Lok sabha election 2024: पीएम मोदी के लिए 2024 में ये पांच मुद्दे बन सकते हैं वापसी में बड़ा रोड़ा
राहुल गांधी ने रविवार को पीएम मोदी से यूपीए की सरकार में की गई जातीय जनगणना के आंकड़े जारी करने के लिए कहा है। जो मोदी सरकार के लिए एक बड़ी परेशानी खड़ा सकता है।

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में स्थानीय मुद्दों के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे को हवा दे दी है। यह मुद्दा जातीय जनगणना को लेकर है। उन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले 'ओबीसी और दलित 'कार्ड' खेल दिया है।
राहुल गांधी ने रविवार को पीएम मोदी से यूपीए की सरकार में की गई जातीय जनगणना के आंकड़े जारी करने के लिए कहा है। राहुल ने यह दावा किया कि केंद्र सरकार में सचिव के रूप में केवल 7 प्रतिशत अन्य पिछड़ी जातियां, दलित और आदिवासी हैं।
पीएम मोदी के निशाने पर लेते हुए राहुल गांधी ने जितनी आबादी, उतना हक़! का नारा दिया है। राहुल गांधी की ये मांग मोदी सरकार के लिए आगामी लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनने वाली है। हम आज 5 ऐसे बड़े मुद्दे पर बात करेंगे जो मोदी सरकार के लिए 2014 में बड़ा रोड़ा बन सकते हैं।

जातीय जनगणना की मांग
यह मुद्दा कर्नाटक चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक काफी प्रभावशाली माना जा रहा है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लगातार जातीय जनगणना की मांग कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। पत्र में खड़गे ने देश में 2021 की जनगणना जल्द से जल्द कराने की मांग की है। उन्होंने लिखा कि जनगणना जाति आधारित हो।
कांग्रेस ने आगामी चुनाव के लिए 'ओबीसी और दलित 'कार्ड' चल दिया है। जो मोदी और बीजेपी के लिए बड़ी परेशानी खड़ा कर सकता है। पिछले दोनों लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की जीत में ओबीसी और दलित वोटरों की बड़ी भूमिका रही है। लेकिन अब जातीय जनगणना की मांग ने बीजेपी को परेशानी में डाल दिया है।
हाल ही में मानहानि वाले मामले में राहुल गांधी के दोषी करार दिया गया था और संसद की सदस्यता रद्द कर दी गई थी। जिसके बाद बीजेपी और मोदी सरकार के मंत्री लगातार राहुल गांधी के उपर ओबीसी का अपमान करने की बात कर रहे थे। जिसके बाद अब राहुल गांधी ने इसी ओबीसी के भागादारी का मुद्दा उठाकर उन्हें वापस घेरा है।
बता दें कि बीजेपी जातीय जनगणना को लेकर काफी हिचकती रही है। वह इस मुद्दे पर कभी खुलकर कुछ भी नहीं बोली हैं। वहीं बिहार में इस समय जातीय जनगणना का दूसरा चरण शुरू हो गया है। जो कि बिहार की राजनीति में बड़ा उटलफेर कर सकती है।
माना जा रहा है कि नीतीश-तेजस्वी सरकार आने वाले दिनों में इसी जनगणना के आधार पर कई योजनाओं और नौकरियों में आरक्षणा का ऐलान कर सकते हैं। जिसे देखते हुए अन्य राज्य भी जातीय जनगणना का ऐलान कर सकते हैं। ऐसे में बीजेपी का कोर वोट बैंक ओबीसी वर्ग बीजेपी से छिटक सकता है।

अडानी पर मोदी सरकार की चुप्पी
कांग्रेस और राहुल गांधी लगातार पीएम मोदी पर अडानी के मामले को लेकर हमलावर है। वह दिन इस मामले को लेकर पीएम मोदी से सवाल पूछ रहे हैं। लेकिन पीएम मोदी की ओर से इस पूरे मामले पर एक बार भी कोई बयान नहीं दिया गया है। वहीं राहुल गांधी द्वारा संसद में पीएम मोदी औऱ अडानी की फोटो दिखाकर जो सवाल पूछे गए हैं। वह भी मोदी सरकार के लिए बड़ी परेशानी बन रहे हैं।
अडानी के मामले में पूरी मोदी सरकार को विपक्ष घेर रहा है और लगातार जेपीसी की मांग कर रहा है। ऐसे राजनीतिक दल मोदी सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार के मामले उठा रहे हैं। पीएम मोदी 2014 में भ्रष्टाचार का मुद्दा लेकर चुनाव में उतरे थे। अब जब वे सत्ता में तो उनके खिलाफ भी कांग्रेस, आप, आरजेडी, बीआरएस और अन्य राजनीतिक दल गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर हाल ही में बीजेपी के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी पीएम मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सत्यपाल मलिक ने एक इंटरव्यू में कहा कि, प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार से बहुत नफरत नहीं करते हैं। इसके अलावा उन्होंने कई भ्रष्टाचार की घटनाओं का भी जिक्र किया है।

पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक का पुलवामा पर खुलासा
जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हाल ही में द वायर को दिए इंटरव्यू में कई खुलासे किए हैं। जिसमें सबसे बड़ा खुलासा उन्होंने पुलवामा को लेकर किया है। उन्होंने दावा किया था कि, पुलवामा हमला केंद्रीय गृह मंत्रालय की अक्षमता और लापरवाही का नतीजा था।
सत्यपाल मलिक ने दावा किया कि, सीआरपीएफ के लोगों ने विमान मांगा था। लेकिन गृह मंत्रालय (उस समय गृहमंत्री राजनाथ सिंह थे) ने मना कर दिया था। उन्हें 5 विमान चाहिए थे। अगर मुझे मांगे होते तो मैं अरेंज कर देता। मलिक ने कहा कि, घटना वाले दिन मैंने इसके बारे में पीएम मोदी को बताया था कि ये हमारी गलती से हुआ है, अगर हम विमान दे देते तो ये नहीं होता। तो उन्होंने कहा कि तुम अभी चुप रहो। मैंने एक-दो चैनल को बोल दिया था।
बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पुलवामा हमले के बाद बड़ा टर्निंग प्वाइंट आ गया था। पहले चुनाव में पिछड़ रही बीजेपी और पीएम मोदी ने हमले के बाद लोगों से पुलवामा हमला करने वालों को सबक सिखाने के लिए वोट देने की अपील की थी। जिसका असर भी हुआ। बीजेपी को इस चुनाव में 300 से अधिक सीटें आई थीं।
अब जब कि इस हमले को लेकर सत्यपाल मलिक ने जो खुलासे किए हैं। उससे पीएम मोदी और बीजेपी बैकफुट पर नजर आ रही है। कांग्रेस लगातार हमलावर है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पुलवामा अटैक को लेकर पांच सवाल किए हैं। जिसमें उस समय की स्थितियों को लेकर सवाल उठाए हैं। जो पुलवामा हमला 2019 के चुनावों में बीजेपी के लिए संजीवनी साबित हुआ, इस बार वह उसके गले की हड्डी बनता दिख रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे को किसी भी कीमत पर छोड़ने के मूड में नजर नहीं आ रही है।

मंहगाई और रोजगार पर घिरी मोदी सरकार
देश में महंगाई पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ी है। विपक्ष ने सड़क से लेकर संसद तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। कांग्रेस मोदी सरकार पर महंगाई और रोजगार के मुद्दे पर बुरी तरह नाकाम होने के आरोप लगाती रही है। मुद्रास्फीति पिछली कई तिमाही में आरबीआई की तय सीमा से उपर रही है। हालांकि पिछले महीने मंहगाई 6 फीसदी के आंकड़े से नीचे जरूर आई है। लेकिन दूध, सिलेंडर, ईधन समेत कई समानों पर बढ़ी कीमतें ने लोगों पर काफी असर डाला है।
बीजेपी के सामने महंगाई और बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। बेरोजगारी के मुद्दे को कांग्रेस पार्टी जोर- शोर उठा रही है। मोदी सरकार में बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ी है। 2 करोड़ नौकरियां हर साल देने का वादा कर सत्ता आई बीजेपी अब इस मुद्दे पर लगातार बात करने से बच रही है। मोदी सरकार के समय में बेरोजगारी अपनी 45 साल के सबसे अधिकतक स्तर पर है।
रोजगार के मुद्दे पर युवाओं में बहुत अधिक गुस्सा देखा जा रहा है। विपक्ष और राहुल गांधी लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। वे मोदी सरकार के बेरोजगारी के आंकड़े जारी करने की भी मांग कर रहे हैं।

2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव
इन सब मुद्दों के साथ ही कांग्रेस का ऊपर आता ग्राफ भी तीसरी बार मोदी सरकार की वापसी की राह में बाधा बन सकता है। अगले महीने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इन चुनावों में बीजेपी बहुत बुरी तरह से पिछड़ती नजर आ रही है। माना जा रहा है कि, कांग्रेस इस राज्य को बीजेपी से छीन लेगी। इसके अलावा इस साल के अंत तक मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं।
मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। लेकिन पिछले चुनाव में बीजेपी हार गई थी। एक साल बाद बीजेपी ने ऑपरेशन लोटस की मदद से फिर से एमपी में सत्ता हासिल कर ली थी। लेकिन बीजेपी द्वारा सत्ता को इस तरह से हथियाने और शिवराज सिंह के तीन टर्म के शासनकाल से लोगों में कई मुद्दे पर जबरदस्त तरीके से नाजारगी है। जो बीजेपी को राज्य की सत्ता से बाहर कर सकती है।
वहीं अगर कांग्रेस राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपनी सरकारें बचाने में कामयाब हो जाती हैं। तो ये बीजेपी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा। बीजेपी इन राज्यों में वापसी की पूरी कोशिश कर रही है। राजस्थान में जहां बीजेपी के अंदर की खेमेबाजी पार्टी के लिए बड़ी चिंता का सबब है। तो वहीं छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल लगातार लोगों के रिझाने के लिए घोषणाएं कर रहे हैं। ऐसे में विपक्ष में बैठी बीजेपी उनका काट नहीं खोज पा रही है।












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