तेलंगाना चुनाव: दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को टिकट देने में दी तवज्जाे, नाराज हुए भाजपा के पुराने नेता
तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 30 नवंबर को होगा और परिणाम 3 दिसंबर को घोषित होगा। तेलंगाना में इस बार बीआरएस, कांग्रेस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है। वहीं भाजपा ने अब तक 88 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी हैं लेकिन तेलंगाना चुनाव के लिए दूसरी पार्टियां छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं को अधिकांश टिकट दिया गया है, जिस कारण तेलंगाना में भाजपा के वफादार नेता भड़क उठे हैं।

बता दें तेलंगाना चुनाव की तारीखों की घोषणा के कई दिनों बाद भाजपा ने उम्मीदवारों की सूची जारी कर पहले ही देर कर दी थी जिस कारण उम्मीदवारों के पास चुनाव प्रचार करने का समय है। वहीं जो भाजपा ने 88 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है और उनमें से केवल 20 सीटें पुराने नेताओं को दी गई हैं, और लगभग 15 सीटें उन नेताओं को दी गई हैं जो लगभग पांच या दस साल पहले पार्टी में शामिल हुए हैं।
हाल ही में शामिल हुए दलबदलुओं को पार्टी नेतृत्व द्वारा अधिकांश टिकट दिए जाने को लेकर पार्टी के पुराने और वफादार नेताओं के भीतर व्यापक असंतोष देखा जा रहा है।
बता दें भाजपा अब तक 88 निर्वाचन सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। जिसमें केवल 20 सीटें भाजपा के पुराने नेताओं को दी और लगभग 15 सीटें उन नेताओं को दी गई हैं जो लगभग पांच से 10 साल पहले पार्टी में शामिल हुए थे। बाकी सीटें उन नेताओं को दी गईं जो हाल ही में प्रतिद्वंद्वी पार्टियों से शामिल हुए हैं। इससे वरिष्ठजन नाराज हैं।
तेलंगाना भाजपा ने जो अब तक 88 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है उसमें तीन मौजूदा सांसदों को छोड़कर (अरविंद धर्मपुरी (कोरुटला), बंदी संजय (करीमनगर), सोयम बापू राव (बोथ)) के अलावा कुछ विधायकों और पूर्व विधायकों को छोड़कर बाकी उम्मीदवार अभी बीते एक, दो साल में दूसरी पार्टियां छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। भाजपा ने इन्हें तेलंगाना में उम्मीदवार बनाने के चक्कर में पार्टी के पुराने नेताओं को दरकिनार कर दिया है।
इसमें से कुछ पूर्व मंत्री चितरंजन दास (जाडचेरला) और सी कृष्णा यादव (अंबरपेट) सूची जारी होने से कुछ दिन पहले पार्टी में शामिल हुए थे। यहां तक कि पूर्व मंत्री मैरी शशिधर रेड्डी (सनथनगर) भी कुछ महीने पहले पार्टी में शामिल हुए थे। सूत्रों के अनुसार जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला हे वो चुनाव से दूर रहने की योजना बना रहे थे या बेहतर विकल्प तलाश रहे थे।












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