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KCR की प्लानिंग करेगी कमाल या कांग्रेस की बातों का होगा असर? क्या कहता है पार्टियों का चुनाव प्रचार?

Telangana Elections 2023 : तेलंगाना में विधानसभा की 119 सीटों के लिए आज सुबह 7 बजे से मतदान जारी है, चुनावी नतीजे 3 दिसंबर को आने वाले हैं। बीआरएस, कांग्रेस और भाजपा ने चुनावी प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है लेकिन जीतेगा वो ही जिसे जनता का प्यार और साथ मिलेगा, वैसे दिग्गजों के मुताबिक यहां पर सीधी लड़ाई बीआरएस बनाम कांग्रेस है।

Telangana Elections 2023

कल्याणकारी योजनाओं और नौ साल के स्थायी शासन के बाद भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को पूरा भरोसा है कि उसकी ही सत्ता में वापसी होगी। बीआरएस ही वो पहली पार्टी थी जिसने अगस्त में ही अपने पार्टी के उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया था, जिससे उसे अन्य दलों की तरह अपने नेताओं की नाराजगी नहीं झेलनी पड़ी, जिसका सामना कांग्रेस और बीजेपी को करना पड़ा।

119 विधानसभा क्षेत्रों की 97 बैठकों में हिस्सा लिया

यही नहीं पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव (केसीआर) ने जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए 'राज्यव्यापी अभियान कार्यक्रम' का ऐलान किया था, जो कि 15 अक्टूबर से लागू हुआ और उसके तहत उन्होंने खुद 119 विधानसभा क्षेत्रों की 97 बैठकों में हिस्सा लिया जबकि उनके बेटे और भतीजे क्रमश: मंत्री के. टी रामा राव और टी. हरीश राव ने 100 से अधिक जनसभाओं को संबोधित किया।

निजामाबाद में ताबड़तोड़ रैलियां की

तो वहीं उनकी बेटी और बीआरएस विधायक के. कविता ने अपने गृह क्षेत्र निजामाबाद में नंवबर के पहले दिन से ही ताबड़तोड़ रैलियां की। इन रैलियों में पार्टी ने प्रमुखता से निम्नलिखित तीन बिंदुओं पर काम किया।

  • खुद की कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार
  • उनकी पार्टी और राज्य का विकास ( साल 2014 के बाद से)
  • भाजपा और कांग्रेस दोनों राज्य के विकास के लिए अच्छे नहीं हैं।

कांग्रेस का प्रचार अभियान

तो वहीं दूसरी ओर बीआरएस को सीधे चुनौती देने वाली कांग्रेस पार्टी ने भी इस बार जमकर राज्य में चुनाव प्रचार किया है। उसका दावा है कि इस बार जनता 'पंजे' का साथ देगी। कांग्रेस के सभी स्टार प्रचारकों ने पूरे गांधी परिवार के साथ मिलकर यहां पर ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो किया।

कांग्रेस का सीपाआई के साथ गठबंधन

कांग्रेस यहां पर सीपाआई के साथ गठबंधन में उतरी है। सीपीआई केवल कोठागुडेम सीट से चुनाव लड़ रही है और अन्य 118 निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस का समर्थन कर रही है। तो वहीं तेलंगाना कांग्रेस प्रमुख ए रेवंत रेड्डी इस वक्त काफी लोकप्रिय नेताओं में शामिल हैं और उन्होंने पार्टी के प्रचार में जमकर हिस्सा लिया है। उनकी रैलियों में भारी भीड़ देखी गई, जिसकी वजह से ही कांग्रेस पूरे आत्मविश्वास से कह रही है कि 'इस बार राज्य में पंजे का ही राज होगा।' यही नहीं कांग्रेस ने अपनी पूरी कर्नाटक इकाई को भी चुनावी अभियान में शामिल किया, जिन्होंने हाल ही कर्नाटक में भारी जीत हासिल की थी।

"मार्पू कवली, कांग्रेस रावली"

कांग्रेस ने अपनी चुनावी रैलियों जमकर ये नारा लगाया है कि-"मार्पू कवली, कांग्रेस रावली" (हम बदलाव चाहते हैं, कांग्रेस को लाना चाहिए) उसने जनता से वादा किया है कि 'वो सत्ता में आई तो वो जनता को बीआरएस की ओर दिए जा रहे लाभ और सुविधाओं से 6 गुना ज्यादा सुविधाएं और लाभ देगी। कांग्रेस चुनाव प्रचार में 'वीआरएस टू बीआरएस' स्लोगन भी लगाती दिखी, कर्नाटक जीतने के बाद आत्मविश्वास से भरी कांग्रेस को पूरा भरोसा है कि राज्य के मुस्लिमों का साथ उसी को मिलेगा।

राज्य में इंदिरम्मा राज्यम लाएंगे-कांग्रेस

लेकिन ये चुनाव प्रचार तब तीखा हो गया जब प्रचार अभियान में कांग्रेस की ओर से कहा गया कि वो सत्ता में आई तो वो राज्य में 'इंदिरम्मा राज्यम' लाएंगे, जिसपर मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने जमकर हमला बोला था।

'इंदिराम्मा राज्यम आपातकाल, मुठभेड़ों, गोलीबारी...'

