Telangana Polls: तेलंगाना में BRS-BJP की लड़ाई असली है या सिर्फ 'नूरा कुश्ती'?
तेलंगाना के मंत्री और बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी पर पलटवार किया है। पीएम मोदी ने कहा था कि राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने अपनी पार्टी को एनडीए में लाने की इच्छा जताई थी, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया था।
अब केसीआर के बेटे केटीआर ने कहा है कि दरअसल 2018 में बीजेपी ने ही गठबंधन के लिए संदेश भेजा था। तेलंगाना के मंत्री ने अपने आरोपों के लिए एक्स (ट्विटर) का सहारा लिया है और कुछ अखबारों को सबूत के तौर पर भी दिखाने की कोशिश की है।

पीएम मोदी की टिप्पणी पर केटीआर का पलटवार
उन्होंने दावा किया है कि जबसे तेलंगाना राज्य बना है, कई अनुरोध के बावजूद बीआरएस ने किसी से चुनावों के दौरान गठबंधन नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अपने प्रदेश अध्यक्ष (तत्कालीन) डॉ. के लक्ष्मण के माध्यम से '2018 में सबेसे बड़ी झूठा पार्टी' ने बीआरएस से गठबंधन का संदेश भेजा था। क्या बिना दिल्ली के बॉस से मंजूरी के यह ऑफर दिया जा सकता था? यहां तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रिकॉर्ड पर बयान दे रहे हैं...'
बीजेपी ने केटीआर के दावों का किया खंडन
अपने दावे के समर्थन में उन्होंने कुछ पुराने अखबारों की तस्वीरें भी लगाई हैं। हालांकि, उनके दावों को बीजेपी के राज्यसभा सांसद लक्ष्मण ने गलत इरादों से की गई टिप्पणी बताया है और कहा है कि इसके लिए झूठे प्रोपेगेंडा का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने बुधवार को एक बयान में कहा, 'जीएचएमसी चुनावों के दौरान बीआरएस का एआईएमआईएम के साथ तालमेल था और दोनों ने मिलकर मेयर सीट हासिल की....बीजेपी कभी भी किसी परिवारवादी या वंशवादी राजनीतिक दल से को गठबंधन नहीं करेगी और न ही उसे प्रोत्साहन देगी।'
पीएम मोदी ने केसीआर पर की थी टिप्पणी
दरअसल, 3 अक्टूबर को निजामाबाद की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उन्होंने 2020 में हैदराबाद नगर निगम चुनाव के बाद एनडीए में शामिल होने के के चंद्रशेखर राव के अनुरोध को उनके 'कर्मों' के चलते ठुकरा दिया था। पीएम मोदी की इस टिप्पणी पर बीआरएस ने तत्काल भी पलटवार किया था।
कांग्रेस बता रही है 'नूरा कुश्ती'
लेकिन, कांग्रेस ने दोनों दलों के बीच शुरू हुई इस जुबानी जंग को अपने लिए मौका समझा और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तत्काल एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि 'बीआरएस और बीजेपी के बीच वास्तव में एक समझदारी है।' प्रधानमंत्री ने 'खुलकर स्वीकार' किया है, जो उन्होंने (राहुल) पिछले महीने कहा था कि बीआरएस का मतलब 'बीजेपी रिश्तेदार समिति' है। रामा राव यह भी दलील दे रहे हैं कि उनकी पार्टी को बीजेपी के साथ गठबंधन की जरूरत क्यों पड़ती, जो कि 105 विधानसभा सीटों में अपनी जमानत भी नहीं बचा सकी।
तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
दरअसल, इस बार जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बढ़ते जा रहे हैं। सत्ताधारी भारत राष्ट्र समिति और कांग्रेस के अलावा बीजेपी भी प्रदेश में गंभीर खिलाड़ी बनकर उतर रही है।
जहां बीआरएस के सामने अपनी सरकार बचाए रखने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस को कर्नाटक की जीत ने इतना उत्साहित कर दिया है कि वह चुनावी गारंटियों को यहां भी अपनी जीत की गारंटी मान रही है। उसकी पूरी कोशिश है कि एंटी-इंकंबेंसी वाला वोट किसी भी सूरत में बीजेपी के खाते में ना जा पाए। क्योंकि, चुनावों से पहले भाजपा ही राज्य में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाती नजर आई है।
इसलिए वह बीआरएस और बीजेपी में 'गुप्त तालमेल' के आरोप लगा रही है। ऐसे में अब जिस तरह से भाजपा और बीआरएस के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए हैं, उससे यह संदेश भी निकल रहा है कि दोनों में किसी तरह के सहयोग के आरोप निराधार हैं। बीजेपी के प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर यही दलील भी दे रहे हैं। लेकिन, लगता है कि कांग्रेस को अपनी चुनावी राजनीति के लिए इसे 'नूरा कुश्ती' बताने में ही भलाई दिख रही है। (इनपुट- पीटीआई)












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