TISS Report: 'चार गुना हो जाएंगे मुसलमान',क्या भारत में 2051 तक हिंदू हो जाएंगे अल्पसंख्यक? BJP ने बताई सच्चाई
TISS Report On Hindu Population: मुंबई महानगरपालिका यानी BMC चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (TISS) की रिपोर्ट ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। यह वही रिपोर्ट है, जो 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान सामने आई थी और अब एक बार फिर वायरल होकर सियासी बहस के केंद्र में आ गई है।
आर्थिक राजधानी मुंबई की जनसंख्या संरचना को लेकर किए गए दावों ने BJP को आक्रामक मोड में ला दिया है और विपक्ष पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने दावा किया है कि आने वाले सालों में मुसलमान चार गुना हो जाएंगे।

🟡 2051 तक हिंदू अल्पसंख्यक?
TISS की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। स्टडी के मुताबिक 1961 में मुंबई में हिंदुओं की आबादी करीब 88 प्रतिशत थी। 2011 तक यह घटकर 66 प्रतिशत रह गई।
रिपोर्ट का अनुमान है कि 2051 तक हिंदुओं की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत या उससे भी नीचे आ सकती है। दूसरी ओर मुस्लिम आबादी 1961 में जहां 8 प्रतिशत थी, वह 2011 में बढ़कर 21 प्रतिशत हो गई और 2051 तक इसके 30 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। इन्हीं आंकड़ों को लेकर यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या भविष्य में हिंदू मुंबई में अल्पसंख्यक हो जाएंगे।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि इस बदलाव के पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय कारण हैं। इनमें प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि, शहर की ओर लगातार हो रहा पलायन और अलग-अलग समुदायों की जन्म दर में अंतर जैसे फैक्टर शामिल हैं। TISS मुताबिक ये अनुमान किसी राजनीतिक दावे पर नहीं, बल्कि लंबे समय के आंकड़ों और जनसंख्या के ट्रेंड के आधार पर तैयार किए गए हैं।
🟡 BJP का आरोप: घुसपैठ और वोट-बैंक की राजनीति
BJP नेता किरीट सोमैया ने इस रिपोर्ट के हवाले से तीखे आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एक तरफ बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है और उनकी हत्या की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर मुंबई में बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, ''TISS की रिपोर्ट कहती है 1961 में मुंबई में मुस्लिम आबादी केवल 8 प्रतिशत के आसपास थी। इसके बाद के दशकों में इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई और 2011 तक यह आंकड़ा 21 प्रतिशत तक पहुंच गया। आने वाले सालों में यह बढ़ोतरी जारी रह सकती है और 2051 तक मुंबई की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत तक हो सकती है।''
सोमैया का दावा है कि इन अवैध प्रवासियों को कुछ राजनीतिक दल वोट-बैंक के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए उनके नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाए जा रहे हैं।
अपने एक अन्य ट्वीट में किरीट सोमैया ने एक खबर का हवाला देते हुए लिखा है कि 1961 में मुंबई में मुस्लिम आबादी महज 8% थी. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2051 तक यह आबादी लगभग 30% तक पहुंच जाएगी और हिंदू घटकर 54/% रह जाएंगे।
🟡 BMC चुनाव से पहले क्यों फिर उछली TISS रिपोर्ट
TISS की यह स्टडी पिछले साल जारी की गई थी, लेकिन BMC चुनाव नजदीक आते ही इसे दोबारा हवा मिल गई है। भाजपा का कहना है कि यह कोई सामान्य अकादमिक रिपोर्ट नहीं, बल्कि मुंबई के भविष्य को लेकर खतरे की घंटी है।
पार्टी नेताओं का दावा है कि अगर अभी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में मुंबई की सामाजिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
🟡 स्लम इलाकों पर दबाव और संसाधनों की मार
TISS की रिपोर्ट में मुंबई की झुग्गी-बस्तियों की स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अवैध प्रवासियों की बड़ी संख्या स्लम इलाकों में रह रही है, जिससे बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है। इसके अलावा कम मजदूरी पर काम करने के कारण स्थानीय मजदूरों के रोजगार पर भी असर पड़ रहा है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सर्वे में शामिल 50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं किसी न किसी रूप में तस्करी का शिकार हुई हैं और उन्हें देह व्यापार में धकेला गया है।
🟡 मुंबई की कमाई सरहद पार?
आर्थिक मोर्चे पर भी रिपोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। TISS स्टडी के मुताबिक, अवैध घुसपैठियों का एक बड़ा हिस्सा हर महीने 10 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की रकम बांग्लादेश भेजता है। रिपोर्ट का दावा है कि करीब 40 प्रतिशत प्रवासी नियमित रूप से पैसा विदेश भेज रहे हैं, जिससे मुंबई की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
🟡 सियासत के केंद्र में रिपोर्ट
TISS की यह रिपोर्ट महाराष्ट्र में चुनावी माहौल के बीच फिर से राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई है। BJP इसे मुंबई और देश की आंतरिक सुरक्षा से जोड़कर देख रही है, जबकि विपक्ष इसे डर फैलाने की राजनीति बता सकता है। लेकिन इतना तय है कि BMC चुनाव से पहले यह रिपोर्ट एक बार फिर वोटरों के बीच बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
TISS की स्टडी साफ संकेत देती है कि अगर अवैध घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मुंबई का सामाजिक ढांचा और इतिहास दोनों बदल सकते हैं। यही वजह है कि यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले समय की चेतावनी बनकर सामने आई है।
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