जानिए ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़ी खास बातें जो इसे बनाती हैं खतरनाक
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पिछले दिनों अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मोस के डेप्लॉयमेंट को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक मीटिंग में 4,300 करोड़ रुपए की लागत के साथ एक नई रेजीमेंट को तैयार करने और फिर उसे चीन के नजदीक अरुणाचल प्रदेश में तैनात करने की मंजूरी दी गई।

चीन के दबाव से निपटने को तैयार भारत!
चीन ने भी भारत के इस प्रस्ताव पर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। चीन ने भारत के इस कदम को शांति के खिलाफ बताया है। दूसरी ओर भारत अब इस मिसाइल को विएतनाम जैसे देशों को देने का मन बना रहा है।
भारत का यह कदम कहीं न कहीं चीन पर दबाव बनाने और उसकी चुनौती के लिए खुद को तैयार करने से जुड़ा है।
आइए आज आपको ब्रह्मोस से जुड़ी खास बातों के बारे में बताते हैं। इन बातों को जानने के बाद आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह मिसाइल आखिर क्यों इतनी खतरनाक है।
इंटरसेप्ट करना नामुकिन
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल को डीआरडीओ और रूस की एनपीओ माशीनोस्ट्रोनिया मिलकर डेवलप कर रहे हैं।
- मिसाइल पनडुब्बी, जहाज, एयरक्राफ्ट या जमीन से भी लांच की जा सकती है।
- दुनिया की सबसे तेज मिसाइल जो 2.8 मैक या 3,400 प्रति घंटे की रफ्तार और मीन मैक या 3,700 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हमला कर सकती है।
- ब्रह्मोस स्पीड में अमेरिकी सेना की मिसाइल टॉमहॉक से चार गुनी तेज है।
- इसकी रेंज 290 किमी से लेकर 300 किमी तक है।
- ब्रह्मोस का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस को मोस्कवा से मिलकर बना है।
- जहाज और जमीन से लांच होने पर यह मिसाइल 200 किलो वारॅहेड्स ले जा सकती है।
- वहीं एयरक्राफ्ट से लांच होने पर 300 किलो के वॉरहेड्स ले जाने में सक्षम।
- विशेषज्ञों की मानें तो 2.8 और 3.0 मैक की स्पीड इसे इंटरसेप्ट नहीं किया सकता है।
- अगर ऐसा करना है तो फिर दुश्मनों को अपने सिस्टम को अपग्रेड करना होगा या फिर नया सिस्टम बनाना होगा।
- ब्रह्मोस को पहली बार जून 12 2001 में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से लांच किया गया।
- 12 जून 2004 को इस मिसाइल को एक मोबाइल लांचर के जरिए लांच किया गया।
- भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है जिसके पास मन्यूवरबल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।
- इंडियन नेवी ने सात अक्टूबर 2012 को आईएनएस तेज से ब्रह्मोस को लांच किया था।












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