अंडमान सागर में उठने वाला प्रेशर मानसून पर डालेगा असर?, IMD ने दिया ये जवाब

नई दिल्ली, 05 मई। गुरुवार को देश के कई राज्यों में बारिश हुई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है, मौसम में ये बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के कारण संभव हुआ है लेकिन आज शाम से ये प्रभाव कम होने जा रहा है, जिससे एक बार फिर से उत्तर भारत में हीटवेव का प्रभाव देखने को मिलेगा और कई राज्यों में पारा चढ़ेगा तो वहीं अंडमान सागर में उठने वाला प्रेशर भी लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, हालांकि मौसम विभाग ने कहा है कि उसकी निगाहें इस प्रेशर पर लगातार बनी हुई है।

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     अंडमान सागर में उठने वाला प्रेशर मानसून पर डालेगा असर?

    वर्तमान स्थिति को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है ये प्रेशर पूरे 48 घंटे के बाद चक्रवात में तब्दील हो सकता है, जिससे अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 8 मई को भारी बारिश होने का अनुमान है और इस दौरान काफी तेज हवाएं भी चलेंगी लेकिन इस सकारात्मकर बात ये है कि इस चक्रवाती परिस्थितियों का असर आने वाले मानसून पर नहीं पड़ेगा बल्कि मौसम के इस उठा-पटक से मानसून अपनी तय तारीख को ही केरल के तट पर दस्तक देगा।

     अंडमान सागर में उठने वाला प्रेशर मानसून पर डालेगा असर?

    IMD cyclones को मॉनिटर करने वाले मौसम वैज्ञानिक आनंद कुमार दास ने उपग्रह इमेज के हवाले से कहा कि 'भूमध्य रेखा के पास एक बादलों का समूह बना हुआ है, जो कि काफी सक्रिय है, जो कि ये संकेत दे रहा है कि मानसून की गतिविधियां जल्दी ही गति पकड़ेगी। अंडमान सागर में बनने वाला लो प्रेशर दवाब दरअसल cross-equatorial प्रवाह को आगे बढ़ाने में मदद करेगा, जो कि मानसून को अपने निर्धारित वक्त पर आने पर मदद करेगा।' आपको बता दें कि आम तौर पर मानसून 1 जून या इसके तीन-चार दिन के अंतराल में ही केरल पर दस्तक देता है। देश में मानसून सीजन जून से लेकर सितंबर तक रहता है।

     अंडमान सागर में उठने वाला प्रेशर मानसून पर डालेगा असर?

    मानसून सीजन काफी अच्छा रहने वाला है

    आपको बता दें कि भारत एक कृषि प्रधान देश है इसलिए यहां के लिए मानसून सीजन बहुत ज्यादा मायने रखता है। इससे पहले मौसम विभाग ने ऐलान किया था कि इस साल मानसून सीजन काफी अच्छा रहने वाला है और इस वर्ष लोगों को सामान्य से अधिक बारिश देखने को मिलेगी। मानसून सीजन किसानों के लिए खुशी लेकर आएगा। गौरतलब है कि चावल, चीनी, कपास, दाल, चना और खाद्य तेलों जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई मानसून पर निर्भर होती है।

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