दलाई लामा से मुलाकात की है। नैंसी अमेरिकी कांग्रेस में उसी डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता हैं जिस पार्टी के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हमेशा चीन के विरोध के बावजूद व्हाइट हाउस में दलाई लामा से मुलाकात की।

तिब्बती नेताओं से भी की मुलाकात
नैंसी और उनके साथी दलाई लामा से मिलने के बाद निर्वासित तिब्बत सरकार के नेताओं से भी मिले। अमेरिकी प्रतिनिधमंडल दो दिनों के धर्मशाला दौरे पर है। बुधवार को निर्वासित सरकार अमेरिकी प्रतिनिधमंडल का नागरिक अभिनंदन करेगी।

तिब्बत की आजादी के पक्षधर
नैंसी ने इस बीच कहा है कि अमेरिकी प्रतिनिधमंडल का यह दौरा दलाई लामा के लिए उनका विश्वास और विश्व शांति की उनकी भावना को आगे बढ़ायेगा। नैंसी की मानें तो डेमोक्रेटिक पार्टी शुरू से ही तिब्बत के लोगों की धार्मिक,सांस्कृतिक व भाषाई स्वतंत्रता के पक्षधर रही है।

भारतीय मूल की सांसद प्रमिला जयपाल भी आईं
पेलोसी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में जिम सेनसेनब्रेनर, इलियॉट एंजेल, जिम मैकगॉवर्न, बेट्टी मैक्कुलम, जूडी चू, जॉइस बिटी और प्रमिला जयपाल शामिल हैं। प्रतिनिधि सभा की पूर्व अध्यक्ष पेलोसी लंबे समय से तिब्बत की समर्थक रही हैं और अंतिम बार वर्ष 2008 में धर्मशाला आई थीं। सांसद जयपाल प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित होने वाली भारतीय मूल की पहली अमेरिकी महिला हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल धर्मशाला के पास तिब्बत चिल्ड्रेन विलेज भी गया।

चीन ने दर्ज कराया विरोध
चीन हमेशा से ही अमेरिकी नेता या फिर इसके किसी प्रतिनिधिमंडल की दलाई लामा से मुलाकात का विरोध करता रहा है। नैंसी की इस मुलाकात का विरोध भी चीन ने दर्ज कराया है। चीन के विरोध के बीच ही नैंसी का दलाई लामा के साथ खड़े होना एक अहम घटना है। दरअसल तिब्बत में हो रहे मानवाधिकार हनन के मामलों पर विश्व समुदाय का ध्यान खींचने के लिये अमेरिकी प्रतिनिधमंडल धर्मशाला पहुंचा हुआ है।

अमेरिका ने दिया गलत संदेश
चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि तिब्बत की आजादी को लेकर पेलोसी और दलाई लामा की मुलाकात ने दुनिया को गलत संदेश दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुएंग ने कहा है कि इस मुलाकात ने अमेरिकी सरकार की उस वचनबद्धता का उल्लंघन किया जिसमें उन्होंने तिब्बत की आजादी का समर्थन न करने की बात कही थी।

चीन के दबाव में नहीं है अमेरिका
अमेरिका के सांसदों ने चीन को भी साफ संकेत दे दिया कि अमेरिका, चीन के दवाब में काम नहीं करेगा। भले ही चीन दलाई लामा को खतरनाक नेता मानता रहे। नैंसी पेलोसी मार्च 2008 में एक अमेरिकी प्रतिनिधमंडल के साथ धर्मशाला आ चुकी हैं। यह उनका दूसरा धर्मशाला दौरा है।

पहले भी नैंसी आ चुकी हैं धर्मशाला
अमेरिका के चार सदस्यीय प्रतिनिधमंडल ने नवंबर 2015 को चीनी नियंत्रण वाले तिब्बत का दौरा किया था। चीन ने बाकायदा उन्हें तिब्बत के भीतर जाने की अनुमति दी थी। नैंसी पेलोसी पिछली बार धर्मशाला आई थीं तो वह अमेरिकी ससंद की स्पीकर थीं। उन्होंने हमेशा ही खुलकर तिब्बती नागरिकों का समर्थन किया है। उस दौरान भी चीन ने भारत व अमेरिका के साथ नैंसी पेलोसी के धर्मशाला दौरे का कड़ा विरोध किया था।
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