इसलिए पीएम मोदी ने पहले विदेश दौरे के लिए चुना है मालदीव को, चीन हो जाएगा परेशान

नई दिल्‍ली। 30 मई को दोबारा प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद नरेंद्र मोदी आठ और नौ जून को दूसरे कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा पर रवाना होंगे। पीएम मोदी मालदीव और श्रीलंका की यात्रा करेंगे। वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर भी भारत के सबसे करीबी पड़ोसी भूटान की यात्रा पर जाएंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से गुरुवार को इसकी पुष्टि कर दी गई है। पीएम मोदी के शपथ लेने से पहले ही इस बात की जानकारी सूत्रों की ओर से दी गई थी कि दोबारा पीएमओ का जिम्‍मा लेने के बाद मोदी, पड़ोसी देशों को तवज्‍जो देने के सिद्धांत को आगे बढ़ाएगे। इस वजह से वह सबसे पहले मालदीव का दौरा करेंगे।

साल 2011 के बाद पहला दौरा

साल 2011 के बाद पहला दौरा

पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहली द्विपक्षीय दौरा है। पीएम मोदी ने पिछले वर्ष नवंबर में पहली बार मालदीव का दौरा किया था। पहले कार्यकाल में वह मोदी का मालदीव का पहला दौरा था। मोदी उस समय राष्‍ट्रपति इब्राहीम सोलेह के शपथ ग्रहण समारोह के लिए गए थे। हालांकि नवंबर में पीएम मोदी का माले दौरा द्विपक्षीय दौरा नहीं था। ऐसे में अगर देखा जाए तो सितंबर 2011 के बाद भारत का कोई पीएम माले जाएगा। पिछली बार पूर्व मानमोहन सिंह सार्क सम्‍मेलन के लिए मालदीव के दौरे पर गए थे। भारत और मालदीव के संबंध जो पूर्व राष्‍ट्रपति अब्‍दुल्‍ला यामीन के कार्यकाल में बिगड़ गए थे, उनमें नई सरकार बननने के बाद से ही सुधार आया है। पांच फरवरी 2018 को यमीन ने मालदीव में इमरजेंसी लगा दी थी और उनके इस ऐलान ने दोनों देशों के संबंधों को और बिगाड़ दिया।

पहले कार्यकाल में सबसे पहले चुना भूटान को

पहले कार्यकाल में सबसे पहले चुना भूटान को

साल 2014 में जब मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तो उस समय वह सबसे पहले भूटान के दौरे पर गए थे। उस वर्ष की ही भांति इस बार भी पीएम मोदी पहले भारत के करीबी पड़ोसी से मिलना चाहते हैं। इसके अलावा इस बार पीएम मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में बिमस्‍टेक देशों को आमंत्रित किया तो मालदीव छूट गया था। पिछली बार जब उन्‍होंने शपथ ली थी तो सार्क देशों को भेजे आमंत्रण की वजह से मालदीव ने भी इसमें शिरकत की थी। मालदीव में यामीन की सरकार चीन की नीतियों का समर्थन करने वाली सरकार थी। भारत ने पिछले कुछ माह के अंदर मालदीव के साथ सहयोग को दोगुना कर दिया है। नई सरकार आने के बाद भारत न सिर्फ मालदीव के करीब हुआ है बल्कि वह चीनी को घेरने की अपनी नीति पर फिर से वापस लौटा है।

चीन को घेरने का संकेत

चीन को घेरने का संकेत

पीएम मोदी का मालदीव दौरा एक तरह से भारत की हिंद महासागर क्षेत्र पर बनाई गई नीति का संकेत भी है। मालदीव में नई सरकार आने के बाद से भारत ने यहां पर कोस्‍टल रडार्स का नेटवर्क बनाने का काम फिर से शुरू कर दिया है। विदेश सचिव विजय गोखले की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक‍ पीएम मोदी इस बार अपने मालदीव दौरे पर दो अहम प्रोजेक्‍ट्स कोस्‍टल सर्विलांस रडार सिस्‍टम और कम्‍पोजिट ट्रेनिंग सेंटर फॉर मालदीव्‍स नेशनल डिफेंस फोर्सेज का भी उद्घाटन करेंगे। दोनों प्रोजेक्‍ट्स की कुल लागत करीब 180 करोड़ रुपए है।

संसद को भी करेंगे संबोधित

संसद को भी करेंगे संबोधित

इसके अलावा पीएम मोदी मालदीव की संसद को भी संबोधित करेंगे। मालदीव की संसद ने एक प्रस्‍ताव पिछले दिनों पास किया था जिसमें पीएम मोद को संसद को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। मालदीव के विदेश मंत्री अब्‍दुल्‍ला शाहिद ने इस बात की पुष्टि की है। मालदीव की संसद जिसे मजलिस कहते है, उसकी तरफ से यह प्रस्‍ताव पास किया गया था। मालदीव की संसद के स्‍पीकर और पूर्व राष्‍ट्रपति मोहम्‍मद नशीद की मानें तो मोदी का देश में स्‍वागत करना निश्चित तौर पर एक गौरव की बात है।

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