तेलंगाना ने आंध्र प्रदेश के एचएनएसएस चरण II पर जताई आपत्ति, इसे बताया राज्‍य पुनर्गठन का उल्लंघन

तेलंगाना ने आंध्र प्रदेश द्वारा हांड्री नीवा सुजला श्रावंती (एचएनएसएस) के विस्तार पर कड़ी आपत्ति जताई है, इसके साथ ही तेलंगाना ने दावा किया कि ये परियोजना में जो दो नए घटक जोड़ने की मांग की गई थी वो 2014 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम का उल्लंघन था। दावा किया गया है कि एचएनएसएस के विस्तार कार्यों को शीर्ष परिषद की मंजूरी नहीं मिली थी जो एपी पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अनुसार अनिवार्य है।

Telangana

राज्य सिंचाई विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ (जनरल) सी मुरलीधर ने कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (केआरएमबी) के अध्यक्ष ने गुजारिश की है कि बिना किसी बदलाव के नई लिफ्ट सिंचाई योजनाओं को जोड़कर केंद्रीय जल आयोग या केआरएमबी द्वारा मूल्यांकन करवाकर आंध्र प्रदेश को एचएनएसएस परियोजना करने से रोका जाए।

बता दें हांड्री नीवा सुजला श्रावंती (एचएनएसएस) के विस्तार कार्योक को शीर्ष परिषद से मंजूरी नहीं मिली थी जो आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अनुसार अनिवार्य है। तेलंगाना ने कहा ऐस सभी उल्‍लंघनों को आवश्‍यक कार्रवाई के बारे में जल शक्ति मंत्रालय को सूचित किया जाना चाहिए।

इंजीनियर-इन-चीफ (जनरल) सी मुरलीधर ने ये भी ध्‍यान दिलाया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने भैरवानी टिप्पा परियोजना से पानी उठाने के लिए सर्वेक्षण और समतलीकरण कार्य करने के लिए एक निविदा नोटिस जारी की थी, इसका उद्देश्‍य अनंतपुर जिले में 41 00 एकड़ भूमि को स्थिर करने के लिए गुम्‍मग्ट्टा, रायदुर्गम, डी हीरहल और कालेकल मंडलों में 58 लघु सिंचाई टैंकों को पानी उपलब्ध करवाना था। इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि आंध्र प्रदेश एचएनएसएस चरण II के कार्यान्‍व्‍यन के लिए निविदा अधिसूचना जारी की थी जिसे तुरंत रोकने की आवश्‍यकता है।

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