सेना में भर्ती के लिए जा रहे अभ्यर्थियों ने ट्रेन पर किया कब्जा, यात्रियों के साथ मारपीट, गाली-गलौज

नई दिल्ली। सेना में भर्ती की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए जा रहे अभ्यर्थियों के ट्रेन पर कथित रूप से कब्जा करने का मामला सामने आया है। इन अभ्यर्थियों ने ना सिर्फ ट्रेन पर कब्जा किया बल्कि इसमे यात्रा कर रहे लोगों के साथ मारपीट की और रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पिछले एक हफ्ते के दौरान इन अभ्यर्थियों ने रेलवे को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन इन सब के बाद भी रेलवे प्रशासन की ओर से इनके खिलाफ किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की है।

जमकर किया उत्पात

जमकर किया उत्पात

तकरीबन 60000 अभ्यर्थी सेना में भर्ती की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए 8 जनवरी से 22 जनवरी के बीज बड़ी संख्या में ट्रेन से गुना तक सफर कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार सबसे ज्यादा दिक्कत शुरू के तीन दिन में पहुंचाया गया है, गुना से ग्वालियर सेक्टर के बीच इन लोगो्ं ने काफी उपद्रव किया है। लेकिन अचानक से इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से निपटने के लिए रेलवे के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है, इनमे से अधिकतर लोग बिना टिकट के यात्रा कर रहे थे।

जबरदस्ती घुस गए इंजन कंपार्टमेंट में

जबरदस्ती घुस गए इंजन कंपार्टमेंट में

अधिकारियों के अनुसार ट्रेन को उस वक्त हाईजैक किया गया है जब 11 जनवरी को मध्य प्रदेश के शिवपुरी से रामेश्वरम के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के लिए ट्रेन रवाना की गई। जब ट्रेन गुना स्टेशन पहुंची तो हजारों अभ्यर्थी जोकि भर्ती प्रक्रिया से वापस लौट रहे थे जबरन ये लोग ट्रेन में चढ़ गए, यहां तक कि इन लोगों ने ट्रेन के इंजिन में ड्राइवर से जबरदस्ती की और ट्रेन को शिवपुरी ले जाने को कहा जोकि 100 किलोमीटर उत्तर में है। हालांकि यह लोग चाहते थे कि उनके इशारे पर ट्रेन ग्वालियर तक जाए लेकिन रेलवे पुलिस फोर्स ने हल्का बल प्रयोग करके इन्हे तितर-बितर कर दिया।

एसी कोच में भी घुसे

एसी कोच में भी घुसे

वेस्ट सेंट्रल रेलवे पब्लिक रिलेशन अधिकारी आईए सिद्दीकी ने कहा कि किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है क्योंकि सभी आरोपी मौके से भाग गए। हमारा मुख्य मकसद यह था कि ट्रेन फिर से सही समय पर अपनी यात्रा शुरू कर सके और किसी भी तरह की कानून व्यवस्था की समस्या ना हो। लेकिन रेलवे की समस्या यही नहीं खत्म हुई, तमाम अभ्यर्थी अलग-अलग ट्रेनों में सवार हो गए और यात्रियों की सीटों पर जबरन कब्जा कर लिया, ये अभ्यर्थी ना सिर्फ अन्य डिब्बों में बल्कि एसी कोच में भी घुस गए और सीटों पर कब्जा कर लिया। लेकिन इन लोगों को इसलिए नहीं हटाया जा सका क्योंकि आरपीएफ के जवानों की संख्या पर्याप्त नहीं थी।

भयावह मंजर था

भयावह मंजर था

सिद्दीकी ने बताया कि आरपीएफ के लिए यह काफी मुश्किल था इतनी बड़ी संख्या में लोगों पर काबू पाना। यह सही कि ये लोग एसी कोच में भी घुस गए, लेकिन हम लोगों ने इनके खिलाफ बल प्रयोग इसलिए नहीं किया क्योंकि इससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। 42 वर्षीय सुनीता अग्रवाल जोकि शिवपुरी की रहने वाली हैं का कहना है कि इंदोर-अमृतसर एक्सप्रेस में बड़ी संख्या में लड़के अचानक घुस आए, वो हंस रहे थे, गालियां दे रहे थे, यात्रियों के साथ अभद्रता कर रहे थे, लेकिन हम उनके खिलाफ कुछ भी करने में समर्थ नहीं थे, यह काफी भयावह था।

रेलवे व सेना भर्ती बोर्ड आमने-सामने

रेलवे व सेना भर्ती बोर्ड आमने-सामने

वहीं डायरेक्ट आर्मी रिक्रूटमेंट ग्वालियर के डायरेक्टर कर्नल मनीष चतुर्वेदी ने रेलवे पर आरोप लगाया कि रेलव ने भर्ती के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की उनकी अपील को ठुकरा दिया था। उन्होंने कहा कि प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि इस बाबत पूरी व्यवस्था की जाए। इन लोगों ने हमे गुना में भर्ती प्रक्रिया के आयोजन के लिए न्योता दिया था, हमने रेलवे से इस दौरान 15 दिनों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने को कहा था। वहीं इस आरोप पर सिद्दीकी ने कहा कि हम कुछ संवाद में कमी की वजह से स्पेशल ट्रेन नहीं चला सके, लेकिन भविष्य में इसका खयाल रखेंगे।

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