उन्होंने कहा था कि "आज, कांग्रेस के लोग कह रहे हैं कि अगर वे जीतेंगे तो वे इंदिरम्मा राज्यम लाएंगे। इंदिरम्मा राज्यम कौन चाहता है? तेलंगाना आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने लगभग 400 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, सच तो ये है कि 'इंदिराम्मा राज्यम आपातकाल, मुठभेड़ों, गोलीबारी और हत्याओं से भरा था।'

क्या बीजेपी यहां रही फीकी-फीकी?

तेलंगाना में बीजेपी चमक में तब आई थी, जब साल 2020 में उसने यहां के हैदराबाद निकाय चुनावों में 48 सीटें जीती थीं और इसके ठीक बाद उसने उपचुनावों में बीआरएस से दो अहम सीटें दुब्बाक और हुजूराबाद को छीन लिया था लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक कर्नाटक चुनाव हारने के बाद उसका असर फिलहाल यहां धूमिल होता दिख रहा है। इसका एक कारण ये भी बताया जा कहा है कि भाजपा ने चुनावों से पहले किशन रेड्डी को फायरब्रांड नेता बंदी संजय की जगह पार्टी प्रमुख बना दिया, जिससे बंदी संजय के समर्थकों को बड़ा धक्का लगा और इसी वजह से प्रचार में वो बात नहीं दिखी जो कि दिखनी चाहिए थी।

बड़े और लोकप्रिय नेताओं को प्रचार के लिए उतारा

हालांकि भाजपा ने कांग्रेस की तरह ही अपने बड़े और लोकप्रिय नेताओं को प्रचार के लिए यहां उतारा, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में आठ सार्वजनिक सभाओं को संबोधित किया और हैदराबाद में एक रोड शो भी किया जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य भर में 22 जनसभाओं को संबोधित किया।

तेलुगू भाषी नेताओं की कम दिखी रैली में

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जैसे नेताओं ने जमकर चुनाव प्रचार किया लेकिन किशन रेड्डी और राज्यसभा सांसद के लक्ष्मण को छोड़कर भाजपा की रैली में एक भी तेलुगू भाषी नेता नहीं था। फायरब्रांड संजय करीमनगर तक ही सीमित रहे, जहां उनके सामने बीआरएस मंत्री गंगुला कमलाकर जैसे नेता खड़े हैं।

"वंशवादी राजनीति" को लेकर हमला बोला

भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार में बीआरएस सरकार के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया और जमकर उसपर हमला बोला। पार्टी के सभी नेताओं ने अपनी हर रैली में यही कहा कि 'केसीआर की सरकार की वजह से केंद्र की योजनाओं का लाभ राज्य को मिल ही नहीं पा रहा है। 'नेताओं ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना, मिशन भागीरथ , मियापुर भूमि सौदा, ओआरआर घोटाला आदि जैसी विभिन्न परियोजनाओं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया । भाजपा ने बीआरएस और कांग्रेस दोनों पर उनकी "वंशवादी राजनीति" को लेकर भी हमला बोला।

रायथु बंधु योजना पर आयोग ने लगाई रोक

चुनाव प्रचार खत्म होने से दो दिन पहले चुनाव आयोग से तेलंगाना सरकार को बड़ा झटका लगा था क्योंकि उसने 'रायथु बंधु योजना' पर रोक लगा दी क्योंकि उसने कहा कि 'राज्य में अचार संहिता लागू है ऐसे में वित्तीय मदद नहीं दी सकती है।' मालूम हो कि पहले आयोग ने ही सरकार को इसकी परमिशन दी थी लेकिन कहा था कि इसे वो चुनाव प्रचार के तौर पर इस्तेमाल ना करें लेकिन कांग्रेस ने आयोग में शिकायत की थी कि केसीआर और उनकी सरकार इसका मिसयूज कर रहे हैं, जिसके बाद आयोग ने ये फैसला सुना दिया। आयोग के इस फैसले के बाद तेलंगाना सरकार तिलमिला गई और उसने कांग्रेस पर 'किसान विरोधी' होने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में कांग्रेस ने बीआरएस पर किसानों को बेसहारा छोड़ने का आरोप मढ़ा था।

प्रमुख नेता और हाई प्रोफाइल सीटें

  • गजवेल में भाजपा के एटाला राजेंदर और कामारेड्डी में रेवंत रेड्डी केसीआर के लिए बड़ी चुनौती।
  • बीआरएस के एम कृष्णा राव का कुकटपल्ली में जन सेना पार्टी के एम प्रेम कुमार से सीधा मुकाबला।
  • मल्काजगिरी में भाजपा के एन रामचंद , बीआरएस के एम राजशेखर रेड्डी और कांग्रेस के मयनामपल्ली हनुमथ राव के बीच कड़ा मुकाबला।
  • कांग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेट कैप्टन मोहम्मद अजहरुद्दीन का मुकाबला जुबली हिल्स में एआईएमआईएम के मौजूदा पार्षद राशेद फराज़ुद्दीन और बीआरएस विधायक मगंती गोपीनाथ से है।
  • रेवंत रेड्डी कोडंगल में बीआरएस मंत्री पटनम नरेंद्र रेड्डी से भिड़ेंगे तो वहीं पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी का सीधा मुकाबला सत्तारूढ़ पार्टी के के उपेंदर रेड्डी से है।
  • हैदराबाद के पूर्व मेयर एआईएमआईएम के एम माजिद हुसैन नामपल्ली में कांग्रेस के फिरोज खान से भिड़ेंगे।

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