तिहाड़ जेल प्रशासन ने यासीन मलिक को कोर्ट में पेश करने में असमर्थता जाहिर की
नई दिल्ली। तिहाड़ जेल में बंद कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को जेल प्रशासन ने कोर्ट में पेश करने में असमर्थता जताई है। बता दें कि यासीन मलिक फिलहाल वायुसेना के चार जवानों की हत्या के आरोप में जेल में बंद है, उसके उपर 1989-90 में तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबइया सईद के अपहरण का मामला दर्ज है, उसे इस मामले में आज कोर्ट में पेश किया जाना था। लेकिन कोर्ट प्रशासन ने उसे कोर्ट में पेश करने में असर्मथता जाहिर की है।

कोर्ट में पेश नहीं कर सकते
जेल प्रशासन की ओर से टाडा की विशेष कोर्ट में कहा गया है कि इस वर्ष गृहमंत्रालय की ओर से उन्हें निर्देश दिया गया है कि यासीन मलिक को देश की किसी भी कोर्ट में पेश नहीं किया जाए। हालांकि जेल प्रशासन की ओर से कहा गया है कि वह यासीन मलिक को कोर्ट में पेश करना चाहते हैं लेकिन उसे वह टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करना चाहते हैं। बता दें कि यासीन मलिक के खिलाफ दोनों ही मामलों में ट्रायल 11 सितंबर को शुरू हुआ है।

कोर्ट ने लगाया था स्टे
बता दें कि यासीन मलिक के ट्रायल पर स्टे लग गया गया था। जम्मू कश्मीर की हाई कोर्ट की सिंगल जज की बेंच ने मलिक के ट्रायल पर रोक लगा दी थी क्योंकि 1995 में उस वक्त श्रीनगर में कोई भी टाडा कोर्ट नहीं थी। लेकिन इस वर्ष अप्रैल माह में जस्टिस संजय गुप्ता ने उस आदेश को खारिज करते हुए गलत करार दिया था। 2008 में मलिक ने विशेष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमे उसने कहा कि ट्रायल को श्रीनगर की कोर्ट में ट्रांसफर किया जा सकता है क्योंकि इसकी वजह से उसे सुरक्षा की काफी दिक्कत होती थी। बता दें कि 1990 में हथियार डालने से पहले यासीन मलिक अलगाववादी था।

दो अलग-अलग मामले
यासीन मलिक पर पहला मामला 25 जनवरी 1990 में श्रीनगर के रावलपोड़ा का है। उसपर आरोप है कि उसने वायुसेना के कर्मचारियों पर गोली चलाई थी, जिसमे कई लोग घायल हो गए थे, एक महिला को गंभीर चोट आई थी, चार जवानों की मौत हो गई थी। जांच पूरी होने के बाद 31 अगस्त 1990 को चार्जशीट फाइल की गई थी। दूसरे मामले में मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण का आरोप मलिक पर है। उसने पांच आतंकियों की रिहाई के लिए रूबिया का अपहरण किया था।












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