कांग्रेस-बीजेपी के बीच मचे घमासान के बीच राजस्थान की इन 10 सीटों पर सब की निगाहें
जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनावों के लिए हो रहा प्रचार अपने पूरे चरम पर है। लेकिन राज्य में कम से कम 10 सीटें ऐसी हैं जिन पर ना केवल राज्य के लोगों बल्कि देश के लोगों की निगाहें टिकी हुईं हैं। इस सभी सीटों को लेकर चर्चा करना इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि पार्टियों ने इस बार के चुनाव में वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ छोटे नेता उतारने की पंरपरा को तोड़ दिया है। इन 10 सीटों में से छह को हॉट सीट माना जा रहा है।

राजे- मानवेंद्र एक दूसरे के सामने
दरअसल इस बार लोगों की निगाह राजस्थान में झालनपाटन सीट पर है। जहां खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने उनके खिलाफ मानवेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है। मानवेंद्र सिंह एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे हैं। वह पहले बीजेपी के विधायक थे। लेकिन हाल ही उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा है। यह पहली बार है जब दो बड़े नेता एक दूसरे के खिलाफ चुनावी रण में एक दूसरे के सामने हैं। राज्य में हॉट सीट बने सांगानेर विधानसभा क्षेत्र में सियासी समीकरण रोचक हो गए हैं। यहां त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है। अब तक ब्राह्मण प्रत्याशी उतारती आई भाजपा ने इस बार यहां वैश्य चेहरे महापौर अशोक लाहोटी पर दावं खेला है। भाजपा से अलग होकर नई पार्टी बना चुके घनश्याम तिवारी और कांग्रेस से पुष्पेन्द्र भारद्वाज मैदान में हैं।

अशोक गहलोत के खिलाफ बीजेपी ने उतारा इस नेता को
कांग्रेस के महासचिव और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरदारपुरा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले दो दशक से बीजेपी यह सीट जीतने में असफल रही है। बीजेपी ने एक बार फिर संभू सिंह खेतसर को मैदान में उतारा है। जिन्होंने 1998 में यहां से चुनाव जीता था। लेकिन यह मुकाबला दूसरों के जितना दिलचस्प नहीं है। क्योंकि यहां पर गहलोत का जीतना स्पष्ट है। इसके अलावा बीजेपी ने गृहमंत्री गुलाब चंद्र कटारिया को कांग्रेस की सीनियर लीडर गिरजा व्यास के खिलाफ उतारा है। वहीं दलपत सुराना इस मुकाबले को त्रिकोणिय बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

सचिन पायलट के खिलाफ बीजेपी ने उतारा मु्स्लिम उम्मीदवार
नाथद्वारा सीट से कांग्रेस ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ.सी.पी.जोशी को टिकट दिया है। वहीं भाजपा ने जोशी के ही शागिर्द महेन्द्र प्रताप सिंह को मैदान में उतारा है। जोशी पिछले विधानसभा चुनाव में मात्र एक वोट से चुनाव हार गए थे। इस क्षेत्र में 2 लाख 26 हजार 398 मतदाता है। इनमें ब्राहम्ण,गुर्जर,राजपूत और रावत मतदाता लगभग समान है। अनुसूचति जाति हमेशा निर्णायक भूमिका में रहती है । टोंक से पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट पहली बार चुनाव लड़ रहे है। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की अधिकता को देखते हुए भाजपा ने वसुंधरा सरकार के केबिनेट मंत्री यूनुस खान को मैदान में उतारा है। वे भाजपा के एकमात्र मुस्लिम प्रत्याशी है। भाजपा ने पहले अजीत मेहता को टिकट दिया था,लेकिन फिर उनका टिकट काटकर यूनुस खान को मैदान में उतारा। टोंक सीट पर भाजपा के साथ कांग्रेस के नेताओं की भी नजर है ।

महुआ विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद ही रोचक
महुआ विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद ही रोचक है। इस अनारक्षित सीट से राजेंद्र मीणा अपने चिरप्रतिद्धंदि ओम प्रकाश हुडला (निर्दलीय) के खिलाफ लड़ रहे है। कांग्रेस ने इस सीट से अजय बोहरा को उतारा है। साल 2008 में हुए परिसीमन में अंता विधानसभा क्षेत्र बना है। यहां दो चर्चित चेहरों में मुकाबला होने से हर किसी की निगाह इस सीट पर बनी हुई है। भाजपा के मंत्री और कांग्रेस के पूर्व मंत्री व प्रदेश उपाध्यक्ष यहां चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार फिर से भाजपा के डॉ. प्रभुलाल सैनी और कांग्रेस से प्रमोद जैन भाया के बीच मुकाबला है। 2008 में हुए चुनाव में कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया ने जीत दर्ज की। वहीं साल 2013 में भाजपा के प्रभुलाल सैनी ने जीत हासिल की।

करोड़ी लाल मीणा की पत्नी गोमला देवी को भाजपा ने टिकट दिया
वहीं सपोटरा सीट पर मुकाबला और भी रोचक है। यहां पर मीणा समुदाय के नेता करोड़ी लाल मीणा की पत्नी गोमला देवी को भाजपा ने टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने इस सीट पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेश मीणा को टिकट दिया है। भरतपुर जिले की डीग-कुम्हेर सीट राजपरिवार के द्वारा चुनाव लड़े जाने के कारण हमेशा चर्चा में रहती है। कांग्रेस की तरफ से मौजूदा विधायक विश्वेंद्र सिंह को उतारा गया है। उनके सामने भारतीय जनता पार्टी में स्वर्गीय दिगंबर सिंह के बेटे डॉ. शैलेश सिंह को टिकट दिया है। शैलेश के यहां सहनभूति वोट मिल सकते हैं।












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